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धनबादः एडीजे उत्तम आनंद की हत्या के पीछे हो सकता है इस अपराधी का हाथ, SIT जांच में जुटी

अमूमन हर जज का पाला अपराधियों, गैंगस्टर, आतंकवादियों, माफियाओं और क़ातिलों से पड़ता है. अगर ये क़त्ल है, तो फिर सवाल उठता है कि छह महीने पहले धनबाद आए जज उत्तम आनंद की जान कौन लेना चाहेगा?

जज की हत्या के पीछे जेल में बंद कुख्यात अपराधी अमन सिंह का नाम भी आ रहा है जज की हत्या के पीछे जेल में बंद कुख्यात अपराधी अमन सिंह का नाम भी आ रहा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीसीटीवी फुटेज से सामने आई खौफनाक वारदात
  • एसआईटी कर रही है जज हत्याकांड की जांच
  • सामने आ रहे हैं तीन नाम

झारखंड के धनबाद में अपर जिला जज उत्तम आनंद की हत्या का मामला दिल्ली तक पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड की जांच पर राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. वारदात की सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद साजिश की आशंका सही साबित हो गई. फुटेज देखते ही पुलिस समझ गई कि मामला गड़बड़ है. जज साहब की मौत सड़क हादसा नहीं बल्कि मर्डर है. अब सवाल उठता है कि आखिर कौन है वो शख्स, जो इस कत्ल की साजिश को पर्दे के पीछे बैठकर बुन रहा था? कौन है वो, जिसके इशारे पर सरेआम एडीजे का मर्डर किया गया?

धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. पुलिस और सरकार दोनों पर सुप्रीम कोर्ट का दबाव भी है. इस मामले की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी कत्ल के एंगल से ही इस मामले की जांच कर रही है. जांच करने वाली एसआईटी की अगुवाई धनबाद के सिटी एसपी कर रहे हैं. जबकि एसएसपी धनबाद और बोकारो रेंज के डीआईजी भी इस जांच की निगरानी कर रहे हैं.

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अमूमन हर जज का पाला अपराधियों, गैंगस्टर, आतंकवादियों, माफियाओं और क़ातिलों से पड़ता है. अगर ये क़त्ल है, तो फिर सवाल उठता है कि छह महीने पहले धनबाद आए जज उत्तम आनंद की जान कौन लेना चाहेगा? वो ऐसे कौन-कौन से मामलों की सुनवाई कर रहे थे, जिससे जुड़े लोग उनके दुश्मन हो सकते हैं. तो पिछले छह महीने में जज उत्तम आनंद ने यूं तो बहुत से केस देखे, बहुत से लोगों की ज़मानत अर्जियां खारिज की, मगर फिलहाल शक की सुई दो मामलों और उनसे जुड़े लोगों की तरफ घूम रही है.

इनमें से एक केस में तो पिछले हफ्ते ही जज साहब ने एक आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की है. इत्तेफाक से इन दोनों मामलों के तार कहीं ना कहीं धनबाद की तीन सबसे ताकतवर जगहों से जाकर जुड़ते हैं. इनमें से एक है सिंह मेंशन, दूसरा कुंती निवास और तीसरा रघुकुल. झारखंड या धनबाद का शायद ही कोई ऐसा शख्स हो, जो इन तीनों नामों को ना जानता हो. वो इसलिए कि इन तीनों नाम के साथ एक ऐसा नाम जुड़ा है, जिसने बरसों इस इलाक़े पर राज किया.

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वो नाम है सूर्यदेव सिंह. कोयला के सबसे बड़े किंग. लेकिन सूर्यदेव सिंह की मौत के बाद धीरे-धीरे उनके भाइयों, बेटों और दूसरे रिश्तेदारों में ठेके, राजनीति और वर्चस्व को लेकर दूरियां बन गईं. सूर्यदेव सिंह के बाद उनकी विरासत को उनके बेटे संजीव सिंह ने आगे बढ़ाया. संजीव सिंह झरिया से विधायक भी रहा, लेकिन फिर अपने ही एक रिश्तेदार के क़त्ल के जुर्म में वो जेल चला गया. संजीव सिंह अब भी जेल में है.

बाद में संजीव सिंह के एक बेहद करीबी रंजय सिंह की जनवरी 2017 में हत्या कर दी गई. इस मामले में झारखंड के कुख्यात अपराधी अमन सिंह का नाम आया. अमन सिंह और उसके दो साथियों को गिरफ्तार भी किया गया है. अमन सिंह अब जेल में है. रंजय सिंह के कत्ल के 2 महीने बाद मार्च 2017 में रघुकुल के बच्चा सिंह के भतीजे नीरज सिंह की भी हत्या कर दी गई. बच्चा सिंह सूर्यदेव सिंह के भाई हैं. रंजय सिंह और नीरज सिंह के ही कत्ल का मामला अब भी अदालत में है.

रंजय सिंह के क़त्ल की फ़ाइल तो पिछले साल ही फिर से खुली थी. इत्तेफाक से रंजय सिंह के कत्ल के आरोपी अमन सिंह की ज़मानत अर्ज़ी पिछले हफ्ते ही जज उत्तम आनंद की अदालत में आई थी. लेकिन जज साहब ने अमन सिंह की जमानत अर्ज़ी खारिज कर दी. खबर ये है कि अमन सिंह बेशक जेल में है, लेकिन जेल में रहते हुए ही उसका पूरा धंधा पहले की तरह ही चल रहा है.

तो सवाल ये है कि अगर जज उत्तम आनंद की मौत वाकई कत्ल है, तो क्या इस कत्ल के पीछे अमन सिंह का हाथ है? या फिर मौके का फायदा उठा कर कोई अमन सिंह को फंसाना चाहता है? सवाल ये भी है कि इस साज़िश के पीछे अगर बड़े और ताकतवर लोग हैं, तो क्या झारखंड पुलिस जज की मौत का सच सामने ला पाएगी? या फिर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी?

 

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