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IPC Section 157: गैरकानूनी सभा के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों से जुड़ी है ये धारा

आईपीसी की धारा 157 में गैरकानूनी सभाओं या जमाव या भीड़ के लिए भाड़े पर बुलाए गए व्यक्तियों को आश्रय देना परिभाषित किया गया है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 157 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

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भाड़े पर बुलाए गए लोगों को पनाह देने से जुड़ी है ये धारा भाड़े पर बुलाए गए लोगों को पनाह देने से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भाड़े पर बुलाए गए लोगों को पनाह देने से जुड़ी है ये धारा
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में गैरकानूनी भीड़ (illegal mob), गैरकानूनी जमाव (Unlawful gathering), बल्वा, दंगा और उपद्रव (Riot) से संबंधित मामलों के लिए कई तरह के कानूनी प्रावधान (Provision) किए गए हैं. जिनका प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर किया जाता है. ऐसे ही आईपीसी की धारा 157 में गैरकानूनी सभाओं या जमाव या भीड़ के लिए भाड़े पर बुलाए गए व्यक्तियों को आश्रय देना परिभाषित किया गया है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 157 इस बारे में क्या जानकारी देती है? 

आईपीसी की धारा 157 (Indian Penal Code Section 157) 
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 157 (Section 157) के मुताबिक, जो कोई अपने आधिपत्य या प्रभार, या नियंत्रण (Possession or charge, or control) के अधीन किसी गृह या परिसर (Home or premises) में किन्हीं व्यक्तियों को, यह जानते हुए कि वे व्यक्ति विधिविरुद्ध जनसमूह (Unlawful gathering) में सम्मिलित होने या सदस्य बनने के लिए भाड़े (hired) पर लाए गए, वचनबद्ध या नियोजित (Committed or planned) किए गए हैं या भाड़े पर लाए जाने, वचनबद्ध या नियोजित किए जाने वाले हैं, संश्रय (Shelter) देगा, आने देगा या एकत्र करेगा, तो वह सजा का हकदार (Deserving of punishment) माना जाएगा.
 
सजा का प्रावधान (Punishment provision)
ऐसे मामले में दोषी पाए गए व्यक्ति को छह महीने के कारावास से दंडित (Punished with imprisonment) किया जाएगा. या उस पर आर्थिक जुर्माना (Monetary penalty) किया जाएगा. या फिर दोषी को दोनों ही प्रकार से दंडित (Punished) किया जा सकता है. यह एक जमानती (Bailable) और संज्ञेय अपराध (Cognizable offense) है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय (Triable by magistrate) है. यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं (Not negotiable) है.

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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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