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IPC Section 154: जिस स्थान पर जमा हो गैरकानूनी भीड़, उसी से जुड़ी है आईपीसी की ये धारा

आईपीसी की धारा 154 में उस जगह या जमीन के मालिक या कब्जेदार के बारे में प्रावधान किया गया है, जहां गैरकानूनी भीड़ जमा होती है या उपद्रव करती है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 154 इस बारे में क्या बताती है?

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उपद्रव वाली जगह से संबंधित है ये धारा उपद्रव वाली जगह से संबंधित है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उपद्रव वाली जगह से संबंधित है ये धारा
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में अपराध और उनकी सजा के अलावा उपद्रव की घटनाओं को लेकर भी कई तरह के कानूनी प्रावधान किए गए हैं. ताकि उपद्रव, दंगा, आगजनी और हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई हो सके. इसी तरह से आईपीसी की धारा 154 में उस जगह या जमीन के मालिक या कब्जेदार के बारे में प्रावधान किया गया है, जहां गैरकानूनी भीड़ उपद्रव करती है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 154 इस बारे में क्या बताती है? 

आईपीसी की धारा 154 (Indian Penal Code Section 154) 
भारतीय दंड संहिता 1860 के अध्याय 8 की धारा 154 (Section 154) में उस भूमि के स्वामी या अधिवासी के बारे में प्रावधान किया गया है, जिस पर ग़ैरक़ानूनी जनसमूह एकत्रित हो और उपद्रव करे. IPC की धारा 154 के अनुसार, जब कभी कोई ग़ैरक़ानूनी जनसमूह या उपद्रव हो, और जिस भूमि पर ऐसा ग़ैरक़ानूनी जनसमूह या उपद्रव हो, उसका स्वामी या अधिवासी और ऐसी भूमि में हित रखने वाला या हित रखने का दावा करने वाला व्यक्ति, या उसका अभिकर्ता या प्रबंधक यदि यह जानते हुए कि ऐसा अपराध किया जा रहा है या किया जा चुका है या इस बात का विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे अपराध का किया जाना सम्भाव्य है, उस बात की अपनी क्षमता और शक्ति अनुसार शीघ्र सूचना निकटतम पुलिस थाने के प्रधान आफिसर को न दे या उस स्तिथि में, जिसमें कि उसे या उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि अपराध लगभग किया ही जाने वाला है, अपनी क्षमता और शक्ति अनुसार सब क़ानूनी साधनों का उपयोग कर उसका निवारण नहीं करता या करते और उसके हो जाने पर अपनी क्षमता और शक्ति अनुसार सब क़ानूनी साधनों का उपयोग उस ग़ैरक़ानूनी जनसमूह को बिखरने या उपद्रव को दबाने के लिए नहीं करता या करते, तो वह आर्थिक दंड हकदार होगा.

सजा का प्रावधान
ऐसे मामले में उपद्रव, आदि के बारे में जानकारी न देने वाल वाले भूमि के स्वामी या अधिवासी को दोषी पाए जाने पर एक हजार रुपए तक का आर्थिक दंड भुगतना होगा. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. इस तरह के मामले किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है. यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है.

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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

 

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