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दिल्ली: थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च पर आयकर विभाग की छापेमारी

राजनीतिक फंडिग को लेकर बुधवार सुबह शुरू हुई आयकर विभाग की छापेमारी बढ़ते-बढ़ते दिल्ली के थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) तक पहुंच गई. इनकम टैक्स विभाग की एक टीम CPR ऑफिस पहुंची है. यहां पर भी जांच-पड़ताल की जा रही है. इससे पहले आयकर विभाग ने 7 राज्यों में छापेमारी की थी. बताया गया कि राजनीतिक फंडिंग को लेकर ये छापेमारी हुई है. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर आयकर विभाग की ओर से कार्रवाई की गई.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

आयकर विभाग (Income Tax) ने दिल्ली में स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) पर बुधवार को छापेमारी की है. इनकम टैक्स विभाग की टीम CPR ऑफिस पहुंचकर जांच में जुटी हुई है.

इससे पहले आज ही आयकर विभाग ने 7 राज्यों में छापेमारी की थी. बताया गया कि राजनीतिक फंडिंग को लेकर ये छापेमारी हुई है. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर आयकर विभाग की ओर से कार्रवाई की गई.

यूपी में समाजवादी क्रांतिकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के घर पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की. हुसैनगंज के छितवापुर इलाके में उनका आवास है. वहीं, राजस्थान के गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव के 53 ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े. राजेन्द्र यादव के शिक्षा संबंधी कई बिजनेस हैं. वो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी मंत्री हैं. 

सूत्रों ने बताया है कि यादव के ठिकानों पर छापेमारी मिल डे मिल और पौष्टिक आहार बनाने वाले निर्माता, सप्लाई करने वालों, उनके सहयोगियों और परिचितों के यहां की जा रही है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की.

बताया जाता है कि सबसे ज्यादा 37 ठिकानों पर छापेमारी जयपुर और कोटपुतली में की जा रही है. जयपुर में निर्माता और सप्लायर के घर, फैक्ट्री, कार्यालय, गोदाम और कोटपुतली में सहयोगियों के ठिकानों पर जांच चल रही है. इसे साथ ही इनके सहयोगियों के दिल्ली में आठ, महाराष्ट्र में सात और उत्तराखंड में एक ठिकाने पर कार्रवाई चल रही है.

250 से ज्यादा आयकर कर्मी शामिल

छापेमारी में आयकर विभाग के 250 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं. इनके सहयोग के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और सीआईएसएफ के जवान भी लगाए गए हैं. गौरतलब है कि पौष्टिक आहार के निर्माता और सप्लायर मध्य प्रदेश में पौष्टिक आहार के वितरण में दागदार रह चुका है. यह मामला साल 2018 का बताया जा रहा है.

राजनीतिक फंडिंग का शक

सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग को इस तरह की जानकारी मिली है कि ठेके लेकर बड़ा घालमेल किया जा रहा था. ठेकों को लेकर यह चर्चा भी है कि इसमें तत्कालीन राज्य सरकारों का हाथ रहा है जिसके एवज में राजनीतिक फंडिंग की जाती है.

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