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जुर्म

गांव की फूलन से बैंडिट क्वीन तक..दहशत का वो सफर, देखें PHOTOS

गांव की फूलन से बैंडिट क्वीन तक..दहशत का वो सफर, देखें PHOTOS
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बीहड़ में दहशत का दूसरा नाम, रॉबिनहुड, दस्यु सुंदरी और बैंडिट क्वीन..इन नामों से जानी जाने वाली फूलन देवी की मौत को आज पूरे 16 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी लोगों के जेहन में फूलन देवी के खौफ की कहानियां बखूबी जिंदा है.
गांव की फूलन से बैंडिट क्वीन तक..दहशत का वो सफर, देखें PHOTOS
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16 साल पहले आज ही के दिन यानी 25 जुलाई, 2001 को फूलन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जानिए, फूलन देवी की जिंदगी के कुछ अनछुए पहलू. यूपी के छोटे से गांव पूर्वा में 10 अगस्त, 1963 को फूलन देवी का जन्म हुआ था.
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मल्लाह परिवार में जन्मी फूलन देवी, एक ऐसी महिला जिसका 38 सालों का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा. बचपन से ही उसने जातिगत भेदभाव को महसूस किया था. दलित परिवारों पर ऊंची जाति के लोगों दवारा होते अत्याचारों को देखा.
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11 साल की उम्र में शादी फिर रेप तो 15 साल की उम्र में गैंगरेप, हां वो फूलन देवी ही थी. जिस महिला का एक नहीं, दो नहीं बल्कि कई बार खुलेआम रेप हुआ, हां वो फूलन देवी ही थी. हैवानियत की पराकाष्ठा के बावजूद हिम्मत न हारने वाली, वो फूलन ही थी. किसी के लिए दस्यु सुंदरी तो किसी के लिये देवी, हां वो फूलन देवी ही थी.
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चंबल की दस्युसुंदरी बनने से लेकर सांसद बनने तक के सफर में फूलन देवी की कहानी किसी फिल्म से कम न थी. आखिरकार यह कहानी 25 जुलाई, 2001 को फिल्म के क्लाइमैक्स की तरह ही खत्म हो गई.
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फूलन की इस फिल्मी कहानी में कई किरदार थे. पिता, पति पुत्तुलाल, प्रेमी डकैत विक्रम मल्लाह और दुश्मन डकैत श्रीराम. अपने ही गांव वालों के सामने फूलन को कई बार बेइज्जती का घूंट पीना पड़ा था.
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अत्याचार, यातानाएं, प्रतिशोध और बेरहमी ने ही मासूम सी दिखने वाली फूलन को डकैत फूलन देवी बनाया. बेहमई कांड यानी वो दिन जब अपने साथ हुई ज्यादती को महसूस कर बदले की आग में जल रही फूलन देवी ने 14 फरवरी, 1981 को 22 लोगों को लाइन से खड़ाकर गोलियों से भुनवा दिया.
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बेहमई कांड के बाद सुर्खियों में आई दस्यु सुंदरी फूलन देवी अस्सी के दशक में बीहड़ में आतंक का सबसे बड़ा नाम थी. उरई, जालौन, मैनपुरी, इटावा और चंबल के इलाकों में फूलन कहीं खौफ तो कहीं रॉबिनहुड भी थी.
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मासूम सी फूलन यूं ही नहीं बैंडिट क्वीन बनी थी. बदले की आग ने उसके भीतर की कमजोरी को बंदूक उठाने पर मजबूर किया. समाज के लिए वो दस्यु थी लेकिन उसके खुद के मुताबिक वो अपने इंसाफ के लिये बागी बनी. डकैतों ने फूलन को अगवा कर उसकी इज्जत को तार-तार किया था.
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उसका प्रेमी डकैत विक्रम मल्लाह फूलन के लिए बीहड़ में बागी बना. जिसके बाद डकैत श्रीराम के लोगों ने विक्रम मल्लाह को गोलियों से भून दिया और फूलन को अगवा कर लिया. श्रीराम के लोगों ने उस रात फूलन का बारी-बारी से रेप किया और उसे पूरे बेहमई गांव में नंगा घुमाया.
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बेहमई कांड यानी फूलन देवी का बदला, इस कांड के बाद यूपी और एमपी पुलिस फूलन के पीछे हाथ धोकर पड़ गई थी. 12 फरवरी, 1983 को मध्य प्रदेश के भिंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने अपनी शर्तों पर फूलन ने आत्मसमर्पण कर दिया. बाद में वह राजनीति में आईं और सांसद बनीं.
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25 जुलाई, 2001 को फूलन देवी की उनके घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोपी शेर सिंह राणा ने दावा किया कि उसने फूलन से बेहमई कांड का बदला लिया है. आखिरकार फूलन देवी भी उसी बंदूक और गोली का शिकार हो गई, जिसने कभी उसे बैंडिट क्वीन के खिताब से नवाजा था.
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