दिल्ली की अदालतों में खुलेआम कानून तोड़ने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. ऐसी ही एक घटना बुधवार को तीस हजारी कोर्ट में हुई. यहां वकील ने ही हवाई फायरिंग कर दी. इससे पहले साकेत कोर्ट में एक महिला पर फायरिंग हो गई थी. इसी तरह रोहिणी कोर्ट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या ने सबको हैरान करके दिख दिया था. कोर्ट परिसर में पुलिस की तैनाती के बाद भी ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं. जानतें हैं कोर्ट की मर्यादा को तार-तार कर देने वाली आठ घटनाओं के बारे में.
तीस हजारी कोर्ट में बुधवार को दोपहर में वकीलों के दो गुटों ने आपसी बहस और झगड़े के बाद गोलीबारी हो गई. हालांकि इस घटना में कोई जख्मी नहीं हुआ. हालांकि तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. इस घटना का वीडियो सामने आया है. इसमें बार एसोसिएशन के दो पदाधिकारी दिखाई दिए. गोली चलाने वालों में मनीष शर्मा तीस हजारी कोर्ट की बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट हैं.
दिल्ली की साकेत कोर्ट में एक महिला पर फायरिंग की घटना सामने आई थी. 21 अप्रैल को 42 वर्षीय महिला राधा पर सुबह 10:30 बजे कोर्ट नंबर 3 के बाहर वकील कामेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ बिनोद सिंह ने पैसों के विवाद के कारण फायिरंग कर दी थी. महिला को तीन गोलियां लगी थीं. इस घटना में एक वकील भी जख्मी हो गया था. दावा किया गया कि हमलावर वकील ने पीड़ित महिला को 25 लाख रुपये दिए थे लेकिन बाद में महिला पैसा लौटाने में आनाकानी कर रही थी. इसके बाद आरोपी ने महिला के खिलाफ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज करवा दिया था. महिला उसी केस में सुनवाई के लिए कोर्ट आई थी. तभी वकील ने उस पर फायरिंग कर दी थी. फिलहाल हमले के वक्त आरोपी बार काउंसिल से निलंबित चल रहा था.
दिल्ली के रोहिणी कोर्ट परिसर में सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी की सुरक्षा जांच के दौरान वकील से कहासुनी हो गई थी. दोनों में विवाद इतना बढ़ गया था कि वहां फायरिंग हो गई. इस घटना में दो वकीलों को गोली लग गई थी लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं हुई थी.
रोहिणी की कोर्ट रूम नंबर 102 में दो साल पहले आईईडी ब्लास्ट हुआ था. इसके लिए 300 ग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था. यह धमाका तब हुआ था, जब मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट प्रीतु राज नियमित सुनवाई कर रहे थे. यह लो इंटेसिटी बम ब्लास्ट है. धमाके के लिए क्रूड बम का इस्तेमाल किया गया था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के 150 जवानों को जांच में लगाया गया था. डेढ़ सौ से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए थे. कोर्ट परिसर में पार्किंग के लिए गईं 1000 गाड़ियों की जांच की गई थी. इस मामले में भारत भूषण नाम के शख्स को अरेस्ट किया गया था. उसने पूछताछ में कबूल किया था कि साजिश के तहत उसने कोर्ट रूम में IED प्लांट किया था. वह अपने विरोधी वकील अमित वशिष्ठ को मारना चाहता था, जो उस वक्त कोर्ट रूम में मौजूद था.
दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में जज के सामने शूटआउट हो गया था. बकौल सब इंस्पेक्टर वीर सिंह 24 सितंबर को उनकी ड्यूटी गैंगस्टर जितेंद्र गोगी और इंस्पेक्टर को तिहाड़ जेल से रोहिणी कोर्ट में पेश करने की लगी थी. सुबह करीब 10 बजे पुलिस ने जब जितेंद्र गोगी को कोर्ट रूम में पेश किया, तभी जज चेंबर में वकीलों के वेश में बैठे दो गैंगस्टरों राहुल और जगदीप उर्फ जग्गा ने गोगी को ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं, जिससे उसकी मौत हो गई थी. दोनों हमलावर टिल्लू ताजपुरिया गैंग के थे.
दिल्ली की द्वारका कोर्ट में चेंबर नंबर 444 में रात 9 बजे गोलियां चली थीं. गोलीबारी की इस घटना में उपकार नाम के शख्स की मौत हो गई थी. जिस चेंबर यह घटना हुई थी, वह वकील अरुण शर्मा का था. घटना के दौरान कई वकील और अन्य लोग मौजूद थे. गोली चलाने वाला भी वकील ही था, जिसे बाद में अरेस्ट कर लिया गया था.
दिल्ली में किसी कोर्ट में रूम फायरिंग पहली वारदात कड़कड़डूमा कोर्ट में ही हुई थी. यहां जज के सामने चार नाबालिगों हमलावरों ने गैंगस्टर मोहम्मद इरफान उर्फ छेनू पहलवान पर फायरिंग कर दी थी. थर्ड बटालियन के हेड कॉन्स्टेबल रामकुमार ने गैंगस्टर छेनू को सुबह करीब 11:00 बजे कोर्ट रूम नंबर 73 में मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट सुनील गुप्ता पेश किया था. तभी छेनू पर फायरिंग हो गई थी. इस हमले में दोनों छेनू और रामकुमार जख्मी हो गए थे. हालांकि इलाज के दौरान छेनू की जान बच गई थी, जबकि रामकुमार की मौत हो गई थी. यह हमला छेनू के विरोधी गैंग के सरगना गैंगस्टर अब्दुल नासिर ने करवाया था, जिसकी साजिश तिहाड़ जेल में रची गई थी.
दिल्ली हाई कोर्ट परिसर के गेट नंबर 4 और 5 के बीच भीड़ भरे स्वागत कक्ष के बाहर सुबह 10:40 बजे एक जोरदार धमाका हुआ था. बताया जाता है कि जब यह धमाका हुआ था, उस समय करीब 100 से 200 लोग एंट्री पास पाने के लिए खड़े हुए थे. इस विस्फोट में 17 लोगों की मौत हो गई थी और 77 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे. विस्फोट इतना जोरदार था कि जहां धमाका हुआ था, वहां तीन से चार फुट गहरा गड्ढा हो गया था. गृह सचिव ने इस हाई इंटेंसिटी धमाके को आतंकी हमला करार दिया था. बाद में हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) ने ली थी.