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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर केस: मैट्रिक्स सेलुलर के सीईओ गौरव खन्ना को मिली जमानत

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाज़ारी से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए गौरव खन्ना समेत कुल 4 आरोपियों की जमानत याचिका पर भी सुनवाई की और उन सभी की जमानत मंजूर कर ली. चारों को आरोपियों को 50 हज़ार के निजी मुचलके पर रिहा किया गया है.

खान चाचा रेस्टोरेंट से बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए गए थे खान चाचा रेस्टोरेंट से बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए गए थे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी का मामला
  • नवनीत कालरा से जुड़े हैं गौरव खन्ना के तार
  • अदालत ने 50 हजार के मुचलके पर दी जमानत

दिल्ली में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी और नवनीत कालरा से जुड़े मामले में कोर्ट ने मैट्रिक्स सेलुलर के सीईओ गौरव खन्ना को जमानत दे दी. अदालत ने गौरव के साथ तीन अन्य आरोपियों को भी जमानत पर रिहा करने का फरमान सुनाया है. इस मामले में गुरुवार को भी एक आरोपी की जमानत पर सुनवाई होगी.

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाज़ारी से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए गौरव खन्ना समेत कुल 4 आरोपियों की जमानत याचिका पर भी सुनवाई की और उन सभी की जमानत मंजूर कर ली. चारों को आरोपियों को 50 हज़ार के निजी मुचलके पर रिहा किया गया है.

मंगलवार को आरोपियों की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि सरकार अगर खुद ही कोई नियम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के रेट को रेगुलेट करने के लिए नहीं बना रही है, तो फिर आप बिजनेसमैन को कैसे टारगेट कर सकते हो. अगर बिजनेसमैन कुछ कमाने के लिए महामारी में कुछ कर रहा है तो वो अपराध की श्रेणी में कैसे आ सकता है? आप जबरन आतंक क्यों दिखाना चाहते हो, पुलिस क्या दिखाना चाहती है?

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कोर्ट ने कहा कि हम मीडिया में नहीं है, क्या हो रहा है समाज में ये दिखाना हमारा काम नहीं है. राज्य को अपने लोगों के लिए निष्पक्ष होना ज़रूरी है. चाहे वो बिजनेसमैन ही क्यों नहीं हो. शराब भी महामारी में बेची जा रही है, क्योंकि उससे आर्थिक फ़ायदा होता है. लॉकडाउन में क्या बिज़नेस करना कोई अपराध है? मैं ये जानना चाहता हूं कि अगर कोई बिजनेसमैन बाहर से मांगकर कोई सामान देश में बेच रहा है तो ये क्या गलत है?

सुनवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों के वकील ने साकेत कोर्ट से कहा कि कुछ भी गलत नहीं किया गया. लेकिन उन्हें आरोपी बना दिया गया. अगर सब कुछ लीगल तरीके से बेचा गया. तो फिर होर्डिंग या कालाबाजारी कैसे हुई? लुकआउट नोटिस जारी करने का क्या मतलब है?

सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि पूरा विश्व कोरोना महामारी से प्रभावित है और आरोपियों ने उसका फायदा उठाते हुए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर महंगे दामों पर बेचने शुरू कर दिए. ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का रेट अमूमन 10 से 20 हजार रुपये होता है. लेकिन अभी की परिस्थितियों का फायदा उठाकर इन्होंने इसे 70 हजार तक में बेचना शुरू कर दिया.

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बताते चलें कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के मामले में दिल्ली के मशहूर खान चाचा रेस्टोरेंट के मालिक नवनीत कालरा का नाम सामने आने के बाद गगन दुग्गल का नाम सामने आया था. जो लंदन में रहता है. गगन दुग्गल ही नवनीत कालरा का पार्टनर है. गगन मैट्रिक्स सेलुलर कंपनी का मालिक है. ये कंपनी सिम कार्ड बनाती है. उस कंपनी का काम भारत में गौरव खन्ना देखता है.

दरअसल, गगन दुग्गल की मैट्रिक्स सेलुलर कंपनी के नाम से ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 20 हजार रुपये प्रति पीस के हिसाब से भारत में चीन से इम्पोर्ट किए गए थे. आरोप है कि नवनीत कालरा वही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 50 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक ज़रूरतमंद और परेशान लोगों को बेच रहा था. 

ये खुलासा होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मैट्रिक्स सेलुलर सर्विस कंपनी के CEO गौरव खन्ना को गिरफ्तार कर लिया था. 47 वर्षीय गौरव की गिरफ्तारी गुरुग्राम से हुई थी. गौरव ही नवनीत कालरा के साथ कॉ-ऑरडीनेट करता था.

बता दें कि इस मामले की शुरूआत 6 मई 2021 को हुई थी. जब साउथ दिल्ली पुलिस ने लोधी रोड सेंट्रल मार्केट के नेगे एंड जू बार में छापेमारी कर 32 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर बरामद किए थे. इसके बाद वहां से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जिनमें हितेश के अलावा गौरव, सतीश और विक्रांत भी शामिल था.

 

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