Bitconnect Coin Fraud & PMLA Case: क्रिप्टो करंसी की चमक-दमक के पीछे छुपे एक बड़े घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अहम कार्रवाई की है. अहमदाबाद जोन की ईडी ने बिटकनेक्टकॉइन घोटाले से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सूरत निवासी 33 वर्षीय निकुंज प्रविणभाई भट्ट और मुंबई निवासी 49 वर्षीय संजय कोटाडिया शामिल हैं.
यह गिरफ्तारी PMLA, 2002 की धारा 19(1) के तहत की गई है. जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों आरोपी बिटकनेक्ट क्रिप्टो फ्रॉड और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा थे. यह मामला देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले क्रिप्टो फ्रॉड से जुड़ा हुआ है.
ऐसे शुरू हुई ED की जांच
ईडी ने इस पूरे मामले की जांच सूरत CID क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इन एफआईआर में शैलेश बाबूलाल भट्ट, सतीश कुर्जिभाई कुंभानी और अन्य लोगों के नाम दर्ज थे. जांच में सामने आया कि सतीश कुंभानी ने बिटकनेक्टकॉइन के नाम पर लोगों को निवेश का लालच दिया. यह कॉइन उसी के स्वामित्व और नियंत्रण में था. जनता से जुटाई गई भारी रकम को बिटकॉइन और अचल संपत्तियों में निवेश कर छिपाया गया. यही रकम बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया बनी.
बिटकनेक्ट का फर्जी लेंडिंग प्रोग्राम
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि नवंबर 2016 से जनवरी 2018 के बीच बिटकनेक्ट ने अवैध तरीके से क्रिप्टोकरेंसी की पेशकश की. इसे “लेंडिंग प्रोग्राम” के रूप में प्रचारित किया गया. दुनिया भर के निवेशकों, जिनमें भारत के निवेशक भी शामिल थे, से पैसा और बिटकॉइन जमा कराए गए. बिटकनेक्ट के संस्थापक ने प्रमोटर्स का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा किया. इन प्रमोटर्स को निवेश लाने के बदले कमीशन दिया जाता था. पूरा मॉडल ही धोखाधड़ी पर आधारित था.
40% मुनाफे का झांसा
निवेशकों को फंसाने के लिए बिटकनेक्ट ने एक कथित “वोलैटिलिटी ट्रेडिंग बॉट” का दावा किया. कहा गया कि यह सॉफ्टवेयर हर महीने 40 फीसदी तक मुनाफा देगा. वेबसाइट पर रोजाना करीब 1% रिटर्न दिखाया जाता था, जो सालाना लगभग 3700% बताया गया. बाद में जांच में साफ हुआ कि यह सब झूठ था. न कोई ट्रेडिंग बॉट था और न ही निवेश का इस्तेमाल ट्रेडिंग में हुआ. निवेशकों का पैसा सीधे आरोपियों के डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया गया.
अपहरण और फिरौती से जुड़ी FIR
दूसरी एफआईआर ने इस केस को और सनसनीखेज बना दिया. आरोप है कि शैलेश बाबूलाल भट्ट ने अपने कथित निवेश की भरपाई के लिए अपहरण का रास्ता चुना. उसके साथियों ने सतीश कुंभानी के दो सहयोगियों पियूष सावलिया और धवल मावाणी का अपहरण किया. धवल मावाणी को छोड़ने के बदले 2254 बिटकॉइन, 11000 लाइटकॉइन और 14.5 करोड़ रुपये नकद की वसूली की गई. इस घटना ने क्रिप्टो फ्रॉड को संगठित अपराध से जोड़ दिया.
ईडी की छापेमारी
PMLA के तहत जांच के दौरान 9 जनवरी 2026 को ईडी ने पांच ठिकानों पर तलाशी ली. इस दौरान डिजिटल डिवाइस, अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए. इसके साथ ही शेयर, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टोकरेंसी और नकदी के रूप में करीब 19 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई. इन सबूतों ने यह साबित किया कि मनी लॉन्ड्रिंग का जाल बेहद गहरा और सुनियोजित था.
निकुंज भट्ट की भूमिका
जांच में सामने आया कि निकुंज प्रविणभाई भट्ट अपहरण और फिरौती की साजिश में शैलेश भट्ट का करीबी सहयोगी था. उसे फिरौती में मिले बिटकॉइन में से कम से कम 266 बिटकॉइन दो अलग-अलग क्रिप्टो खातों में मिले. इनमें से 10.9 बिटकॉइन ईडी ने अटैच कर लिए हैं. बाकी बिटकॉइन को छिपाने के लिए थर्ड पार्टी अकाउंट्स के जरिए घुमाया गया. इससे मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि हुई.
USDT और एथेरियम से रकम छिपाने की साजिश
ईडी के अनुसार, निकुंज भट्ट ने 246 बिटकॉइन को एथेरियम और USDT में बदल दिया. इसके बाद इन्हें कई डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया गया. इनमें संजय कोटाडिया से जुड़े वॉलेट्स भी शामिल थे. करीब 23 लाख USDT, यानी लगभग 20.70 करोड़ रुपये, संजय कोटाडिया से जुड़े खातों में भेजे गए. इसके अलावा 4.5 लाख USDT शैलेश भट्ट से सीधे संजय कोटाडिया को मिले. यह पूरा नेटवर्क क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर रकम घुमाने का जरिया बना.
फॉरेंसिक जांच और झूठे बयान
ईडी ने डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच करवाई. इसमें दोनों आरोपियों के बीच क्रिप्टो ट्रांजैक्शन लिंक साफ सामने आए. जांच के दौरान निकुंज भट्ट और संजय कोटाडिया ने अधूरी और भ्रामक जानकारी दी. PMLA की धारा 50(3) के तहत दिए गए बयान भी झूठे और टालमटोल वाले पाए गए. दोनों ने जांच में सहयोग नहीं किया और सबूत नष्ट करने की आशंका भी सामने आई.
गिरफ्तारी, रिमांड और जांच
गंभीर आरोपों, जांच में बाधा और फरार होने की आशंका को देखते हुए ईडी ने दोनों को गिरफ्तार किया. 20 जनवरी 2026 को उन्हें अहमदाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया. अदालत ने ईडी को 4 दिन की कस्टडी दी है. इस मामले में ईडी पहले ही मुख्य आरोपी शैलेश बाबूलाल भट्ट को गिरफ्तार कर चुकी है. अब तक करीब 2170 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच या फ्रीज की जा चुकी है. ईडी के मुताबिक, इस बड़े क्रिप्टो फ्रॉड में आगे और खुलासे हो सकते हैं.