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डॉक्टर कपल से 14.84 करोड़ की ठगी का मामला... दिल्ली पुलिस ने 3 राज्यों से 8 आरोपी गिरफ्तार किए

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुज़ुर्गों को डराकर ठगी करने वाले साइबर सिंडिकेट का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है. एक बुज़ुर्ग NRI कपल से 14.84 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में तीन राज्यों से आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. जांच में इस हाई प्रोफाइल साइबर फ्रॉड के तार कंबोडिया और नेपाल तक जुड़े पाए गए हैं.

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दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले NRI डॉक्टर कपल से हुई थी 14.84 करोड़ रुपए की ठगी. (Photo: X/@CrimeBranchDP)
दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले NRI डॉक्टर कपल से हुई थी 14.84 करोड़ रुपए की ठगी. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके रहने वाले बुज़ुर्ग डॉक्टर कपल से डिजिटल अरेस्ट के जरिए 14.84 करोड़ की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का खुलासा हुआ है. पुलिस ने गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में एक साथ कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस गिरोह के तार कंबोडिया और नेपाल में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं.

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी खुद को CBI, पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे. इसके बाद फर्जी गिरफ्तारी वारंट और नकली अदालती कार्यवाही दिखाकर पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट में रखा जाता था. डर और दबाव के माहौल में उनसे करोड़ों रुपए ट्रांसफर कराए जाते थे. आरोपी अलग-अलग राज्यों में बैठकर अपराध करते थे.

गिरफ्तार आरोपियों में गुजरात के वडोदरा से दिव्यांग पटेल और कृतिक शितोले, ओडिशा के भुवनेश्वर से महावीर शर्मा उर्फ नील, गुजरात से अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन, उत्तर प्रदेश के वाराणसी से अरुण कुमार तिवारी और प्रद्युमन तिवारी उर्फ एस पी तिवारी, जबकि लखनऊ से भूपेंद्र कुमार मिश्रा और आदेश कुमार सिंह शामिल हैं. दिव्यांग पटेल एक NGO चलाता है और फाइनेंशियल सर्विसेज से भी जुड़ा था.

आरोपी अलग-अलग पेशों से जुड़े थे. इनमें आईटी डिप्लोमा होल्डर, एमबीए ग्रेजुएट, ट्यूशन टीचर और घाटों पर पूजा कराने वाला पुजारी भी शामिल है. पुलिस का कहना है कि यही पढ़े-लिखे चेहरे इस साइबर ठगी नेटवर्क को भरोसेमंद बनाने में मदद कर रहे थे. यह मामला तब सामने आया जब दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाली 77 साल की एक बुज़ुर्ग महिला से 14.84 करोड़ की ठगी की गई. 

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दिसंबर 2025 में पीड़ित महिला को एक कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उसके नाम पर जारी सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है. इसके बाद उसे वीडियो कॉल पर लेकर फर्जी अधिकारी बनकर डराया गया. पीड़ित महिला और उसके पति को चौबीसों घंटे वीडियो सर्विलांस में रखने का दावा किया गया और किसी से संपर्क करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई. 

डर के माहौल में उनसे फिक्स्ड डिपॉजिट और शेयर निवेश की रकम को ट्रांसफर कराया गया. कुल आठ ट्रांजैक्शन में 14.84 करोड़ रुपए ठग लिए गए. 10 जनवरी को स्पेशल सेल के IFSO पुलिस स्टेशन में ई-FIR दर्ज की गई. टेक्निकल सर्विलांस और बैंक खातों के विश्लेषण के बाद पुलिस म्यूल अकाउंट होल्डर्स तक पहुंची. आरोपी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के इशारे पर पैसों की लेयरिंग कर रहे थे.

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