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दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, लोगों को ऐसे लगा रहे थे चूना, 20 ठग गिरफ्तार

दिल्ली के लाडो सराय में पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. यहां सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को लोन दिलाने के बहाने ठगा जाता था. पुलिस ने 9 महिलाओं सहित 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. यहां से 32 फोन, 48 सिम कार्ड और 4 लैपटॉप जब्त किए गए हैं.

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साइबर फ्रॉड्स लगा सकते हैं आपको चूना (AI जनरेटेड फोटो)
साइबर फ्रॉड्स लगा सकते हैं आपको चूना (AI जनरेटेड फोटो)

दिल्ली के लाडो सराय में पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. यहां सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को लोन दिलाने के बहाने ठगा जाता था. पुलिस ने 9 महिलाओं सहित 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. यहां से 32 फोन, 48 सिम कार्ड और 4 लैपटॉप जब्त किए गए हैं.

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अंकित चौहान ने बताया कि अनुमान है कि 400 से अधिक पीड़ित इस फर्जी कॉल सेंटर के शिकार हुए हैं. इन लोगों से करीब 40 लाख रुपए की ठगी हुई है. देश भर में करीब 50 से अधिक पीड़ितों की पहचान कर ली गई है, बाकी लोगों की पहचान की जा रही है.

डीसीपी ने कहा कि आरोपी कॉल सेंटर से पहले लोगों को कॉल करते, फिर उनको सरकारी योजनाओं के बारे में बताते थे. इसके बाद उनक योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाते थे. जो लोग उनके झांसे में जाते, उनसे बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते थे. 

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बताते चलें कि मई में दिल्ली के पश्चिम विहार में भी ऐसे ही एक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया था. इस सेंटर में बैठे ठग विदेश में बैठे लोगों के साथ धोखाधड़ी करते थे. दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने यहां से एक महिला समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. 

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पुलिस ने बताया था कि आरोपी अमेरिका में बैठे लोगों के साथ ऐप्स बीएसओडी, गूगल वॉयस, ब्राउजर लॉगइन, माइक्रो एसआईपी के जरिए नेट कॉलिंग करते थे. इसके बाद उनके सिस्टम को ब्लॉक कर देते थे और फिर मदद के लिए कॉल करते थे. इसके बाद ठगी का असली खेल शुरू हो जाता था. 

आरोपी ठगी के लिए लोगों के सिस्टम को एनीडेस्क पर लेते थे और पीड़ित को साइबर हैकिंग को रोकने के लिए अपने खाते की सुरक्षा की धमकी देते थे. इतना ही नहीं पीड़ितों को नकदी के वाउचर कूपन का लालच भी देते थे. इस तरह अपनी जाल में लोगों को फंसाकर उनके खाते से पैसे उड़ा लेते थे.

दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध इकाई के पुलिस उपायुक्त हेमंत तिवारी ने बताया कि ज्यादार साइबर अपराधी कम पढ़े लिखे होते हैं. उनको तकनीक की जानकारी भी कम होती है, लेकिन वे एक शातिर कहानीकार होते हैं, जो अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से भोले-भाले पीड़ितों को ऑनलाइन ठगते हैं. 

साइबर अपराधी हर दिन ठगी और धोखाधंड़ी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं. ठगों के बारे में जानकारी हासिल करने पर पता चला है कि आरोपियों के पास कोई अच्छी शैक्षणिक पृष्ठभूमि नहीं है. उनमें से कोई भी इंजीनियरिंग स्नातक नहीं है. अधिकांश ठग 10वीं या 12वीं तक ही पढ़े होते हैं.

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