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अंध-विश्‍वास ने ली युवक की जान

वो गांव का ओझा था, एक रात उसने एक सपना देखा. उसने अपने सपने की बात गांववालों को बताई और गांववालों ने उसकी बात पर यकीन कर लिया लेकिन उस ओझा के अंधे-विश्वास की खातिर जब गांववालों ने रात में पूजा की तो उन्होंने ओझा के ही कहने पर एक नौजवान की बलि दे दी.

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अंध-विश्‍वास
अंध-विश्‍वास

वो गांव का ओझा था, एक रात उसने एक सपना देखा. उसने अपने सपने की बात गांववालों को बताई और गांववालों ने उसकी बात पर यकीन कर लिया लेकिन उस ओझा के अंधे-विश्वास की खातिर जब गांववालों ने रात में पूजा की तो उन्होंने ओझा के ही कहने पर एक नौजवान की बलि दे दी.

चारों ओर घने जंगलों से घिरा इलाका इलाके के एक बस्ती के सुनसान कोने में मौजूद एक उजाड़ सा मकान. काली-स्याह अंधेरी रात और आंगन के बीचों-बीच एक पेड़ के नीचे बैठे दो मायावी लोग.

मिट्टी हांडी में धधकती लौ और चारों ओर करीने से रखे कर्म-कांड के ढेरों सामान. उल्टे पत्तों पर रखे धूप-गुगल और टिमटिमाते दीयों की मद्धिम सी रौशनी लेकिन जो चीज सबसे ज्यादा चौंकाती है वो है तमाम सामान के बीच रखी एक इंसानी खोपड़ी और एक बेजुबान गुड़िया.

थोड़ी तैयारी के बाद अचानक ही ये दोनों हरकत में आ जाते हैं. पहले तो उनके जिस्म में अजीब सी हलचल होती है और फिर वे ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर झूमने लगते हैं. कभी वो अपना सिर चारों ओर घुमाते हैं और कभी हवा में हाथ उठा कर अपने ईष्ट देव को न्यौता देने लगते हैं.

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दरअसल, इस वक्त यहां एक ख़ास किस्म की पूजा की तैयारी चल रही है और इस वक्‍त पूजा से पहले दोनों अपने अराध्य-देव को खुश करने की अजीबोग़रीब कोशिश में जुटे हैं. रह-रह कर मिट्टी की हांडी में आग भड़क उठती है और अजीबोग़रीब मंत्रोच्चार के बीच पूजा-पाठ का कर्मकांड लगातार आगे बढ़ने लगता है.

वैसे तो दूसरी तमाम पूजाओं की तरह यहां भी भक्त अपने भगवान को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये पूजा आपके और हमारे घरों में होने वाली पूजाओं से बिल्कुल अलग है. दरअसल ये पूजा महज दुआओं के लिए नहीं, बल्कि एक खास मकसद के लिए की जा रही है.

बेहद अजीबोगरीब पूजा-पाठ का ये दौर पूरे ज़ोरों पर है. मंत्रोच्चार के बीच मुख्य ओझा और उसका चेला लगातार पेड़ के नीचे बैठे झूम रहे हैं और तभी वो एक आदमी की तरफ इशारा कर लोगों से कुछ बोलता है और सभी उस आदमी पर टूट पड़ते हैं और उसे तब तक मारते रहते हैं जब तक की वो बेदम हो कर ज़मीन पर गिर नहीं जाता, लेकिन गांववाले उसे मारने के बाद यहीं पर ही नहीं रुकते वो हाथ में तलवार और त्रिशूल लिए उसकी लाश के चारों तरफ नाचने लगते हैं.

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अब गांववालों का मकसद पूरा हो चुका था. वो उस शख्स को मारने के बाद रात के अंधेरे में ही गांव के पास के जंगल में उसकी लाश को दफन कर देते हैं और फिर गांव में एक बार फिर सन्नाटा छा जाता है.

पूरे गांव ने ओझा के कहने पर जवाहरलाल की बलि दे दी थी और उसकी लाश को रात के अंधेरे में चुपचाप पास के जंगल में दफना दिया लेकिन जब अगले दिन पुलिस टीम ने जवाहर की लाश को उस क़ब्र से बाहर निकाला तो उसके साथ एक ऐसा राज़ बाहर आया जिसे सुनकर हर कोई सन्‍न रह गया.

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