वक्त बदला, तकनीकी बदली, तरीका बदला तो कागज का रुपया भी प्लास्टिक मनी में बदल गया. प्लास्टिक मनी बोलें तो वो छोटा सा कार्ड जो आपके पास है तो फिर जेब में पैसे रखने की जरूरत नहीं है. बस चलते-चलते किसी भी एटीएम पर जाइए और जरूरत के हिसाब से पैसे निकाल लीजिए.
इस देश में ऐसे करीब एक लाख 80 हजार एटीएम हैं और उन एटीएम में रोजाना 25 हजार करोड़ रुपए डाले और निकाले जाते हैं. पर एटीएम तक ये हजारों करोड़ रुपए कैसे पहुंचते हैं? इनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम होते हैं? पिछले हफ्ते दिल्ली में साढ़े 22 करोड़ रुपए की लूट के बाद ये सवाल अचानक बड़ा हो गया है.
लूट की चंद कहानियां...
02 अगस्त 2013 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर इलाके में हमेशा की तरह एक कैश-वैन एटीएम में रुपए डालने पहुंची थी लेकिन इससे पहले कि रुपए डाल कर वैन आगे बढ़ती अचानक ही तीन हथियारबंद बदमाशों ने वैन को घेर लिया और गन प्वाइंट पर 37 लाख 50 हजार रुपए लूट लिए दिन दहाड़े हुई इस वारदात ने सबको चौंका दिया. अब इस वारदात को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन लुटेरों का कोई सुराग नहीं है.
29 नवंबर 2014 को भीड़ भरे कमला नगर बाजार में जिंदगी अपनी रफ्तार पर थी. तभी अचानक चली गोलियों की आवाज से लोग चौंक गए. लेकिन इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, बाजार के बीचों-बीच लगे एक एटीएम में कैश भरने के दौरान सिक्योरिटी गार्ड का कत्ल कर बदमाश डेढ़ करोड़ रुपए लेकर रफूचक्कर हो गए. ना तो कोई बदमाशों का चेहरा देख सका और ना ही गाड़ी का नंबर पहचान सका. अलबत्ता पास ही लगे सीसीटीवी कैमरे में बदमाशों की तस्वीरें जरूर कैद हो गईं. लेकिन ये मामला भी अब तक अनसुलझा है.
26 नवंबर 2015 को गोविंदपुरी इलाके में एसआईएस सिक्योरिटी एजेंसी की एक कैश वैन साढ़े 22 करोड़ रुपए लेकर पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी से ओखला के लिए चली थी, लेकिन श्रीनिवासपुरी से गोविंदपुरी के बीच ही ड्राइवर सारी की सारी रकम लेकर गायब हो गया. ये दिल्ली में इस तरह की लूट की सबसे ताजी और सबसे बड़ी वारदात थी. चूंकि मामला बड़ा था, पुलिस ने सारी ताकत झोंक दी और अगले दिन सूरज निकलने से पहले ही वैन का ड्राइवर पूरे कैश के साथ पकड़ लिया गया.
बैंक में होने वाली वारदातों में भी कमी आई
ये चंद कहानियां तो सिर्फ दिल्ली की हैं. देश भर में ऐसी वारदातों की फेहरिस्त कहीं बहुत लंबी है. लेकिन इन्हीं वारदातों के बहाने दिल्ली समेत देश के तमाम हिस्सों में एटीएमों की सुरक्षा और उनमें रुपए डालने के तौर-तरीकों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर एटीएम में रुपए डालने के कायदे-कानून क्या हैं और क्या इस काम में लगी सिक्योरिटी एजेंसियां और पुलिस उसके हिसाब से चलती है या फिर नहीं? क्योंकि ये मामला सिर्फ़ रुपयों की लूट या अमानत में ख्यानत का नहीं है, बल्कि ऐसी ही लूट की वारदातों में अब तक देश में सैकड़ों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं. हम सभी हर हफ्ते कम से कम एक बार किसी ना किसी एटीएम का रुख जरूर करते हैं. जाहिर है, एटीएम ने कतार में खड़े हो कर बैंक से रुपए निकालने के झमेले से भी सबको आजाद कर दिया है, साथ ही ऐसे ट्रांजिक्शन के दौरान में बैंक में होने वाली गुनाह की वारदातों में भी कमी आई है.
हर रोज कितनी रकम भरी जाती है?
क्या आप जानते हैं कि अकेले दिल्ली में ही 10 हजार एटीएम लगे हैं, जिनमें रोजाना करोड़ों रुपए डाले और निकाले जाते हैं. जबकि देश भर में एटीएम का आंकड़ा कुल 1 लाख 80 हजार हो जाता है. अब जब इतने एटीएम से रोजाना करोड़ों रुपए का ट्रांजिक्शन होता है, तो उनकी हिफ़ाजत को लेकर भी सवाल लाजिमी है. लेकिन इस सवाल का जवाब बेहद चौंकानेवाला है.
आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा यूं लुटता है
जब बात हजार, दस हजार, लाख, दस लाख, करोड़, दस करोड़ से आगे निकल अरबों रुपयों की हो, तो ऐसा इंतजाम तो बनता ही है. ये तस्वीरें हैं दिल्ली के ऐसे ही प्राइवेट चेस्ट की, जहां से हर रोज अरबों रुपए का ट्रांजिक्शन होता है. जी हां, अरबों रुपयों का और ये रुपए ना तो किसी टकसाल के हैं और ना ही किसी अमीर सुल्तान के बल्कि ये आपकी और हमारी गाढ़ी कमाई का वो हिस्सा है, जो इसी चेस्ट से गुजर हम सबकी जेब तक पहुंचता है.
दरअसल, दिल्ली में कैश वैन से हुए साढ़े 22 करोड़ रुपए की लूट की वारदात ने अगर दिल्ली पुलिस के हाथ-पांव फुला दिए, तो बैंक से एटीएम तक रुपए पहुंचाने के पूरे तौर-तरीके पर भी सवाल खड़े कर दिए और रुपयों की हिफ़ाजत के साथ-साथ लोगों की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए हम जा पहुंचे उसी कंपनी में, जिसके कैश वैन से अमानत में खयानत की ये वारदात हुई थी और जिसके हजारों कैश वैन के पास हर रोज पूरी दिल्ली में करोड़ों रुपए इधर से उधर करने की बड़ी जिम्मेदारी है. अब आइए, इस मामले को समझने के लिए मोटे तौर पर रुपयों के ट्रांजिक्शन में ऐसी सिक्योरिटी एजेंसीज का रोल समझ लेते हैं.
सिक्योरिटी कंपनियों को आउटसोर्स करते हैं बैंक
बैंक में जो रुपए जमा होते हैं, तमाम हिसाब-किताब के बाद बैंक उन्हीं रुपयों को एटीएमों में भरने के लिए भेजता है. लेकिन ये काम बैंक खुद नहीं करता. बल्कि सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसे ही सिक्योरिटी कंपनियों को आउटसोर्स करता है. और ये कंपनियां रुपए बैंक से कलेक्ट करने से लेकर उन्हें अपनी हिफ़ाजत में रखने और उन्हें अलग-अलग एटीएमों में भरने का पूरा काम करती हैं. गुरुवार को भी एसआईएस कंपनी की जिस कैश वैन को लेकर ड्राइवर भाग निकला था, वो कैश वैन कुछ ऐसे ही एक्सिस बैंक के चेस्ट से रुपए लेकर उसे ओखला वाले दफ्तर में ले कर जा रही थी, जिन्हें आगे अलग-अलग एटीएम सेंटर तक पहुंचाया जाना था. लेकिन इसी बीच रास्ते में ही खेल हो गया. ये और बात है कि तमाम रुपए इंश्योर्ड थे. बैंकों से रुपए इकट्ठा करने और उन्हें अलग-अलग एटीएम सेंटरों तक पहुंचाने का ये पूरा सिस्टम अपने आप में बहुत बड़ा और अहम है.
दिल्ली में ही दस हजार एटीएम
दिल्ली समेत पूरे देश में लगे एटीएमों की तादाद और उसमें भरे जाने वाले रुपयों के हिसाब से इसका पता लगता है. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, अकेले देश की राजधानी दिल्ली में ही दस हजार एटीएम हैं. जबकि पूरे देश में अलग-अलग बैंकों के लगभग एक लाख अस्सी हजार एटीएम लगे हैं. देश भर में बैंक ऐसे ही सिक्योरिटी एजेंसीज की मदद से हर रोज करीब 25000 करोड़ रुपए एटीएम में डालते हैं. देश भर में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियां ये काम 8 हजार जीपीएस मॉनिटर्ड कैश-वैन की मदद से करती हैं. लेकिन इस पूरे सिस्टम का सबसे चौंकाने वाला पहलू ये है कि इतने संवेदनशील काम के लिए सरकार की ओर से आजतक कोई भी नियम कानून नहीं बनाया गया है. यानी सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है.
हर साल मार डाले जाते हैं सैकड़ों लोग
देश की राजधानी दिल्ली समेत अगर अलग-अलग शहरों में हर साल सैकड़ों लोग ऐसे ही रुपए लूटने के चक्कर में मार डाले जाते हैं लेकिन इतना होने के बावजूद सबकुछ भगवान भरोसे ही चल रहा है. दिल्ली में गुरुवार को हुई साढ़े 22 करोड़ रुपए की लूट की वारदात के बाद इस मामले की पड़ताल के दौरान कुछ ऐसी ही चौंकाने वाली बातें सामने आई. ये साफ़ हुआ कि पुलिस वक्त वक्त पर सिक्योरिटी एजेंसीज को कुछ कायदे कानूनों से चलने की ताकीद जरूर करती है, लेकिन इसके लिए कागजों पर साफ़-साफ़ कोई भी दिशा निर्देश नहीं है. ऐसे में कुछ नियम कानून ऐसे हैं, जिन्हें खुद बैंकों ने अपने रुपयों की हिफ़ाजत के लिए बना रखे हैं, जबकि कुछ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने यानी सबसे गंभीर विषय पर ही मिलीजुली सरकार चल रही है.
जानलेवा होती जा रही है नियमों की अनदेखी
सबसे गंभीर विषय ही अछूता है इन अघोषित नियमों के मुताबिक आम तौर पर बैकों ने ही एक कैश वैन में 1 करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए नहीं ले जाने का नियम बना रखा है. जबकि पुलिस ने तमाम बैंक और एजेंसीज को बैंक और चेस्ट के अलावा गाड़ियों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस लगाने की हिदायत दे रखी है. पुलिस ने एक करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ले जाने पर साथ में दो गनमैन ले जाने की बात भी कह रखी है. जबकि हैवी ट्रांजिक्शन के दौरान लोकल पुलिस को इत्तिला देने की बात भी कही गई है. लेकिन चूंकि इन नियम कानूनों में कागजों पर साफ़-साफ़ कुछ भी नहीं है और उल्लंघन पर सजा का मामला भी साफ़ नहीं है. अक्सर नियमों की अनदेखी की जाती है और यही अनदेखी कई बार जानलेवा भी साबित होती है.