एक टीवी जर्नलिस्ट जब शूट पर होता है तो कैमरामैन अमूमन रिपोर्टर का कटअवेज यानी विजुअल जरूर बनाता है. अक्षय टीवी जर्नलिस्ट होते हुए भी खुद कभी टीवी पर इसलिए नहीं आते थे क्योंकि वह स्टिंग ऑपरेशन करते थे. इसलिए खुद की पहचान छुपानी जरूरी थी.
की जांच करते हुए जब अक्षय इंदौर से झबुआ जा रहे थे तो रास्ते में कैमरामैन किशन कुमार से खुद का एक शॉट लेने के लिए कहा. कैमरे से दूर रहने वाले अक्षय ने इंदौर से पहले ग्वालियर मेड़िकल कॉलेज के होस्टल में हैरतअंगेज तौर पर एक पीटीसी (कैमरे के सामने बोलना) भी किया. यह शायद की जिंदगी का पहला और आखिरी पीटीसी था.
की डायरी में किसी भी रिपोर्टर की तरह सोर्सेज के नंबर, नाम, जगह, पता और छोटी-छोटी इनफॉर्मेशन हैं. इस डायरी में से जुड़े तमाम सोर्सेज, आरोपी, व्हिसल ब्लोअर, पीड़ित परिवार के नाम नंबर लिखे हैं. अक्षय की डायरी में उनके हाथों से लिखे आखिरी दो शब्द शाराहस और अनुपम हैं. इसके थोड़ी ही देर बाद उसी कुर्सी पर बैठे-बैठे अचानक अक्षय की तबीयत बिगड़ी और फिर कुछ ही देर में मौत हो गई.
व्यापम घोटाले की तफ्तीश के लिए अक्षय पूरी तैयारी करके मध्य प्रदेश गए थे. किस-किस सोर्स से मिलना है. किस पीड़ित के घर जाना है. किस गवाह से मिलना है और किस सरकारी अफसर को घेरना है. इसी प्लान के तहत ने अपना मिशन ग्वालियर से शुरू किया. ग्वालियर के एडिशनल एसपी से उनका पहला सवाल यही था कि आखिर व्यापम घोटाले में लोगों की मौत क्यों हो रही हैं?
अक्षय अपनी इंवेस्टिगेशन और अपने सोर्सेज के साथ-साथ पुलिस, सरकारी अफसर और वकीलों से भी तमाम जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे. इसी कड़ी में वह ग्वायिलयर में सांख्यिकी अधिकारी डीसी मालवीय से भी मिले थे. मुलाकात और बातचीत के बाद उनकी बातों को कैमरे पर रिकॉर्ड भी किया. की जड़ में पीएमटी भी है इसलिए ग्वालियर में अक्षय जीआर मेडिकल कॉलेज भी गए थे. जिससे वहां से भी कुछ सुराग निकाल सकें. ग्वालियर और उसके आस-पास के कुछ इलाकों में तफ्तीश पूरी करने के बाद अक्षय सरिका नगर डॉक्टर राजेंद्र आर्य के परिवार वालों से मिलने गए थे. व्यापम घोटाले से जुड़ी एक रहस्यमयी मौत इस घर में भी हुई थी.