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एक ईमेल, 6 लाख रुपये की ठगी और ब्लैक डॉलर का तिलिस्म

कोई आपसे ये कहे कि वो कागज़ के टुकड़ों को डॉलर में बदल सकता है, तो आपका जवाब क्या होगा? ब्लैक डॉलर के धंधेबाज़ों के पास वो जादुई तकरीब मौजूद है, जो देखते ही देखते आंखों के सामने कागज के टुकड़ों को चमचमाते अमेरिकी डॉलर में तब्दील कर देती है.

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कोई आपसे ये कहे कि वो कागज़ के टुकड़ों को डॉलर में बदल सकता है, तो आपका जवाब क्या होगा? ब्लैक डॉलर के धंधेबाज़ों के पास वो जादुई तकरीब मौजूद है, जो देखते ही देखते आंखों के सामने कागज के टुकड़ों को चमचमाते अमेरिकी डॉलर में तब्दील कर देती है. लेकिन इस तरकीब पर जो भी यकीन करता है, उसकी क़िस्मत नहीं खुलती, बल्कि वो कंगाल हो जाता है. आखिर क्यों?

क्या कोई बगैर किसी जान-पहचान या मतलब के बैठे-बिठाए किसी को करोड़ों रुपए का वारिस बना सकता है? आप कहेंगे कि ऐसा किस्से कहानियों में ही मुमकिन है. हक़ीक़त में नहीं. लेकिन एक शख्स को विदेश से आए एक ई-मेल में करीब 21 करोड़ रुपए दिए जाने की बात क्या कही गई, उसने इस पर तुरंत यकीन कर लिया. लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ, अब इस शख्स के लिए उस पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है.

नाम: वेंकटरमण
पहचान: आंध्र प्रदेश का एक ग़रीब किसान
अंजाम: धोखे में आकर 6 लाख गंवाए

आंध्र प्रदेश के इस ग़रीब किसान वेंकटरमन ने ऐसे ही एक पेशकश पर यकीन करके क़रीब छह लाख रुपए गंवा दिए. लेकिन इसके बाद भी जब करोड़ों रुपए मिलने का उसका ख्वाब पूरा नहीं हुआ, तो उसने दिल्ली आकर सीधे पुलिस से शिकायत की. नतीजा ये हुआ कि जिस शख्स ने उसे करोड़ों रुपए देने का झांसा दे कर उससे 6 लाख रुपए झटक लिए थे, वो आख़िरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया. लेकिन अगर वेंकटरमण को रिएक्ट करने में और ज़रा भी देर हुई होती, तो लाखों रुपए लूट कर ये विदेशी नागरिक जल्द ही नौ दो ग्यारह हो चुका होता. अब आइए आपको ब्लैक डॉलर के नाम पर वेंकटरमण के साथ हुई ठगी की ये पूरी कहानी समझाने के लिए तकरीबन महीने भर पीछे लिए चलते हैं.

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ईमेल से फंसा इस पचड़े में
वेंकट एक रोज़ अपने ई-मेल्स चेक कर रहा था. इसी दौरान उसकी निगाह एक ऐसे ई-मेल पर पड़ी, जिसे देख कर उसके होश ही उड़ गए. उसे ये मेल अमेरिका की रहनेवाली किसी महिला ने लिखा था. महिला का कहना था कि उसके पति की मौत हो चुकी है और वो खुद भी कैंसर के लास्ट स्टेज से गुज़र रही है. लेकिन मरने से पहले वो अपने पास जमा कुल 8.5 मिलियन डॉलर की रकम से हिंदुस्तान में ग़रीब बच्चों के लिए स्कूल और अस्पताल खोलना चाहती है. अगर वो हिंदुस्तान में इस काम का बीड़ा उठा ले, तो वो अपनी इस जमा पूंजी का 40 फ़ीसदी हिस्सा उसके हवाले कर देगी.

ये मेल पढ़ते ही वेंकट ख्वाबों की दुनिया में खो गया. क्योंकि 8.5 मिलियन डॉलर मतलब है तकरीबन 52 करोड़ 70 लाख रुपए और इसके 40 फ़ीसदी मतलब 21 करोड़ 8 लाख रुपए. वेंकट को लगा कि उसकी तो दुनिया ही बदल जाएगी. ब्लैक डॉलर के तिलिस्म में उलझ कर ये शख्स अब बर्बाद होने के कगार पर था. वो 21 करोड़ के लालच में 6 लाख रुपए जमा कर चुका था. लेकिन इससे पहले कि ब्लैक डॉलर कि तिजोरी खुलती, उसे होश आ गया.

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करोड़ों डॉलर पाने के हसीन ख्वाब देख-देख कर अब वेंकट का दिमाग़ ख़राब हो चुका था. उसे यकीन नहीं हो रहा था कि किस्मत यूं टूट कर उस पर मेहरबान हुई है.

फीस के तौर पर भेजे 6 लाख
लिहाज़ा, आगे के ई-मेल में जैसे ही उस महिला ने उसे डॉलर ट्रांसफर करने के लिए प्रोसेसिंग फीस और लीगल फीस के तौर पर रुपयों की मांग की, तो उसे कुछ भी अटपटा नहीं लगा. और इस तरह उसने उस महिला के दिल्ली के अकाउंट में अलग-अलग फीस के नाम पर तकरीबन 6 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए. लेकिन इसके बाद भी जब महिला ने उससे रुपये मांगने का सिलसिला जारी रखा, तो उसे कुछ शक हुआ और वो सीधे दिल्ली पहुंचा.

लेकिन यहां एक होटल में उसे अफ्रीकी मूल का एक ऐसा शख्स मिला, जिसने खुद को उस महिला का एजेंट बताया. वो वेंकट को आगे भी झांसे में रखने के लिए ब्लैक डॉलर की एक भरी तिजोरी लेकर पहुंचा था. लेकिन इससे पहले कि तिजोरी का पूरा तिलिस्म खुलता, काले कागज डॉलर में बदलते, वेंकट का शक गहरा गया और वो सीधे पुलिस के पास जा पहुंचा. अब पुलिस ने होटल में छापेमारी की और उस विदेशी को तकरीबन 5 करोड़ के नकली यानी ब्लैक डॉलर के गिरफ्तार लिया. और इसी के साथ ठगी की पूरी कहानी सामने आ गई. ये वो विदेशी ही था, जो झूठे ई-मेल भेज कर दिल्ली में बैठे-बैठे वेंकट को लूट रहा था. और अब फरार होने के फिराक में था.

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--आनंद कुमार और पुनीत शर्मा के साथ मुनीष देवगन

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