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मर्डर मिस्ट्रीः एक पुलिस वाले का कत्ल, किले का रहस्य और खूबसूरत कातिल की खौफनाक साजिश

वो पुलिसवाला अपने काम से घर के बाहर गया था. लेकिन फिर कभी लौट कर वापस नहीं आया. उसे ढूंढ़ने में खुद उसके घरवालों से लेकर महकमे के लोगों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी. शुरुआती कोशिश में उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली. इस तरह करीब चार महीने गुज़र गए और फिर एक रोज़ अचानक गायब पुलिसकर्मी का सुराग मिला.

पुलिस के लिए इस कत्ल की गुत्थी को सुलझाना किसी चुनौती से कम नहीं था पुलिस के लिए इस कत्ल की गुत्थी को सुलझाना किसी चुनौती से कम नहीं था

  • देश की सबसे रहस्यमयी मर्डर मिस्ट्री
  • पहले पुलिस कांस्टेबल जीजा का घर उजाड़ा
  • फिर दोस्त के साथ मिलकर की जीजा की हत्या
  • अपनी खुशियों के लिए शातिर साली बनी क़ातिल

ये खौफनाक वाक्या है राजस्थान के बूंदी शहर का. बूंदी के उस पुलिसवाले की ज़िंदगी में वैसे तो सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक रोज़ वो अपने काम से घर के बाहर क्या निकला, कि फिर कभी लौट कर ही नहीं आया. उसे ढूंढ़ने में खुद उसके घरवालों से लेकर महकमे के लोगों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी क्योंकि ये मामला खुद उन्हीं महकमे का था. शुरुआती कोशिश में उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली. इस तरह करीब चार महीने गुज़र गए और फिर एक रोज़ अचानक गायब पुलिसकर्मी का सुराग मिला. सुराग, एक सुनसान क़िले में दफ़्न कंकाल की सूरत में.

फिर लौटकर नहीं आया पुलिस कांस्टेबल अभिषेक शर्मा

पुलिस कांस्टेबल अभिषेक शर्मा अपने घर से निकाल तो उसने घरवालों को बताया कि वो ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए बूंदी पुलिस लाइन जा रहा है और ड्यूटी की वजह से रात को घर नहीं लौट पाएगा. रात गुज़र गई और अगला दिन आया. सुबह निकल गई. दोपहर भी बीत गई. फिर से रात आ गई. मगर अभिषेक वापस नहीं आया. वक्त गुज़रता जा रहा था और घरवालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. इसी आलम में घरवालों ने अभिषेक को उसके मोबाइल पर फोन करना शुरू किया. मगर फोन लगातार बंद आ रहा था. चूंकि अभिषेक पुलिस लाइन की ड्यूटी पर थे लिहाज़ा फोन का यूं अचानक बंद हो जाना और फिर दोबारा शुरू ना होना घरवालों को फिक्र में डालने लगा. इसके बाद अभिषेक की तलाश के लिए घरवालों ने उसके दोस्तों, दफ्तर के लोगों और रिश्तेदारों से बात करना शुरू किया.

रात में ड्यूटी पर पहुंचा ही नहीं था अभिषेक

अभी ये तमाम चीज़ें चल ही रहीं थी कि तभी पुलिस लाइन से अभिषेक के एक साथी का फोन आया. उसने बताया कि वो तो उस रात ड्यूटी पर पुलिस लाइन आया ही नहीं. ये सुनकर घरवालों के होश उड़ गए क्योंकि अभिषेक खासतौर पर घरवालों को बता के बाइक से निकला था कि वो ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए पुलिस लाइन जा रहा है. ज़ाहिर है घरवालों ने उसे ढूंढने के लिए अपने तमाम रिश्तेदारों और जानने वालों को लगा दिया. और ये सिलसिला करीब हफ्तेभर तक चलता रहा.

घरवालों ने दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट

आखिरकार थक हार कर घरवालों ने बूंदी के कोतवाली थाने में अभिषेक की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी. चूंकि अभिषेक खुद डिपार्टमेंट से था लिहाज़ा घरवालों के साथ साथ पुलिस डिपार्टमेंट के उसके साथी भी लगातार हर तरह से उसे खोजने की कोशिश कर रहे थे. बूंदी पुलिस के लिए अभिषेक की गुमशुदगी किसी चुनौती से कम नहीं थी. क्योंकि अब तक एक हफ्ते से ज़्यादा बीत चुका था और उसकी कोई खबर नहीं लग रही थी. जांच शुरू हुई तो पता चला कि उस रात भले अभिषेक पुलिस लाइन नहीं पहुंचा मगर 12 साढे 12 तक उसका फोन एक्टिव था. लेकिन उसके बाद रहस्यमयी तरीके से उसका फोन स्विच्ड ऑफ हो गया. फिर वो फोन दोबारा ऑन नहीं हुआ.

विजयगढ़ किले की थी लास्ट लोकेशन

अब पुलिस के पास एक ही विकल्प था कि वो अभिषेक की फोन की लास्ट लोकेशन पता कर सके. ताकि ये मालूम हो कि अगर वो ड्यूटी पर नहीं आया तो गया तो गया कहां. और जब पुलिस ने उसका कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकाला तो इस मामले में उसे नई दिशा मिली. पुलिस को पता चला कि अभिषेक अपनी बाइक से बूंदी पुलिस लाइन आने के बजाए घर से 136 किलोमीटर दूर सीधे सवाई माधोपुर के बाउली कस्बे में गया था. और उसकी लॉस्ट लोकेशन भी उसी कस्बे में थी. वो भी किसी भीड़-भाड़ या रिहायशी इलाके में नहीं बल्कि विजयगढ़ किले में थी. इस आखिरी लोकेशन का वक्त भी रात 12 साढे 12 बजे का ही थी. जब उसका मोबाइल स्विच्ड ऑफ हुआ.

क्या पत्नी से मिलने गया था अभिषेक ?

यानी अभिषेक आखिरी बार इसी विजयगढ़ के किले में था. मोबाइल की लॉस्ट लोकेशन सामने आने के बाद पुलिस ने फिर से घरवालों से बात कर ये जानने की कोशिश की, कि आखिर उसका विजयगढ़ के किले या सवाई माधोपुर से रिश्ता क्या है. क्या वहां कोई अभिषेक का दोस्त या रिश्तेदार रहता है? इस जांच में पुलिस के सामने एक सच ये सामने आया कि दरअसल अभिषेक की शादी इसी सवाई माधोपुर के जरवाड़ा गांव की रहने वाली दिव्या से हुई थी. पुलिस ये जानना चाह रही थी कि कहीं अभिषेक उस रात अपने ससुराल वालों से मिलने तो नहीं गया था. क्योंकि घरवालों के मुताबिक अभिषेक और दिव्या के रिश्ते इन दिनों ठीक नहीं चल रहे थे. लिहाज़ा पुलिस ने उसकी गुमशुदगी को आपसी कलह के एंगल से खगालने की कोशिश शुरू की.

पत्नी ने अदालत में लगाई थी तलाक की अर्जी

मियां-बीवी की ये आपसी कलह तलाक की नौबत तक पहुंच चुकी थी. और इसकी अर्ज़ी कोर्ट में भी दी जा चुकी है. पुलिस के सामने अब सवाल ये था कि आखिर दोनों का रिश्ता तलाक तक पहुंचा क्यों. और तब इस मामले में एक नया मोड़ आया. पूछताछ में ये बात सामने आई कि अभिषेक के दिव्या की ममेरी बहन यानी साली श्यामा से नज़दीकी रिश्ते थे. और दोनों के बीच जब से ये रिश्ता कायम हुआ तब से ही ज़ाहिर है उसकी बीवी दिव्या इसे पचा नहीं पा रही थी. दोनों में इस बात को लेकर अक्सर झगड़े होते थे. दोनों घरवालों के समझाने के बाद भी बात किसी नतीजे तक नहीं पहुंच रही थी. लिहाज़ा दिव्या अपने मायके लौट आई थी और कोर्ट में तलाक की अर्ज़ी लगा दी.

किले के करीब था अभिषेक की साली का घर

अब जांच अभिषेक की साली पर आकर टिक गई. और जब पुलिस ने साली का कच्चा-चिट्ठा निकालना शुरू किया तो पता चला कि अभिषेक की साली श्यामा उसी बऊली की ही रहने वाली है. और उसका घर इसी विजयगढ़ के किले के नज़दीक है. लिहाज़ा पुलिस के शक की सुई अब जीजा साली के रिश्ते पर आकर अटक गई.

पुलिस को साली पर हो गया था शक

अभिषेक को गायब हुए 4 महीने बीत चुके थे. पुलिस के हाथ अभी भी खाली थे. मगर वो बढ़ सही दिशा में रहे थे. साली का नाम और तस्वीर सामने आते ही पुलिस को शुरुआती शक़ हो गया था. मगर अपने इस को शक़ को यकीन में बदलने के लिए पुलिस श्यामा की कॉल डिटेल सामने आने तक का इंतज़ार किया और जब श्यामा के मोबाइल की डिटेल सामने आई तो उससे साफ हो गया कि अभिषेक के मर्डर से कहीं ना कहीं उसका कनेक्शन ज़रूर है. मगर पुलिस इस बात से हैरान थी उसकी कॉल डिटेल में वो नंबर किसका था. जिससे वो अभिषेक से ज़्यादा बात कर रही थी.

पुलिस के रडार पर थी साली और पत्नी

अभिषेक मोबाइल जहां बंद हुआ वो भी सवाई माधोपुर था. अभिषेक के ससुराल वालों का घर भी उसी सवाई माधोपुर में था और जिस साली से उसके नाजायज़ संबंधों का खुलासा हुआ वो भी इसी सवाई माधोपुर में रहती थी. यानी अब जांच का केंद्र कुल मिलाकर बूंदी से निकलकर सवाई माधोपुर पर टिका हुआ था. और अब शक की सीधी सुई अभिषेक की पत्नी और उसकी साली पर टिकी हुई थी. लिहाज़ा अब इस एंगल से पुलिस ने जांच शुरू की और अभिषेक की पत्नी औऱ साली के मोबाइल कॉल डिटेल निकालना शुरू किया. ताकि ये पता चल सके कि उस रात अभिषेक की लास्ट लोकेशन के सबसे नज़दीक कौन था साली या बीवी.

एक थी जीजा-साली के मोबाइल की लास्ट लोकेशन

जब इन दोनों की कॉल डिटेल सामने आई तो पता चला कि अभिषेक शर्मा की उसकी पत्नी से तो नहीं मगर उसकी साली से अक्सर और देर तक बात होती थी. और श्यामा की इसी कॉल डिटेल पुलिस को एक और नंबर मिला जिस पर वो अभिषेक से ज़्यादा बात करती थी. ये नंबर था सवाई माधोपुर का रहने वाला नवेद रंगरेज़ का. यानी एक ही वक्त में श्यामा के दो लोगों से रिश्ते चल रहे थे. अब ये गुत्थी सुलझती जा रही थी. लिहाज़ा पुलिस ने अब ये जानने की कोशिश शुरू की, कि आखिरी बार जब अभिषेक की लोकेशन विजयगढ़ के किले में थी तब श्यामा की लोकेशन क्या थी. तो जांच में पता चला कि विजयगढ़ के किले में जो लॉस्ट लोकेशन अभिषेक की थी. वही श्यामा की लोकेशन भी थी. इतना ही नहीं जिस नवेद के नंबर वो अक्सर बात किया करती थी. उसकी लोकेशन भी ठीक वही थी जहां इन दोनों की थी.

श्यामा और नवेद ने किया था अभिषेक का कत्ल

अब पुलिस को ये यकीन हो चला था कि हो ना हो अभिषेक की गुमशुदगी से श्यामा और नवेद का कोई ना कोई कनेक्शन ज़रूर है. मगर इस पूरी कवायद में तकरीबन चार महीने का वक्त गुज़र चुका था. और पुलिस पर केस को सुलझाने का प्रेशर बढ़ता जा रहा था. पुलिस ने बगैर देर किए इन दोनों को हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू हुई. पहले तो इन दोनों पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. मगर जब पुलिस ने तीनों की मोबाइल लोकेशन सामने रखते हुए इनसे सख्ती से पूछताछ की तो श्यामा और नवेद के पास सच्चाई कुबूलने के अवाला कोई चारा नहीं बचा. आखिरकार इन दोनों ने ये बात मान ली कि उन्होंने ही मिलकर 28 अगस्त 2019 की उस रात को अभिषेक क़त्ल कर दिया था.

कत्ल के सुबूत मिटाने की नाकाम कोशिश

अब सवाल ये था कि आखिर अभिषेक की लाश कहां थी. पूछताछ में श्यामा और नवेद ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अभिषेक को मारने के बाद उसकी लाश उसी विजयगढ़ के किले में दफ्ना दी थी. मगर उसे दफ्नाने से पहले दोनों ने अभिषेक के कपड़े निकाल लिए थे. और उन्हें नज़दीक की एक सुनसान जगह पर फेंक दिया था. इतना ही नहीं जिस बाइक से अभिषेक बूंदी से सवाई माधोपुर के विजयगढ़ के किले में गया था, उसे भी चलाकर काफी दूर लाकर एक कुएं में डाल दिया था. कुल मिलाकर क़ातिलों ने क़त्ल के सारे सुबूत मिटाने की पूरी कोशिश कर ली थी.

110 दिन बाद अभिषेक की लाश बन चुकी थी कंकाल

इकबाल-ए-जुर्म के बाद पुलिस श्यामा और नवेद को मौका-ए-वारदात पर ले गई और ये जानने की कोशिश की आखिर उन्होंने अभिषेक को कैसे मारा और उस जुड़े सबूत उन्होंने कहां कहां छुपाए हैं. कातिलों की निशानदेही पर पुलिस ने विजयगढ़ के किले से पुलिस कांस्टेबल अभिषेक की लाश निकाली. मगर ये लाश पुलिस के हाथ पूरे 110 रोज़ बाद लग रही थी. लिहाज़ा अभिषेक की लाश कंकाल में तब्दील हो चुकी थी. जिसे देखकर ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि ये अभिषेक की ही लाश है? कपड़े और अभिषेक से जुड़े तमाम सबूत कातिलों ने पहले ही खत्म कर दिए थे. हालांकि उस कंकाल के पोस्टमॉर्टम के बाद ये साफ हो गया कि मरने वाला कोई और नहीं बल्कि राजस्थान पुलिस का कांस्टेबल अभिषेक शर्मा ही है.

जीजा-साली के रिश्ते से परेशान थी दिव्या

केस खुल गया था. लाश मिल चुकी थी. तमाम सुबूत पुलिस के पास था. मगर एक गुत्थी और थी. वो ये कि श्यामा और नवेद में आखिर अभिषेक को मारा क्यों. तो इसके पीछे ये कहानी सामने आई वो ये कि श्यामा जब से अभिषेक की ज़िंदगी में आई थी. तब ये ही अभिषेक के घर में बड़ा उथल पुथल का माहौल था और ये सब हुआ इसलिए क्योंकि कुछ वक्त पहले श्यामा पहली बार अपनी ममेरी बहन दिव्या के घर बूंदी गई थी. इस दौरान वो अभिषेक के घर में करीब 20-25 दिन रही भी. बस यहीं अभिषेक और श्यामा की नज़दीकियां बढ़ गईं. और ये खबर जब दिव्या को पता चली तो घर में हंगामा मच गया. घर का माहौल बिगड़ता देख श्यामा वापस सवाई माधोपुर आ गई. मगर फिर कभी अभिषेक और दिव्या के रिश्ते सामान्य नहीं हो पाए और बात तलाक तक पहुंच गई.

नवेद से शादी करना चाहती थी श्यामा

श्यामा की इन तस्वीरों और वीडियो को देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वो एक आज़ाद ख्याल लड़की थी. जिसने ना सिर्फ अपने जीजा का घर बर्बाद किया बल्कि नवेद के साथ भी रिश्ते में थी. पुलिस ने श्यामा से एक लाज़िम सवाल किया कि जब वो अपने जीजा से प्यार करती थी तो फिर उसने उसका क़त्ल क्यों किया. बकौल श्यामा अब वो अभिषेक से अलग होकर नवेद के साथ रिश्ते को परवाज़ देना चाहती थी. इतना ही नहीं श्यामा नवेद के साथ शादी करना चाहती थी. लेकिन दूसरी तरफ अभिषेक दोहरी मुसीबत में फंसा हुआ था. एक तरफ तो उसकी पत्नी दिव्या उसे छोड़कर चली गई थी. दूसरा अब श्यामा उससे पीछा छुड़ा रही थी. कुल मिलाकर अभिषेक की हालत, ना खुदा ही मिला ना विसाले सनम वाली हो गई थी. उसने श्माया से अलग होने से इनकार कर दिया. अब अगर श्यामा को नवेद के साथ रहना था तो अभिषेक का रास्ते से हटना ज़रूरी थी. लिहाज़ा दोनों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली.

दोनों ने मिलकर ऐसे किया अभिषेक का कत्ल

28 अगस्त 2019 को श्यामा ने अभिषेक को फोन किया और विजयगढ़ के किले में अकेले मिलने के लिए बुलाया. अभिषेक को भी लगा उसकी डूबती नाव को श्यामा का सहारा मिल गया. वो घरवालों को ड्यूटी पर पुलिस लाइन जाने की बता कहकर अपनी बाइक से ही सवाई माधोपुर निकल गया. दोनों ने मिलकर साथ में डिनर किया. इसी दौरान नवेद भी वहां आ गया. श्यामा ने बड़े दोस्ताना माहौल में नवेद से अभिषेक का परिचय कराया. फिर तीनों ने ये तय किया कि वो रात के अंधेरे में ही घूमने के लिए विजयगढ़ के किले जाएंगे. जीजा अभिषेक को इस बात का कतई अंदाज़ा नहीं था कि वो अपनी साली के ट्रैप में फंस गया है. बहरहाल दो अलग-अलग बाइकों पर सवार होकर तीनों लोग विजयगढ़ के किले पहुंचे. किले के अंदर जाते ही प्लानिंग के मुताबिक नवेद ने लोहे की रॉड से अभिषेक पर पीछे से वार किया. अभिषेक वहीं बेहोश होकर गिर गया. जिसके बाद नवेद और श्यामा ने उस पर कई और वार किए. जिससे अभिषेक की मौत हो गई.

ऐसे लगाया था लाश को ठिकाने

क़त्ल हो चुका था और अब बारी थी सबूत मिटाने की. जिसके सबसे पहले उसके मोबाइल फोन को स्विच्ड ऑफ कर दिया. कपड़े उतारकर जंगल में फेंके. बाइक को ले जाकर कुएं में डाल दिया. उसी विजयगढ़ के किले में गड्ढा कर दोनों ने अभिषेक की लाश को दफ्ना दिया. लेकिन पुरानी कहावत है कि कातिल कितना भी शातिर हो कोई ना कोई सबूत छोड़ ही जाता है. श्यामा और नवेद की मोबाइल लोकेशन ने उनकी साज़िश का खुलासा कर दिया.

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