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किडनी रैकेटः अपोलो अस्पताल पर कसा शिकंजा, ट्रांसप्लांट के मामलों की होगी जांच

इंटरनेशनल किडनी रैकेट के मामले में अपोलो अस्पताल पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. पुलिस टीम अब अपोलो हॉस्पिटल में हुए किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों की जांच करेगी. इस रैकेट का खुलासा होने के पहले दिन से ही अपोलो के कई डॉक्टर भी शक के घेरे में हैं.

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पुलिस किडनी रैकेट मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है
पुलिस किडनी रैकेट मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है

इंटरनेशनल किडनी रैकेट के मामले में अपोलो अस्पताल पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. पुलिस टीम अब अपोलो हॉस्पिटल में हुए किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों की जांच करेगी. इस रैकेट का खुलासा होने के पहले दिन से ही अपोलो के कई डॉक्टर भी शक के घेरे में हैं.

ज़रूर पढ़ेंः ये है अपोलो अस्पताल के इंटरनेशनल किडनी रैकेट की इनसाइड स्टोरी

किडनी रैकेट की जांच में जुटी पुलिस टीम पिछले 6 महीने में अपोलो में हुए हर ट्रांसप्लांट केस की जांच करेगी. पुलिस का कहना है कि इसके लिए अपोलो अस्पताल से ऐसे सभी मामलों की पूरी डीटेल ली जा रही है. पुलिस के मुताबिक अपोलो में पिछले 6 महीने के दौरान 240 ट्रांसप्लांट किए गए हैं.

Apolo

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को इंटरनेशनल किडनी रैकेट के मामले में और तीन डोनर्स को गिरफ्तार किया था. जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. इनकी पहचान वीडियो फुटेज की मदद से की गई थी. किडनी डोनेट करने के पहले authorization commision ने इनका इंटरव्यू लिया था जिसमे इन्होंने खुद को रिसीवर्स का रिश्तेदार बताया था.

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दिल्ली पुलिस की टीम ने एक महिला और पुरुष को कानपुर से जबकि दूसरी महिला को वेस्ट बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक़ किडनी रैकेट के मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके असीम के ज़रिये ये सभी लोग इस रैकेट के संपर्क में आए थे.

किडनी

सिकदर और सत्य प्रकाश की मुलाकात रैकेट के सरगना राज कुमार से 2014 में हुई थी. उसके बाद ही सिकदर और सत्या ने अपने रिश्तेदारों को किडनी डोनेट करने के लिए तैयार कर लिया था. पुलिस को तीन और लोगों के बारे में पता चला है, जिन पर सत्या और सिकदर के कहने पर किडनी डोनेट करने का शक है. इस मामले में अब तक आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. गिरफ्तार सभी लोग डोनर्स या मिडिल मैन हैं.

बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही पुलिस ने इस इंटरनेशनल किडनी रैकेट का पर्दाफ़ाश किया है, जो देश के नामी अपोलो अस्पताल में फल-फूल रहा था. इस रैकेट के तार देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशियों तक फैले हुए थे. धंधेबाज़ औनी-पौनी क़ीमत पर किडनी ख़रीदते और फिर उन्हें मोटी रकम पर बीमार लोगों को बेच देते थे. अब पुलिस को शक है कि इस रैकेट में कई बड़े लोग और डॉक्टर भी शामिल हो सकते हैं.

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