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MP हनी ट्रैपः मंत्री, विधायक, सांसद, IAS और पत्रकार सभी बने शिकार

हिंदुस्तान के बीचोबीच बसे मध्य प्रदेश की ये वो कहानी है, जो पूरे देश ने इससे पहले ना कभी सुनी ना सुनाई. कहानी है मास हनी ट्रैप की. इस मास हनी ट्रैप की शुरूआत तीन महीने पहले हुई थी.

इस हनीट्रैप कांड का खुलासा होने के बाद एमपी के नेताओं और अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है इस हनीट्रैप कांड का खुलासा होने के बाद एमपी के नेताओं और अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है

  • हनी ट्रैप का शिकार बने नेता, अफसर और कारोबारी
  • आरती दयाल ने बनाया था ब्लैकमेलिंग गैंग
  • अश्लील वीडियो के सहारे बनाती थी शिकार

मध्य प्रदेश में इधर कुछ दिनों से बहुत से नेता, मंत्री, अफसर, बिजनेसमैन, ठेकेदार, पत्रकार डरे-सहमे हैं. ये वो लोग हैं जो जाने-अनजाने हमाम में उतर गए थे, लेकिन हमाम के अंदर से बिन कपड़ों की तस्वीरें जब किश्तों में बाहर आने लगीं तो हरेक के लिए इज्ज़त बचानी मुश्किल हो गई. मध्य प्रदेश क्या, देश में इससे बड़ा मास हनीट्रैप कभी नहीं हुआ था. आलम ये है कि जितनी बड़ी तादाद में सफेदपोश, इज्जतदार, रसूखदार लोग एक-एककर बेपर्दा हो रहे हैं, उसे देखत हुए एसआईटी भी उलझन में है कि किसे दिखाएं और किसे छुपाएं.

नेता, अफसर और कारोबारी एक साथ फंसे

28 विधायक, 13 आईएएस, 12 बिज़नेसमैन, 4 मंत्री, 3 सांसद, 4 पत्रकार और एक पूर्व मुख्यमंत्री. याद नहीं आता कभी ऐसी लिस्ट एक साथ सामने आई हो. क्या नेता क्या अफसर क्या बिज़नेसमैन. क्या ठेकेदार. क्या पत्रकार. ऐसा लगता है मानों एक ही हमाम में एक साथ सभी नंगे हो गए हों. आलम ये है कि पूरे मध्य प्रदेश में जो भी ज़रा सा बड़ा है. रसूखदार है. ताकतवर है. वही डरा हुआ है. ना जाने कब किसकी तस्वीर हमाम से निकलकर बाज़ार में आ जाए. हिंदुस्तान के बीचोबीच बसे मध्य प्रदेश की ये वो कहानी है, जो पूरे देश ने इससे पहले ना कभी सुनी ना सुनाई. कहानी मास हनी ट्रैप की. उस मास हनी ट्रैप की शुरूआत तीन महीने पहले हुई थी.

वायरल हुई थी IAS की अश्लील वीडियो

जून 2019 में हमाम से उछलकर पहली तस्वीर एक वीडियो की शक्ल में मध्य प्रदेश के मोबाइल फोन में दस्तक देती है. तस्वीरें अश्लील थीं. लेकिन तस्वीर में कैद शख्स ताकतवर. एमपी का आईएएस अफसर. लेकिन वीडियो में ये आईएएस अफसर एक लड़की के साथ जिस हालत में था, उसे परिवार के साथ नहीं देखा जा सकता था. लोग वीडियो को देखकर मज़े लेने लगे. मोबाइल दर मोबाइल होते होते ये वीडियो एमपी पुलिस के मोबाइल में भी दाखिल हो गया. बस यहीं से मज़ा सज़ा में बदलना शुरू हो गया.

वीडियो से खुला आरती दयाल का राज

पुलिस ने जांच शुरू की. तो पता चला कि वीडियो में दिख रही हसीना आरती दयाल है. कुंडली खंगाली गई तो पता चला कि आरती कभी राजनीति में भी हाथ आज़मा चुकी थी. मगर कुछ खास फायदा नहीं हुआ. लेकिन इसके बाद पुलिस ने जब आरती की ज़िंदगी में झांकना शुरू किया तो चौंक उठी. पता चला कि एक आम परिवार की आरती हाल ही के वक्त में अचानक अमीर हो गई है. बैंक खाते गुलज़ार होने लगे थे. पॉश इलाकों में प्रॉपर्टी खरीदी गई. महंगी गाड़ियां भी थी.

आरती के मोबाइल ने उगले राज

ज़ाहिर है आरती के पास मोबाइल भी होगा. और बस पुलिस ने तेज़ी से अमीर बनीं आरती का राज़ जानने के लिए उसके मोबाइल पर अपनी नज़रें गड़ा दीं. अब मोबाइल और मोबाइल का डेटा बोल रहा था. और आरती के राज़ एक एक कर खोल रहा था. अब मोबाइल राज़ उगल रहा था. और हर राज़ के साथ नेता विधायक मंत्री अफसर बाबू ठेकेदार पत्रकार, सभी का सच आम हो रहा था.

जांच के लिए सरकार ने बनाई SIT

रुसवा होने वाले रसूखदार थे लिहाज़ा जांच पुलिस के बस की बात नहीं लगी. तो सरकार ने हमाम का सच सामने लाने के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेटिव टीम यानी एसआईटी बना दी. जांच शुरू हुई. जांच की शुरूआत में ही एसआईटी को पता चल गया कि मामला मास हनी ट्रैप का है. आरती दलाल असल में सेक्स और ब्लैकमेलिंग का सिंडिकेट चला रही थी. उसके साथ 4 और लड़कियां शामिल थीं.

कई बड़े नाम आने से SIT परेशान

अब जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही थी. वैसे वैसे एटीएस के भी पसीने छूट रहे थे. ऐसे ऐसे चेहरे और नाम हमाम से बाहर आ रहे थे कि एसआईटी को समझ ही नहीं आ रहा था कि उनका सच सामने लाएं या छुपा जाएं. पर दिक्कत ये थी कि अब तक मामला सोशल मीडिया से होते हुए मीडिया के ज़रिए राज्य के लोगों तक पहुंच चुका था. लिहाज़ा इस हनी ट्रैप का शिकार बनी सबसे कमज़ोर कड़ी की तलाश शुरू हो गई. ताकि उसकी शिकायत पर इस हमाम की पर्दादारी भी हो जाए और रसूखदारों की इज़्ज़त भी रह जाए.

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