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Sadhna Murder Case: लखनऊ पुलिस की पबजी गेम थ्योरी पर उठ रहे सवाल, यूं उलझ गया कत्ल का ये मामला

सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या जानबूझ कर लखनऊ पुलिस कत्ल के असली मोटिव यानी कत्ल की असली वजह को छुपा कर वजह को लेकर मनगढ़ंत कहानी सुना रही है? अगर हां, तो क्यों? आख़िर वो कौन सा सच है, जिसे पुलिस या परिवार छुपा रहा है?

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5 जून को घर में ही साधना की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी 5 जून को घर में ही साधना की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साधना हत्याकांड में उलझी लखनऊ पुलिस
  • पबजी गेम की थ्योरी लेकर सवालों में उलझी पुलिस
  • आखिर कौन है इस केस में रहस्यमयी तीसरा किरदार?

कुछ दिन पहले लखनऊ से एक खबर आई थी कि 16 साल के एक लड़के ने सिर्फ इसलिए सिर में गोली मारकर अपनी मां का कत्ल कर दिया क्योंकि वो उसे मोबाइल पर पबजी और दूसरे गेम खेलने से रोका करती थी. मगर अब इस कहानी में एक नया ट्विस्ट आ गया है. पता चला है कि ये पबजी गेम वाली थ्योरी खुद पुलिस ने तैयार की थी. कत्ल की असली वजह कुछ और है. और वो वजह ऐसी है कि पीड़ित परिवार नहीं चाहता कि वो जमाने के सामने आए.

- क्या लखनऊ के 16 साल के नाबालिग लड़के ने सचमुच पबजी खेलने से रोकने पर अपनी मां के सर में गोली मार दी थी? 
- क्या वो पबजी या ऑनलाइन गेम का इतना बड़ा एडिक्ट था कि सिर्फ़ टोकने भर से मां की जान ले ली? 
- क्या क़त्ल के बाद सचमुच तीन दिनों तक घर में रखी लाश के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था? 
- क्या क़त्ल वाली रात नाबालिग बेटे ने अपने बाप से फ़ोन पर कोई बात नहीं की थी? 
- क्या वाकई एक बेटे ने सिर्फ़ इसलिए अपनी मां का क़त्ल कर दिया क्योंकि वो उसे टोकती थी? 
- या फिर क़त्ल की असली वजह कुछ और है? 

और सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या जानबूझ कर लखनऊ पुलिस कत्ल के असली मोटिव यानी कत्ल की असली वजह को छुपा कर वजह को लेकर मनगढ़ंत कहानी सुना रही है? अगर हां, तो क्यों? आख़िर वो कौन सा सच है, जिसे पुलिस या परिवार छुपा रहा है?

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पुलिस ने खुद बताई थी पबजी गेम की थ्योरी  
लखनऊ के एडिशनल डीसीपी क़ासिम आबिदी ने बाक़ायदा मीडिया के कैमरे पर क़त्ल और क़त्ल की पूरी वजह बताई थी. वो भी तफ्सील से. मोबाइल, ऑनलाइन गेम या पबजी को लेकर एक नाबालिग बच्चा यूं अपनी मां का क़त्ल कर दे, ज़ाहिर है ये ख़बर हर मां-बाप और पूरे समाज को बेचैन कर दे. हुआ भी वही. सोशल मीडिया पर इस ख़बर को लेकर ख़ूब चर्चा हुई. क्या-क्या बातें नहीं कही गईं. इस नाबालिग बच्चे को सामने रख कर न जाने कितनी ही ऐसी औलादों को कोसा गया, लेकिन इसी क़त्ल को लेकर छन-छन कर अब जो ख़बरें बाहर आ रही हैं, वो इससे भी ज़्यादा बेचैन करने वाली हैं. 

ख़ास कर पुलिस की थ्योरी, पुलिस की जांच और पुलिस की सोच पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल ये कि क्या किसी भी केस को सुलझाने के लिए पुलिस कभी भी कोई भी मनगढ़ंत कहानी सुना सकती है? ये सुलगते सवाल सीधे लखनऊ पुलिस से है. 

आधा सच, आधा झूठ
सूत्रों के मुताबिक कत्ल के मकसद को लेकर पुलिस अब तक जो कहानी सुना रही है, वो आधा सच है और आधा झूठ. पूरा सच सिर्फ पुलिस और परिवार ही जानता है. और दोनों ही नहीं चाहते कि पूरा सच सामने आए. इसकी कई वजह है. लेकिन इत्तेफ़ाक से परिवार के ही एक करीबी ने बेहद ख़ामोशी से कुछ चीज़ें मीडिया में लीक की. उसी करीबी के हवाले से जो ख़बरें बाहर आ रही हैं, उसके हिसाब से ख़ुद पुलिस ने परिवार के सामने दो विकल्प रखे थे. एक ये कि पबजी की कहानी के साथ नाबालिग बेटे के सर सारा इल्ज़ाम धर दिया जाए, वरना परिवार के ही कुछ लोग फंस सकते हैं. 

सोची समझी साजिश या फसाना
दलील ये भी दी गई कि चूंकि बेटा नाबालिग है लिहाज़ा मुश्किल से तीन साल या उससे पहले ही आज़ाद हो चुका होगा. लेकिन बड़े फंसे तो फिर लंबी सज़ा होगी. सूत्रों के मुताबिक करीबियों ने पहला विकल्प चुना. इसी के बाद पुलिस ने पबजी की कहानी सुनाई और नाबालिग बाल सुधार गृह पहुंच गया. अब यहां सवाल ये है कि परिवार की ऐसी क्या मजबूरी थी जो उसने पहला विकल्प चुना? और सवाल ये भी है कि पुलिस किस बात पे मजबूर थी जो सच्चाई सामने लाने की बजाय विकल्प दे रही थी? यही वो राज़ है जो हर कोई जानना चाहता है. 

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पुलिस ने ही बनाई पबजी थ्योरी
परिवार के एक करीबी के मुताबिक पबजी की पूरी थ्योरी पुलिस ने ही बनाई थी. तब पुलिस ने कहा था कि या तो कत्ल का मकसद बताओ या जो हम कह रहे हैं, उसे मान लो. उस वक़्त परिवार के पास पुलिस की बात मानने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था. इसी के बाद ज़माने के सामने कत्ल के मकसद के नाम पर पबजी की थ्योरी रखी गई. हालांकि परिवार के इस करीबी के मुताबिक कत्ल की जो असली वजह है वो परिवार कभी नहीं चाहता कि दुनिया के सामने आए क्योंकि वो ज़्यादा तकलीफ़देह है.

5 जून को कत्ल, 7 जून को खुलासा
लखनऊ में पांच जून की रात हुए इस क़त्ल का ख़ुलासा 7 जून की रात को हुआ था. जब नाबालिग बेटे ने आसनसोल में तैनात अपने पिता को फ़ोन पर मां की मौत की ख़बर दी थी. जानकारी के मुताबिक सात जून की रात बेटे ने अपने पिता को जब पहला कॉल किया तो कुल 49 सेकेंड बात की थी. इस कॉल के दौरान ही उसने मां के क़त्ल की बात कही थी. ये सुन कर पिता ने बेटे से कहा कि मां की लाश दिखाओ. इसके बाद फ़ोन कट गया. बेटे ने अब दोबारा अपने पिता को वीडियो कॉल किया. फिर उस कमरे का दरवाज़ा खोला जिसमें उसकी मां की लाश पिछले तीन दिनों से पड़ी थी. 

कत्ल के बाद पिता को की थी वीडियो कॉल 
लाश दिखाने के बाद बेटे ने वीडियो कॉल पर ही कमरे में रखी वो पिस्टल भी दिखाई, जिससे उसने गोली मारी थी. पिस्टल दिखाते हुए वो कमरे से बाहर निकला फिर पिस्टल को डाइनिंग टेबल पर रख दिया. इस वीडियो कॉल पर बेटे और बाप के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई. सवाल ये है कि घर में एक कत्ल हुआ है, उसी घर में दस साल की एक छोटी बच्ची भी है. इसके बावजूद पिता पुलिस या दूसरे रिश्तेदारों को ख़बर करने की बजाय आधे घंटे तक बेटे से फ़ोन पर क्या बात करते रहे?

कत्ल के ख़ुलासे के बाद नाबालिग बेटे ने अपने पिता के साथ-साथ पुलिस को भी ये कहा था कि एक बिजली कर्मचारी से उसकी मां का झगड़ा हुआ और उसी ने कत्ल किया है. हालांकि तब पुलिस ने उसके इस बयान को गुमराह करनेवाला बयान कहते हुए संजीदगी से जांच नहीं की.

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इस केस में अहम है तीसरा किरदार
सूत्रों के मुताबिक नाबालिग बेटे का ये बयान पूरा झूठ नहीं है. इस पूरी कहानी में वो शख़्स एक अहम किरदार है. इस किरदार का इस घर में आना जाना था. पुलिस के पास इस किरदार का नाम भी है. ख़ुद परिवार भी इस किरदार को जानता है. लेकिन कुछ वजह है जिसकी वजह से इस किरदार को सामने नहीं लाया जा रहा है. क्योंकि अगर ये किरदार और उसकी कहानी सामने आ गई, तो पुलिस की पबजी वाली कहानी अपने आप झूठी हो जाएगी. पबजी की कहानी झूठी साबित करने वाले कई और सवाल भी हैं.. 

सवाल पर सवाल
जैसे नाबालिग बेटे के पिता सेना में हैं. उनके पास लाइसेंसी हथियार है. उन्हें पता है कि घर में हथियार को लॉक कैसे रखा जाता है. घर में ये हथियार उस अलमारी में रखी थी, जिसमें ताला लगा हुआ था. चाबी नाबालिग बेटे के हाथ कैसे आई? चाबी आ भी गई, तो हथियार को उसने अनलॉक कैसे किया? कत्ल करने के बाद बेटा भागा क्यों नहीं? कत्ल के बाद अगले तीन दिन तक वो इतना सामान्य कैसे रहा? तीन दिनों तक यूं क्रिकेट खेली, गेम खेला, मूवी देखी.. जैसे मानों कुछ हुआ ही नहीं. ये कैसे मुमकिन है?

कत्ल का मकसद क्यों छिपाना चाहता है परिवार
लखनऊ पुलिस भले ही कत्ल के मकसद को लेकर ग़लत बयानी करे, मगर सूत्रों के मुताबिक अब ख़ुद परिवार के अंदर से पुलिस की थ्योरी को लेकर नाराज़गी सामने आने लगी है. मगर इस केस का सबसे अजीब पहलू ये है कि ख़ुद परिवार के लोग पुलिस की थ्योरी को काटना भी चाहते हैं और कत्ल के असली मकसद को जाहिर नहीं करना चाहते. कुल मिलाकर इस मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अभी पहेली बने हुए हैं.

 

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