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खादी बनती खाकीः क्या नेताओं की बोली बोल रही है दिल्ली पुलिस?

दिल्ली में चुनाव है. चुनाव में नेता बोलते ही हैं. अब तो चुनाव में गाली भी चुनावी नारे जैसी लगती हैं. नफ़रत के बोल तो हर मुंह से फूटता है. पर चलिए इन्हें माफ कीजिए क्योंकि ये नेता लोग हैं. इन्हें चुनाव जीतना है. इन्हें राजनीति करनी है. पर दिल्ली के इस चुनाव में पुलिस के साहब का क्या काम?

कई मामलों में दिल्ली पुलिस पर सवाल उठते रहे हैं कई मामलों में दिल्ली पुलिस पर सवाल उठते रहे हैं

  • शाहीन बाग गोलीकांड पर जारी है सियासत
  • दिल्ली में खादी की ज़बान बोलती खाकी
  • पुलिस का मुंह, नेताओं की ज़बान!

ख़ाकी और खादी के रंग के फर्क को इसलिए इतना साफ रखा गया है ताकि कोई नेता और पुलिस में धोखा ना खा सके. मगर दिल्ली पुलिस पता नहीं क्यों अपनी हरकतों से खाकी को खादी बनाने पर तुली नज़र आ रही है. शाहीन बाग गोलीकांड को लेकर मंगलवार को दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर में एक सीनियर पुलिस अफसर मीडिया से मुखातिब थे. लगा गोलीकांड पर कुछ बड़ा खुलासा होने जा रहा है. मगर जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, ऐसा लगा मानो खाकी के पीछे से खादी बोल रही है.

दिल्ली में चुनाव है. चुनाव में नेता बोलते ही हैं. अब तो चुनाव में गाली भी चुनावी नारे जैसी लगती हैं. नफ़रत के बोल तो हर मुंह से फूटते हैं. पर चलिए इन्हें माफ कीजिए क्योंकि ये नेता लोग हैं. इन्हें चुनाव जीतना है. इन्हें राजनीति करनी है. पर दिल्ली के इस चुनाव में इन साहब का क्या काम? ये नेताओं की बोली क्यों बोल रहे हैं. इनकी क्या मजबूरी है.

मंगलवार शाम करीब पौने सात बजे दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर की ड्योहढी पर खड़े होकर क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश देव ने जो कहा और किया. दिल्ली पुलिस के इतिहास में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ. मंगलवार शाम पौने सात बजे से पहले दिल्ली पुलिस जब जब कैमरे के सामने आई. तो जुर्म के किसी केस की अपडेट लेकर आई. केस सुलझाने की खबर देने आई. या किसी जुर्म की जानकारी लेकर आई. ये पहली बार था जब दिल्ली पुलिस सिर्फ ये कहने के लिए कैमरे पर आई थी कि फलाना मुजरिम एक खास राजनीतिक पार्टी का मेंबर है. बाकी जांच कर रहे हैं.

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मामला शाहीन बाग़ में गोलीकांड का था. इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने कपिल गुर्जर नाम के एक नौजवान को गिरफ्तार किया था. बाद में मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. क्राइम ब्रांच ही मामले की जांच कर रही है. पर कमाल देखिए कपिल गुर्जर ने शाहीन बाग़ में गोली क्यों चलाई किसके कहने पर चलाई. किसके इशारे पर वो वहां पहुंचा. इस साज़िश में उसके साथ और कौन कौन लोग शामिल हैं. इस साज़िश का असल मक़सद क्या था. इनमें से एक भी सवाल का जवाब होनहार डीसीपी राजेश देव के पास नहीं था.. बस जवाब था तो इतना कि कपिल का संबंध आम आदमी पार्टी से था.

दिल्ली पुलिस के साहब कह रहे हैं कि हमने कॉम्प्रेहेंसिव इनवेस्टीगेशन किया, उस रास्ते का ट्रैक किया जिससे कपिल आया था, कपिल के साथी को ट्रैक किया, उस गाड़ी को ट्रैक किया जिसमें वो बैठकर आया था, क्राइम ब्रांच ने बड़ी मेहनत करके कपिल के मोबाइल की डिलीट तस्वीरें और वीडियों तक को वापस हासिल किया. और तब जाकर जो पता चला वो ये था कि कपिल आम आदमी पार्टी का मेंबर है. जनवरी या फरवरी 2019 में उसने अपने पिता के साथ आप पार्टी ज्वाइन किया था.

साहब से इससे आगे साज़िश के बारे में सवाल पूछा गया. तो हर बार एक ही रटा रटाया जवाब आया अभी इनवेस्टीगेशन जारी है. बाकी बाद में बताएंगे. फिलहाल इतना तो काफी है ना कि आपको बता दिया कि वो किस पार्टी से जुड़ा था. वाकई कमाल है दिल्ली पुलिस.

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वो तो भला हो एक रिपोर्टर का जिसने पूछ लिया कि कपिल ने शाहीन बाग में जिस पिस्टल से गोली चलाई थी वो कहां से आई? डीसीपी साहब ने बताया कि पिस्टल सात साल पहले खरीदी गई थी. डीसीपी साहब ने बताया कि उसने आप एक साल पहले ज्वाइन किया था. पर गोली अब क्यों चलाई? डीसीपी साहब ने एक बार फिर वही जवाब दे मारा, इनवेस्टीगेशन जारी है.

पुलिस का काम होता है केस की जांच करना. केस को सुलझाना और केस खत्म करना. अब अगर आपने डीसीपी साहब की सारी बातें सुन ली होंगी. तो आप ही बताइये एक राजनीतिक पार्टी के साथ इस गोलीमार के कनेक्शन को साबित करने के अलावा इस गोलीकांड की साज़िश के बारे में क्या एक भी खुलासा दिल्ली पुलिस ने किया? क्या दिल्ली पुलिस ने ये बताया कि आखिर शाहीन बाग़ में गोली चलाने का उसका मक़सद क्या था? क्या आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े नेता इसमें शामिल हैं? अगर हां तो उनके नाम का खुलासा क्यों नहीं किया?

इसी पुलिस हेडक्वार्टर में जेएनयू हिंसा को लेकर भी इसी दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. तब भी दिल्ली पुलिस पर उंगलियां उठी थीं.. आज भी बस इंतज़ार ही है उन चेहरों के बेनकाब होने का जिन्हें बेनकाब करने का तब दिल्ली पुलिस ने वादा किया था. बात दिल्ली पुलिस की इमेज की है. भरोसे की है. पुलिस का जो काम है उसे वही करना चाहिए. खाकी को खाकी रहने दें. खादी ना बनाएं.

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