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ठीक हो जाने के बाद क्या इंसान के जिस्म से कभी निकलेगा कोरोना वायरस?

अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन बन भी गई. तो क्या कोरोना का ये वायरस हमेशा-हमेशा के लिए मर जाएगा? क्या ये वायरस जो मरीजों के जिस्म में घर बनाकर बैठ गया है. ये निकल जाएगा? तो जवाब है बिलकुल नहीं. एक बार ये वायरस किसी इंसान के शरीर में घुस गया तो वो ना तो कभी मरेगा और ना कभी बाहर निकलेगा. तो फिर क्या होगा?

भारत में कोरोना से ग्रसित लोगों की संख्या 11900 के पार जा चुकी है भारत में कोरोना से ग्रसित लोगों की संख्या 11900 के पार जा चुकी है

  • क्या कभी मरेगा यह जानलेवा कोरोना वायरस?
  • मरीजों के जिस्म में घर बनाकर बैठा है कोरोना

अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन बन भी गई. तो क्या कोरोना का ये वायरस हमेशा-हमेशा के लिए मर जाएगा? क्या ये वायरस जो मरीजों के जिस्म में घर बनाकर बैठ गया है. ये निकल जाएगा? तो जवाब है बिल्कुल नहीं. एक बार ये वायरस किसी इंसान के शरीर में घुस गया तो वो ना तो कभी मरेगा और ना कभी बाहर निकलेगा. तो फिर क्या होगा? क्या कोरोना की ये महामारी कभी खत्म ही नहीं होगी? तो ऐसा भी नहीं है. जरूर खत्म होगी मगर उसका वायरस हमेशा जिंदा रहेगा.

अगर आपने कभी इन सवालों के जवाब नहीं तलाशे तो आज ही तलाशिए क्योंकि ये सिर्फ विज्ञान की बात नहीं. बल्कि हमारे आपके जैसे इंसान की भी बात है. ये शरीर आपका है तो आपको ही पता होना चाहिए कि आपके शरीर में किसने-किसने और कैसे-कैसे घुसपैठ कर रखी है. और वो आपको किस तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं. बहरहाल लौटते हैं उस सवाल पर जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता होगा कि क्या एक बार शरीर में घुसने के बाद वायरस कभी मरता है. क्या जिन-जिन लोगों पर अब तक कोरोना वायरस ने हमला किया है. वो कभी इससे निजात पा पाएंगे.

सीधे, सपाट और सख्त लफ्ज़ों में कहें तो एक बार वायरस आपके शरीर में घुस गया तो कभी उससे निकलेगा नहीं. ना ही कभी मरेगा. जो लोग कोरोना के वायरस से संक्रमित हो रहे हैं. वो ये जान लें कि उनके शरीर में अब इस वायरस ने कभी ना निकलने वाले किराएदार की तरह कब्ज़ा जमा लिया है. तो सवाल ये कि फिर वैक्सीन के लिए तमाम देशों के मेडिकल एक्सपर्ट क्यों अपने दिन रात एक किए हुए हैं. बहुत वाजिब फिक्र है ये. मगर इसका जवाब जानने से पहले ये जान लीजिए कि किसी इंसानी जिस्म के लिए कोई वायरस कितना खतरनाक हो सकता है और उससे भी पहले ये जानिए कि आखिर ये वायरस है क्या बला. क्यों ये इंसानों का दुश्मन बन जाता है.

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हिंदी में वायरस को विषाणु कहते हैं. यानी वो अणु जिसमें विष यानी जहर है. अब ज़ाहिर है जब ये जहरीला अणु जिस्म में घुसेगा तो आपका भला तो चाहेगा नहीं. दूसरी तरह से समझें तो दरअसल वायरस वो गंदी मछली है. जो तालाब की तरह इंसान के शरीर में घुसने के बाद उसके पूरे सिस्टम को खराब कर देती है. कोरोना के वायरस ने तो इंसानों के सिस्टम के साथ-साथ पूरी दुनिया की हालत पतली कर रखी है.

महज 60 नैनोमीटर के कोरोना वायरस को आज पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं हरा पा रही है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक मीटर में 1 अरब नैनोमीटर होते हैं. ज़ाहिर है ये इतना छोटा होता है कि इसे नंगी आंखों से देखना तो दूर. साधारण माइक्रोस्कोप भी इसे नहीं देख पाते हैं. और इनकी कोई उम्र भी नहीं होती. ये 20 हजार सालों तक भी ज़िंदा रह सकते हैं.

डराना हमारा मकसद कतई नहीं. बल्कि आपको कोरोना के वायरस से बचाना हमारी कोशिश है. और दुश्मन से बचने के लिए उसके बारे में जानना बहुत जरूरी है. होता दरअसल ये है कि अकेले किसी वायरस का ज़िंदा चीज़ों में पाए जाने वाले सेल के बिना कोई वजूद नहीं. ज़िंदगी में कोहराम मचाने के लिए इसे किसी डीऑक्सीरिबो न्यूक्लिक एसिड यानी डीएनए और राईबो न्यूक्लिक एसिड यानी आरएनए की जरूरत पड़ती है. ये इसे इंसानों में भी मिलता है. जानवरों, फूल, पौधों और परिंदों में भी. विज्ञान की ज़ुबान में कहें तो तबाही मचाने के लिए इस वायरस को एक मेजबान सेल की जरूरत होती है. जो किसी भी ज़िंदा चीज में पहले से मौजूद होते हैं.

शरीर में घुसते ही ये सबसे पहले हमारे शरीर के सिस्टम के लिए जरूरी हमारे गुड सेल पर हमला कर उन्हें मार देते हैं. और फिर ये हमारी कोशिकाओं में मिल जाते हैं. वहां ये निटेगिव प्रोटीन बनाना शुरू कर देते हैं. जिससे हमारी कोशिकाएं भी उसी वायरस की तरह ढलने लगती हैं. और ये इन कोशिकाओं के अंदर ही कई नए वायरस बनाना शुरु कर देते हैं. जिस्म में जैसे जैसे इनकी तादाद बढ़ती जाती है. वैसे-वैसे इंसान बीमार पड़ता जाता है.

इंसान के जिस्म में ये वायरस कहीं से भी और कैसे भी दाखिल हो सकते हैं. मसलन किसी के छींकने, खांसने, हाथ मिलाने, किसी चीज को छूने, यहां तक की मच्छर के काटने से भी. एक बार शरीर में ये दाखिल हो गए तो गुड सेल को मारने के बाद. शरीर के अंगों पर हमला कर उन्हें काम करने से रोकने लगते हैं. और ये हमारे लंग्स में पहुंच कर ऑक्सीजन की सफाई की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करने लगते हैं. जैसे की कोरोना का वायरस कर रहा है.. इससे शरीर के बाकी हिस्से काम करना बंद करने लगते हैं और इंसान मौत की आगोश में चला जाता है.

मौसम बदलने के वक्त जब आप सर्दी-ज़ुकाम का शिकार होते हैं. तब दरअसल आपके शरीर पर इन्हीं वायरस ने हमला किया होता है. ऐसे ही कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में शुरुआत बुखार, खांसी, सिरदर्द से होती है और अपने चरम तक पहुंचते-पहुंचते ये वायरस इंसान की सांस की नली पर हमला कर देता है. जिससे सांसें रुक जाती हैं. जिस तरह कोरोना वायरस चमगादड़ से इंसानों तक आया और फिर इंसानों से इंसानों में ट्रांसफर होने लगा वैसे ही कई और वायरस हैं जो जानवरों से इंसानों को तोहफे में मिले हैं. इनमें से कइयों के नाम आप पहले से जानते हैं, मसलन इन्फ्लूएंजा, रैबीज, पोलियो, स्माल पॉक्स, हेपेटाइटिस जैसे तमाम वायरस हैं. जिन्हें एनिमल वायरस भी कहते हैं. इनमें से कई वायरस के तो खुद जानवर भी शिकार हो जाते हैं.

बैक्टीरिया और वायरस के ट्रीटमेंट में क्या है फर्क?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैक्टीरिया और वायरस में फर्क है. इनके साइज से लेकर इनके रीप्रोडक्शन यानी प्रजनन के तरीके अलग-अलग होते हैं. बैक्टीरिया से हुई बीमारियों को एंटीबायोटिक दवाईयों से ठीक किया जा सकता है. मगर ये दवाएं किसी वायरस के लिए असरदार नहीं होती हैं. उनसे बचने के लिए टीके की जरूरत होती है. जैसे रैबीज, पोलियों और इंफ्य्लूएंजा के टीके लगाए जाते हैं. उसी तरह कोरोना से बचने के लिए भी टीका ही लगेगा. क्योंकि ये किसी आम दवा से ठीक होने वाला नहीं है. रही बात टीके की तो कोरोना वायरस से बचाने वाले टीके के बनने में अभी वक्त है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

कोरोना का वायरस दिसंबर में शुरु हुआ और जनवरी, फरवरी, मार्च तक इससे प्रभावित लोगों के आंकड़े 10 से 12 लाख तक पहुंच गए. जो कोरोना ने किया, वही अमूमन दूसरे वायरस भी करते हैं. इनके ज्यादातर हमले सर्दियों में होते हैं. हालांकि ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि कोरोना का वायरस गर्मी में बेअसर हो जाता है. इसलिए इस बात के साबित होने तक ये गलतफहमी दिमाग से निकाल दीजिए कि गर्मी में आप इस वायरस से बच जाएंगे. ऐसा होता तो कम से आस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे वो तमाम देश बच जाते. जहां दिसंबर से फरवरी-मार्च तक गर्मी पड़ती है. मगर यहां भी कोरोना के मरीज़ों की तादाद अच्छी खासी है.

विज्ञान ने अब तक दुनिया में करीब 2 हजार तरह के वायरस की जानकारी जुटाई है. जिनमें सिर्फ 10 फीसदी ही इंसान को प्रभावित करते हैं. बाकी वायरस पेड़-पौधे, फूल-पत्ती, जानवरों और परिंदों में होते हैं. अब तक इंसानों पर जितने भी वायरस ने हमला किया. विज्ञान ने उन सब के टीके बना लिए हैं. मगर आज तक कोई एक ऐसा टीका तैयार नहीं किया जा सका है. जो किसी भी अनजाने वायरस को मार सके. चमगादड़ से इंसान में पहुंचा कोरोना का वायरस भी नए किस्म का है. इसलिए वायरस को मारने वाला दूसरा कोई भी टीका इस पर बेअसर है.

हालांकि यूं भी अलग-अलग वायरस अलग हथियारों से लैस होकर आते हैं. कोई किडनी पर हमला करता है तो कोई फेफड़ों पर. तो वहीं कोरोना जैसे वायरस रेस्प्रेट्री सिस्टम पर अटैक करते हैं. इनके टारगेट भी अलग-अलग होते हैं. कोई बच्चों के लिए घातक होता है. तो कोई बुज़ुर्गों के लिए जानलेवा. तो कोई सिर्फ युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं. इतिहास की किताबें भरी पड़ी हैं इंसानियत पर हमला करने वाले इन जानलेवा वायरसों से. मगर हर वायरस का इलाज किया गया. देर भले लग रही हो मगर कोरोना के इस वायरस का भी इलाज जल्दी ही होगा.

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