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वुहान लैब का राज क्यों छुपाता है चीन, कोरोना को लेकर भी किया था गलत दावा

वुहान की लैब दुनिया की उन चंद लैब में से एक है, जिन्हें क्लास 4 पैथोजेन्स यानी पी4 स्तर के वायरस के इस्तेमाल की इजाजत है. यहां उन खतरनाक वायरस पर रिसर्च होती है और टीके बनाए जाते हैं. जिनसे इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है.

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कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से ही हुई थी
कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से ही हुई थी

  • अविश्वास का दूसरा नाम बना चीन
  • वुहान की लैब में है मौत का सामान

वुहान की लैब से खतरनाक वायरस लीक होने के इल्जाम पर चीन भड़का हुआ है. चीन इस मसले पर सफाई तो दे रहा है लेकिन पूरा सच अभी भी उसने दुनिया को नहीं बताया है. आए दिन वो जिस तरह कोरोना पर कलाबाजियां कर रहा है. उससे दुनिया का कोई भी देश उस पर यकीन करने को राजी नहीं है. चीन आज अविश्वास का दूसरा नाम बन चुका है. वो क्या कहता है क्या करता है उस पर आज किसी को यकीन नहीं. कोरोना का सच और कोरोना से जुड़े मौत के आंकड़े छुपाने के मामले में पहले ही उसकी पोल खुल चुकी है.

वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के पी4 लैब को फ्रांस के बायो-इंडस्ट्रियल फर्म इंस्टिट्यूट मेरियुक्स और चीनी एकैडमी ऑफ साइंस ने मिलकर बनाया है. ये दुनिया के उन चंद लैब में से है जिन्हें क्लास 4 पैथोजेन्स यानी पी4 स्तर के वायरस के इस्तेमाल की इजाजत है. यहां उन खतरनाक वायरसों पर रिसर्च होती है और टीके बनाए जाते हैं. जिनसे इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है.

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3,000 स्कावायर मीटर के एरिया में फैले इस लैब को 4.2 करोड़ डॉलर की लागत से 2015 में पूरा किया गया था. हालांकि 2018 में आधिकारिक तौर पर इसमें काम शुरू किया गया. इस संस्थान में पी3 लैब भी मौजूद है जो 2012 से चल रहा है. और ये एशिया का सबसे बड़ा वायरस बैंक है. इस इंस्टिट्यूट में चाइना सेंटर फॉर वायरस कल्चर कलेक्शन मौजूद हैं. यहां 1500 से ज्यादा वायरस स्ट्रेन हैं. ये बात खुद इस लैब की साइट पर लिखी हुई है. इसीलिए ये अंदेशा जताया जा रहा है कि कोविड-19 इसी लैब से ही लीक हुआ है.

अब सवाल ये है कि कोरोना को लेकर शक की सुई बार-बार चीन पर क्यों जाती है. क्यों बार-बार कोरोना को लेकर चीन सवालों के घेरे में नजर आता है. दरअसल सच को छिपाना चीन की पुरानी आदत है और अपने ही दायरे में रहना चीन का किरदार. ब्रिटेन के अखबार के दावे के बाद भी चीन में सन्नाटा है. और वो अपनी लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की बात को खारिज कर रहा है. लेकिन चीन पर यकीन करना दुनिया के लिए मुश्किल हो रहा है. चीन खुद इस अविश्वास की वजह है. दरअसल, चीन ने कोरोना वायरस को लेकर दुनिया को जिस तरह अंधेरे में रखा. उसके बाद उस पर यकीन करना भी खतरे से खाली नहीं.

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कोरोना के मामले में चीन की संदिग्ध गतिविधियों और गुमराह करने वाले बयानों के बाद इसके पीछे किसी साजिश से तो इनकार किया भी नहीं जा सकता. इसकी एक नहीं कई वजहें हैं और सबसे बड़ी वजह ये कि जब चीन में कोरोना से मौतें शुरु हुईं तो उसने ये बात दुनिया को बताने में देर की. चीन ने अपने यहां कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी जमकर घालमेल किया. यही नहीं जिसने भी चीन में कोरोना को लेकर सही तथ्य दुनिया के सामने लाने की कोशिश की उनकी जुबान या तो खामोश कर दी गईं या फिर उन्हें जेल में डाल दिया गया.

कोरोना की बात सामने लाने वाले डॉक्टर ली वेनवियांग की तो जान तक चली गई. आरोप है कि कोरोना फैलने के पहले ही हफ्ते में चीन में करीब 5 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन पर कोरोना को लेकर खबरें फैलाने का आरोप था. इन्हीं बातों से समझ लीजिए कि चीन ने कोरोना के खतरे को दुनिया की नजरों से छुपाने के लिए क्या-क्या नहीं किया और जब तक बताया, तब तक इसकी जद में आधी से ज्यादा दुनिया आ चुकी थी.

दुनिया के सामने छवि खराब ना हो और उसके व्यापार पर असर ना पड़े. इसलिए चीन ने कोरोना के खतरे से दुनिया को आगाह करने वालों को रातों-रात गायब कर दिया. आरोप ये भी है कि अपने रिश्तेदारों की खैर खबर लेने वाले चीन के लोगों पर वहां की सरकार ने जुर्माना तक लगाया. और बीमार रिश्तेदारों को ऑनलाइन संदेश भेजने वालों को बीमार बताकर उन्हें गुप्त जगहों पर भेज दिया गया. ये बातें काफी दिन बाद सामने आईं. कोरोना के साए में पिछले चार महीनों में चीन ने बताया कम है छिपाया ज्यादा है.

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इतना ही नहीं वुहान में हर उस शख्स के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया. जिसने यहां कोरोना से हो रही मौत पर वीडियो बनाने की कोशिश की. हुबेई और वुहान में कोरोना की तबाही दिखाने वाले हर वीडियो को चीन की सरकार ने सेंसर कर दिया. मतलब जिस-जिस ने चीन में कोरोना का सच दुनिया को बताने की कोशिश की उसे या तो चुप करा दिया गया या फिर उसे बीमार बताकर गुफ्त ठिकानों पर भेज दिया गया.

ऐसे में सवाल है कि ये अगर ये इंसानी गलती है तो चीन को इसे मान लेना चाहिए. अगर वो नहीं मान रहा है तो उसे आखिर किस सच के सामने आने का डर था और चीन की इस वुहान लैब में ऐसा क्या चल रहा था जिसके सामने आने से चीन की पोल खुल जाएगी.

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