समाज सेवा में लगे होने की वजह से जाने-माने कारोबारी और समाजसेवी बजरंगलाल बोकड़िया के मकान में अक्सर लोगों का आना-जाना लगा रहता था लेकिन सोमवार की सुबह जब तक एक पड़ोसी ने उनके इस घर में दस्तक दी, तब तक बोकड़िया साहब का कत्ल हो चुका था.
65 साल के इस बुज़ुर्ग कारोबारी का कत्ल कातिलों ने उन्हीं के घर में घुस कर गला रेत कर किया था. लेकिन मकान में कत्ल की इकलौती वारदात नहीं थी बल्कि बोकड़िया के साथ यहां तीन और लाशें पड़ी थीं और मरनेवाले बाकी लोग थे बोकड़िया के ड्राइवर और दो नौकर. सभी के सभी लाशों पर मौजूद जख्म के निशान इस बात की तरफ इशारा कर रहे थे कि सभी का कत्ल गला रेत कर ही किया गया.
बोकड़िया की लाश जहां उनके डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठी हुई हालत में मिली, वहीं बाकी के तीन लोगों की लाश ड्राइंग और डाइनिंग स्पेस में बिखरी पड़ी थीं. बोकड़िया के दोनों हाथ कुर्सी से बंधे हुए थे. कत्ल के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि उनके घर का सदर दरवाजा टूटा हुआ है, जबकि घर की तमाम चीजें बिखरी पड़ी हैं.
बोकड़िया के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी हैं, जिनकी शादी हो चुकी थी और कुछ रोज पहले ही घर के दूसरे लोग किसी काम से मुंबई गए थे लेकिन इससे पहले कि वे लौट कर आते, बोकड़िया साहब का कत्ल हो गया.
दरअसल, सुबह उनके घर पहुंचे एक पड़ोसी को जब कई बार डोर बेल बजाने और आवाज़ लगाने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने कुछ दूसरे लोगों को इसकी ख़बर दी लेकिन तमाम पड़ोसियों की कोशिश के बावजूद जब बोकड़िया निवास का दरवाज़ा नहीं खुला, तो लोगों ने फिर पुलिस को बुलाना ही ठीक समझा.
पुलिस मौके पर पहुंच चुकी थी. घर का दरवाजा खोला गया, लेकिन अंदर का मंजर देख कर कुछ देर के लिए वर्दीवालों का भी दिमाग घूम गया. घर के ड्राइंग-डाइनिंग रूम में एक साथ चार लोगों की लाशें पड़ी थीं. बुजुर्ग बोकड़िया साहब की लाश जहां कुर्सी से बंधी हुई थी, वहीं उनके ड्राइवर और दो नौकरों की लाशें नीचे पड़ी थीं. पूरा घर बिखरा हुआ था और सदर दरवाजा टूटा हुआ, जो इस बात की तरफ़ इशारा कर रहा था कि वारदात का मकसद लूटपाट भी हो सकता है.
हालांकि मुमकिन ये भी था कि क़ातिलों ने किसी और मकसद से इस वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस को उलझाने के लिए घर की चीज़ें बिखेर दीं हों या फिर किसी ख़ास चीज की तलाश में ही उन्होंने बोकड़िया के मकान पर धावा बोला हो.
बेहद मिलनसार और खुशमिज़ाज बोकड़िया प्लास्टिक का कारोबार करते थे और उनका काफी वक्त लोगों की मदद करने में गुजरता था. रविवार शाम को तकरीबन साढ़े पांच बजे उनके भाई ने उनसे बात करने के लिए उनके मोबाइल फ़ोन पर कॉल किया था, लेकिन तब उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. इसके बाद रात 11 बजे के आस-पास उनके भाई ने दोबारा उन्हें फोन किया, लेकिन तब भी फ़ोन नहीं उठा जबकि बोकड़िया कभी फोन नहीं उठाने पर दोबारा कॉल जरूर करते थे. उनके भाई को तभी से उनकी फिक्र तो जरूर शुरू हो गई थी, लेकिन भाई ने उनके बारे में इतना बुरा भी नहीं सोचा था.
वैसे एक साथ चार लोगों के क़त्ल की ये वारदात अपने-आप में काफी रहस्यमयी है क्योंकि बोकड़िया का मकान मेन रोड पर है और घर के ठीक सामने पुलिस पिकेट भी. अक्सर पुलिसवाले बोकड़िया के घर से कुर्सी लेकर ही पिकेट में पहरा भी देते हैं. साथ ही पास में दो-दो बैंक होने की वजह से, वैसे भी पुलिस की निगरानी इस जगह पर ज्यादा होती है लेकिन इसके बावजूद ऐसी जगह पर एक साथ चार-चार क़त्ल की वारदात चौंकानेवाली जरूर है.
जाहिर है, यूं गला रेत कर एक साथ चार लोगों की जान लेना कोई दो-चार लोगों का काम नहीं हो सकता, बल्कि इस वारदात में कम से कम 8-10 लोगों ज़रूर शामिल रहे होंगे. घर के सदर दरवाज़े का टूटा होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि ये सभी के सभी लोग जबरदस्ती मकान में दाखिल हुए लेकिन इतना होने के बावजूद ना तो किसी ने क़ातिलों को यहां आते हुए देखा और ना ही क़त्ल के दौरान किसी को इस वारदात की भनक ही लगी और ये सबकुछ उलझानेवाला जरूर है.