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कुंभ का रहस्यः जब किन्नरों ने की तंत्र मंत्र वाली अघोरी साधना

पहली बार कुंभ मेले में किन्नर पीठाधीश्वर इस तरह महाकाली को प्रसन्न करने के लिए अघोरी यज्ञ कर रही थी. साथ ही इतिहास में भी ऐसा पहली बार हो रहा था जब कोई टीवी चैनल यानी आजतक इस अघोरी यज्ञ को कवर कर रहा था.

किन्नर अखाड़े को पहली बार कुंभ में जगल मिली है (फोटो-PTI) किन्नर अखाड़े को पहली बार कुंभ में जगल मिली है (फोटो-PTI)

आपने किन्नरों को कभी तंत्र-मंत्र वाली अघोरी साधना करते देखा है? शायद नहीं. क्योंकि अब तक कम ही पत्रकार या टीवी चैनल वहां तक पहुंच सके. मगर प्रयागराज में चल रहे कुंभ में कामाख्या के साधकों की मौजूदगी में किन्नर महामंडलेश्वर भवानी माता ने अघोरी तंत्र साधना की तो इसका साक्षी हमारा कैमरा भी बना.

आधी रात को जब आप सोए हुए थे, तब प्रयागराज में चल रहा था एक अनोखा अघोरी यज्ञ. मुंडों की माला. हवन की उठती लपटें. शंख और डमरू की ध्वनि. ये मंजर था किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी की अघोरी काली उपासना का. मां काली को प्रसन्न करने के लिए किन्नर महामंडलेश्वर भवानी की साधना में मदद के लिए खास तौर पर कामरूप कामाख्या से तमाम साधक पहुंचे थे.

ये तंत्र साधना बेहद खास थी क्योंकि पहली बार कुंभ मेले में किन्नर पीठाधीश्वर इस तरह महाकाली को प्रसन्न करने के लिए अघोरी यज्ञ कर रही थी. साथ ही इतिहास में भी ऐसा पहली बार हो रहा था जब कोई टीवी चैनल यानी आजतक इस अघोरी यज्ञ को कवर कर रहा था.

शक्ति को केंद्रित करने के लिए त्रिभुज के आकार में हवन शाला बनाई गई थी. दसों विद्याओं की देवी का आह्वान किया गया. तलवार पूजा के बाद महाकाली को प्रसन्न करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से कोहडे और नींबू की बलि दी गई. फिर भवानी ने प्रतीकात्मक रूप से फलों से बने मुंड की माला धारण कर ली. ठीक वैसे ही जिस तरह मां काली मुंडों की माला धारण करती हैं.

जब शंख और डमरू की ध्वनि से यज्ञ को जागृत करने की शुरुआत हुई तो वहां मौजूद विदेशी सैलानी इस नजारे को चमत्कृत भाव से देख रही थे. इस यज्ञ में डमरू बजाने वाले खासतौर पर वाराणसी से बुलाए गए थे. करीब पांच घंटे बाद जब यज्ञ संपन्न हुआ, तो माता भवानी ने सबको बारी-बारी से आशीर्वाद दिया.

यज्ञ के बाद किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी की कुटिया में तमाम साधकों का तांता लगा हुआ था. भवानी ने आज तक को बताया कि उनका अघोरी यज्ञ समस्त जगत के कल्याण और किन्नरों के मान-सम्मान के लिए था. साथ ही जिस तरह कुंभ में किन्नर अखाड़े को जगह दी गई, उसके आभार के लिए भी ये यज्ञ था.

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