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कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए स्पुतनिक वी वैक्सीन की एक ही डोज काफी: स्टडी

रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी कोरोना संक्रमण से लड़ने में 94 फीसदी तक कारगर है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड से ठीक हो चुके लोगों को स्पुतनिक वी की दूसरी डोज देने के बाद लाभ पहुंचने के कोई साक्ष्य नहीं है. ऐसे में वैक्सीन की एक ही डोज उन लोगों के लिए पर्याप्त है जो कोरोना से लड़कर ठीक हो चुके हैं.

Sputnik V वैक्सीन हर वेरिएंट के खिलाफ है असरदार (फोटो-PTI) Sputnik V वैक्सीन हर वेरिएंट के खिलाफ है असरदार (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हर वेरिएंट के खिलाफ असरदार है स्पुतनिक वी
  • 94 फीसदी तक असरदार है वैक्सीन की डोज

कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट (Delta variant ) के खिलाफ mRNA वैक्सीन प्रभावी हैं. वैज्ञानिकों की घोषणा के एक दिन बाद ही एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोना (Coronavirus) संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों पर रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी (Sputnik V) की दूसरी डोज का इस्तेमाल करने का कोई स्पष्ट लाभ नहीं है. ऐसे में कोरोना के खिलाफ 94 फीसदी तक असरदार इस वैक्सीन की एक ही डोज उन लोगों के लिए पर्याप्त है, जो कोरोना से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.

हालांकि स्टडी में यह भी बात सामने आई है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक एंटीबॉडी और कोविड संक्रमण को बेअसर करने की क्षमता को और बढ़ाती है. साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि वैक्सीन की पहली खुराक मिलने के 21 दिन बाद 94 फीसदी लोगों ने स्पाइक-स्पेसिफिक एंटीबॉडी विकसित की. अध्ययन अर्जेंटीना में स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया था.

शोधकर्ताओं का कहना है कि स्पुतनिक वी वैक्सीन की सिंगल डोज, ज्यादा बेहतर एंटीबॉडी का स्तर उन लोगों को देती है, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं. यह उनकी तुलना में है जो संक्रमित होने के बाद भी वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं. 

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भारत में भी हो चुकी है स्टडी!

इससे पहले, हैदराबाद के एआईजी अस्पतालों के एक अध्ययन में यह भी दावा किया गया था कि कोविड से ठीक हुए मरीजों के लिए उनकी मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया के कारण टीके की एक खुराक पर्याप्त है. यह अध्ययन 260 स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया था, जिन्हें 16 जनवरी से 5 फरवरी के बीच कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई थी.

डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 90 फीसदी तक प्रभावी स्पुतनिक वी

स्पुतनिक वी के डेवलपर्स ने जून में दावा किया था कि अत्यधिक संक्रामक डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ टीका लगभग 90 प्रतिशत प्रभावी है. आरआईए समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को के गामालेया इंस्टीट्यूट के उप निदेशक डेनिस लोगुनोव ने कहा था कि डेल्टा वेरिएंट पर आकंड़े मेडिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक जुटाए गए थे. गामालेया इंस्टीट्यूट ने ही स्पूतनिक वी वैक्सीन को डेवलेप किया है.

भारत में मंजूरी पाने वाला तीसरा टीका

स्पुतनिक वी वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद भारत में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल होने वाला तीसरा टीका है. वहीं स्पुतनिक लाइट को मई में रूस में इमरजेंसी यूज के लिए 79.4 प्रतिशत तक प्रभावी माना गया था. इसे रूस में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है, भारत में भी इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने की बात चल रही है. 

 

कैसे काम करती है वैक्सीन?

वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन बनाने के लिए SARS-CoV-2 के आनुवंशिक इंस्ट्रक्शन का इस्तेमाल करती है. यह इन्फॉर्मेशन को डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए में स्टोर करता है. वैक्सीन को एडिनोवायरस से विकसित किया गया है. शोधकर्ताओं ने कोविड स्पाइक प्रोटीन के लिए जीन को दो एडिनोवायरस में जोड़ा, उन्हें प्रभावित कोशिकाओं पर अटैक करने के लिए विकसित किया. स्पूतनिक-वी, जॉनसन एंड जॉनसन की ओर से विकसित इबोला के लिए टीका बनाने की प्रक्रिया से प्रेरित है.
 

 

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