scorecardresearch
 

टेस्टिंग पर ICMR के नए नियम, कैसे पता लगेगी कोविड नेगेटिव रिपोर्ट? जानें पहली और दूसरी गाइडलाइन में क्या है फर्क

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर नई जानकारी साझा की हैं. इसके अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का RT-PCR टेस्ट हो चुका है, तो उसे दोबारा ये टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं है. ICMR ने इसके पीछे कई तर्क गिनाए हैं, हालांकि अब ये सवाल भी उठता है कि सरकार द्वारा जारी की गई नई और पुरानी गाइडलाइन्स में क्या अंतर है.

कोरोना टेस्टिंग पर ICMR ने जारी की नई गाइडलाइन्स (फोटो: PTI) कोरोना टेस्टिंग पर ICMR ने जारी की नई गाइडलाइन्स (फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना की दूसरी लहर के बीच नए नियम जारी
  • ICMR ने टेस्टिंग को लेकर जानकारी दी
  • अब दोबारा RT-PCR टेस्ट कराना जरूरी नहीं

कोरोना वायरस की दूसरी लहर से इस वक्त भारत में हाहाकार मचा है. हर रोज़ 3 लाख से ज्यादा नए मामले आ रहे हैं, 3 हजार से ज्यादा मौतें दर्ज की जा रही हैं. चिंता की बात ये है कि कोरोना की इस नई लहर में ग्रामीण इलाकों, युवाओं में भी वायरस का प्रसार हो रहा है. इस सबके बीच मंगलवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना टेस्टिंग को लेकर नई जानकारी साझा की हैं. इसके अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का RT-PCR टेस्ट हो चुका है, तो उसे दोबारा ये टेस्ट कराने की ज़रूरत नहीं है. 

ICMR ने इसके पीछे कई तर्क गिनाए हैं, हालांकि अब ये सवाल भी उठता है कि सरकार द्वारा जारी की गई नई और पुरानी गाइडलाइन्स में क्या अंतर है. कैसे किसी को पता लगेगा कि वो कोरोना निगेटिव है और टेस्टिंग के मामले में अब क्या असर पड़ेगा. ऐसे में ICMR की कोरोना टेस्टिंग को लेकर जारी नई और पुरानी गाइडलाइन्स पर एक नज़र डाल लीजिए... 

टेस्टिंग को लेकर ICMR की नई गाइडलाइन्स (04/05/2021) 
ICMR का कहना है कि भारत इस वक्त कोरोना संकट की नई लहर का सामना कर रहा है, देश में पॉजिटिविटी रेट करीब 20 फीसदी है, ऐसे में लगातार चिंताएं बढ़ रही हैं. देश में कुल 2506 लैब हैं, जो अलग-अलग टेस्ट कर रही हैं अभी देश में औसतन 15 लाख के करीब टेस्ट किए जा रहे हैं. लेकिन बढ़ते मामलों के साथ ही लैब पर दबाव भी बढ़ रहा है, जिनको देखते हुए टेस्टिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं. 

1.    किसी भी व्यक्ति का दोबारा RT-PCR टेस्ट नहीं किया जाना चाहिए, अगर वह एंटीजन या फिर RT-PCR टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है. 

2.    अगर कोई मरीज कोविड से ठीक हो गया है, तो अस्पताल से डिस्चार्ज के वक्त टेस्टिंग की जरूरत नहीं है. (इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन का हवाला दिया गया है, जिसके मुताबिक हल्के गंभीर मरीज को 10 दिन बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है, अगर तीन दिन उसे बुखार नहीं आता है तो. हालांकि, उसे घर पर भी 7 दिन आइसोलेट रहना होगा)

3.    अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है और उसमें किसी तरह के कोविड के लक्षण नहीं हैं, तो एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए RT-PCR टेस्ट की जरूरत नहीं है. इससे लैब पर बोझ कम होगा. 

4.    अगर किसी व्यक्ति में कुछ लक्षण हैं, तो उसे बेवजह इधर-उधर ट्रैवल नहीं करना चाहिए. 

5.    अगर किसी व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं हैं, तो सभी कोविड गाइडलाइन्स का पालन करते हुए ट्रैवल करना चाहिए.

6.    राज्य सरकारों को मोबाइल लैब टेस्टिंग पर जोर देना चाहिए.


रैपिड एंटीजन टेस्ट का उपयोग...
ICMR ने जून 2020 में एंटीजन टेस्ट का उपयोग करने को कहा था, ताकि कंटेनमेंट जोन या अन्य इलाकों में जल्द से जल्द संक्रमण का पता लग सके. इस टेस्ट के जरिए 15-20 मिनट में रिजल्ट सामने आता है. अभी तक ICMR ने 10 ऐसे टेस्ट को मंजूरी दी है, जो मोबाइल टेस्टिंग से जुड़े हैं. 

•    सभी सरकारी, प्राइवेट हेल्थकेयर पर एंटीजन टेस्ट को मंजूरी मिलनी चाहिए.
•    शहर, गांव, कस्बे में इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोग टेस्ट करवा पाएं. 
•    स्कूल, कॉलेज, RWA, कम्युनिटी सेंटर्स में इनकी सुविधा की जानी चाहिए, जो 24 घंटे काम कर सकेंगे. 

कुछ अन्य जरूरी गाइडलाइन्स..
•    सभी राज्यों को RT-PCR टेस्टिंग को बढ़ावा देना चाहिए. 
•    अगर कोई एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव आता है, तो उसका दोबारा कोई टेस्ट नहीं होना चाहिए और होम आइसोलेशन में रहना चाहिए. 
•    अगर एंटीजन टेस्ट में नेगेटिव आता है, तो RT-PCR टेस्टिंग होनी चाहिए, लेकिन व्यक्ति होम आइसोलेशन में रहना चाहिए. 
•    अगर किसी व्यक्ति को बुखार है या नहीं है, और खांसी, सिरदर्द, शरीर में दर्द, गले में दर्द, टेस्ट और सुगंध का खोना जैसे लक्षण होते हैं, तो उसे कोविड मरीज की तरह ट्रीट करना चाहिए.

कोई कैसे पता लगाएगा कि वो कोविड नेगेटिव है?
ICMR की नई गाडइलाइन्स के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कोई कैसे पता लगाएगा कि कोई कोविड नेगेटिव हुआ है. क्योंकि ICMR की नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं हैं और वह स्वस्थ हो चुका है तो उसे अस्पताल से डिस्चार्ज होते वक्त टेस्ट की जरूरत नहीं हैं. ये तर्क इसलिए दिया गया है ताकि लैब पर कम बोझ पड़े. हालांकि, कोई व्यक्ति टेस्ट करा सकता है, गाइडलाइन्स में कोशिश ये की गई है कि एक व्यक्ति बार-बार टेस्ट ना करवाए.

कोरोना की दूसरी लहर में जिस तरह ICMR ने गाइडलाइन्स जारी की हैं, उसी तरह पहली लहर में भी गाइडलाइन्स को जारी किया था, तब देश में कोविड नया था और इसी के आधार पर सभी टेस्टिंग हो रही थी. 


ICMR की पुरानी गाइडलाइन्स (04/09/2020)
•    टेस्टिंग को लेकर पहली गाइडलाइन में ICMR ने कई नियम जारी किए थे, जिसमें कहा गया था कि अगर किसी भी व्यक्ति में कोई लक्षण पाए जाते हैं, तो उसका एंटीजन या RT-PCR टेस्ट किए जाए. इसमें सभी स्वास्थ्यकर्मी, आम लोग शामिल हैं. साथ ही अगर कोई कोविड पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आया है, तो उसे भी टेस्टिंग की सलाह दी गई थी. साथ ही अगर कोई इलाका कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, तो वहां सभी की टेस्टिंग होनी जरूरी है. 

•    कोविड की पहली लहर के दौरान क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सेवाएं चालू थीं, ऐसे में बाहर से आने वाले सभी लोगों का टेस्ट, उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों का टेस्ट अनिवार्य था. 

•    टेस्टिंग के नियमों के अनुसार, ICMR का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी टेस्ट में पॉजिटिव आता है, तो वह पॉजिटिव ही माना जाए किसी दूसरे टेस्ट की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर एंटीजन में नेगेटिव होने के बाद कोई लक्षण आते हैं, तो उसका RT-PCR टेस्ट होना जरूरी है.  

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें