देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस केस बढ़ते जा रहे हैं. इस बीच, स्कूल खोलने की तैयारी ने अभिभावकों और टीचर्स की चिंता बढ़ा दी है. अब दिल्ली की गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार से इस वर्ष को जीरो अकेडमिक ईयर घोषित करने की मांग की है.
एसोसिएशन की मांग है कि जब सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि दिल्ली में केसों की संख्या का अभी और बढ़ना बाकी है तो ऐसे में स्कूल दोबारा खोलने की बात सोचना सही नहीं है. एसोसिएशन के महासचिव अजयवीर यादव ने दिल्ली में स्कूल खुलने पर बच्चों और टीचर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है.
यादव ने कहा, 'स्कूल खोलने पर इज़राइल में जो हुआ है उसे नहीं भूलना चाहिए. हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस शैक्षणिक वर्ष को जीरो एकेडमिक ईयर घोषित किया जाना चाहिए. यहां तक कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद कोरोना जैसे लक्षण दिखने की वजह से आइसोलेशन में हैं. ऐसे हालात में कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि अगर स्कूल खुले तो क्या होगा?'
यादव ने आगे कहा, '100 से अधिक टीचर्स अब तक कोरोना से संक्रमित हैं. चार की मृत्यु हो चुकी है. हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब तक इस महामारी का असर कम नहीं हो जाता तब तक स्कूल नहीं खुलेंगे.'
अभिभावक संघ ने की इस साल को जीरो अकेडमिक ईयर घोषित करने की मांग
दिल्ली के अभिभावक भी स्कूल खोलने की संभावनाओं को लेकर बहुत चिंतित हैं. अधिकतर अभिभावक संघ यह भी मांग कर रहे हैं कि स्कूलों को फिलहाल नहीं खोला जाना चाहिए और जीरो ईयर घोषित करना चाहिए.
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12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के पिता रोहित हांडा भी बहुत चिंतित हैं. उनका कहना है कि अगर स्कूल खुलता है तो ये कौन गारंटी देगा कि बच्चों को संक्रमण नहीं होगा. हांडा ने कहा, 'मुझे चिंता है कि जब मेरी बेटी परीक्षाओं के लिए स्कूल जाएगी, तो वहां कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए क्या व्यवस्था होगी? जब मैं हर दिन दिल्ली में रिकॉर्ड नए आंकड़े देखता हूं , तो मुझे अपनी बेटी के बारे में चिंता होती है, इसके मायने नहीं कि सरकार क्या फैसला लेती है. इसलिए इस एक साल को शून्य घोषित करें, क्योंकि जीवन से बड़ा कुछ भी नहीं है.'
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इसी तरह, नोएडा में रहने वाले कुणाल निश्चल भी अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं. उनके बच्चे एक प्राइवेट प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं. निश्चल ने कहा, 'भले ही दिल्ली सरकार सभी स्कूलों को खोलने का आदेश दे, लेकिन मैं अपने बच्चे को मौजूदा स्थिति में स्कूल नहीं भेजूंगा. सरकार खुद मानती है कि बच्चे और बुजुर्ग इस महामारी को लेकर सबसे संवेदनशील हैं, इसलिए फिलहाल, स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए. सच है, बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, लेकिन जीवन से ज्यादा कुछ नहीं है.'
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दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट अपराजिता ने भी इसी तरह के विचार साझा किए. उन्होंने कहा, 'जब हम मौजूदा स्थिति में स्कूलों को खोलने के बारे में बात करते हैं तो यह अपने बच्चों को सुसाइड मिशन पर भेजने जैसा है. हम पैरेंट्स एसोसिएशन के नाते मांग करते हैं कि अभी स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए. हालांकि बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपवाद हो सकता है लेकिन वो भी पूरी सावधानी के साथ.
असल में, माता-पिता चिंतित हैं कि दिल्ली में जिस तरह से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं और 100 से अधिक टीचर्स, जो स्कूलों में राशन बांटने की ड्यूटी में लगे थे, वो कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, ऐसी स्थिति में बच्चों को स्कूल भेजना संभव नहीं है.