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...जब आजतक संवाददाता ने लिया कोरोना वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा, पढ़ें- कैसा रहा अनुभव

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है. इसी ट्रायल में हिस्सा लिया था आजतक-इंडिया टुडे के संवाददाता कुमार अभिषेक ने. उन्होंने ट्रायल के अपने अनुभव साझा किए हैं.

Covaxin की ट्रायल में हिस्सा लेते आजतक संवाददाता कुमार अभिषेक Covaxin की ट्रायल में हिस्सा लेते आजतक संवाददाता कुमार अभिषेक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानपुर के प्रखर अस्पताल में वैक्सीन का ट्रायल
  • आजतक संवाददाता ने लिया ट्रायल में हिस्सा

उत्तर प्रदेश में आज कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन शुरू हो रहा है. इस ड्राई रन के दौरान पूरे प्रदेश के वैक्सीन सेंटर्स पर टीका लगाने का अभ्यास किया जाएगा. इससे पहले प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है. इसी ट्रायल में हिस्सा लिया आजतक-इंडिया टुडे के संवाददाता कुमार अभिषेक ने. उन्होंने ट्रायल के अपने अनुभव साझा किए हैं, पढ़ें- 

मेरे लिए एक अनुभव कई मायनों में अलग था, कुछ संशय, कुछ डर और कुछ उत्साह भी. मुझे जानकारी थी कि उत्तर प्रदेश के कुछ अस्पतालों में कोरोना के वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो चुका है, जिसमें लखनऊ के पीजीआई और कानपुर का एक प्राइवेट हॉस्पिटल प्रखर अस्पताल और अलीगढ़ का एएमयू मेडिकल कॉलेज था.

कानपुर के ही जीसवीएम मेडिकल कॉलेज में रूसी कोरोना के टीका स्पूतनिक 5 का ट्रायल शुरू होने वाला था. कोरोना के बेहद बुरे दिनों में रिपोर्टिंग के दौरान मैंने लोगों में इस बीमारी का ख़ौफ़ महसूस किया है, बावजूद इसके कोरोना के टीके के ट्रायल के लिए बहुत ज्यादा लोग सामने नहीं आ रहे थे, टीके के ट्रायल के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों की तादाद बेहद ही कम थी.

यह नवंबर का महीना था, जब ये खबर मिली कि कानपुर के दो अस्पतालों में कोरोना के टीको के दूसरे और तीसरे फेज़ का ट्रायल शुरू होने वाला है. मैंने फैसला लिया कि मैं खुद भी इस ट्रायल का हिस्सा बनूंगा. यह वही कानपुर है जहां मैंने अपने युवा सहयोगी नीलांशु शुक्ला को कुछ महीने पहले कोरोना से खोया था.

भारत बायोटेक के देसी वैक्सीन COVAXIN के थर्ड फेज का ट्रायल कानपुर के प्रखर अस्पताल में चल रहा था, मैंने नवंबर में ही में प्रखर अस्पताल के संचालक राजेश कुशवाहा से बात की कि क्या मैं खुद इस टीके के ट्रायल में हिस्सा ले सकता हूं? चूंकि प्रखर अस्पताल में डॉक्टर कुशवाहा खुद ही भारत बायोटेक के इस टीके के ट्रायल का जिम्मा संभाल रहे थे, उन्होंने सहमति दे दी. उन्होंने पूछा कि क्या आप मानसिक तौर पर पूरी तरीके से टीके के लिए तैयार हैं. मैंने कहा बिल्कुल तैयार हूं हालांकि कई संशय डॉक्टर कुशवाहा ने अपनी बातचीत में खत्म कर दी थी मसलन टीके के साथ आने वाली परेशानियों को उन्होंने तफ्सील से बताया.

वह दिन 11 दिसंबर का था, जब मैं टीके के ट्रायल के लिए कानपुर पहुंचा, डॉक्टर कुशवाहा जो कि प्रखर अस्पताल में टीके के ट्रायल देख रहे थे, उन्होंने मुझे टीके से पहले बातचीत में बिल्कुल सामान्य कर दिया और सभी तरह के सवाल पूछने को कहा जो मन में उठ रहे थे. पहले और दूसरे फेस का ट्रायल यहां हो चुका था और अब तीसरे फेज़ का ट्रायल चल रहा था. 

उस वक्त दुनिया बेसब्री से कोरोना वैक्सीन की मंजूरी का इंतजार कर रही थी. कुछ देशों ने वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दे दी थी, लेकिन भारत में इसपर फिलहाल मंथन चल रहा था।

जानिए कैसे हुआ ये ट्रायल-
सबसे पहले इस वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए वॉलंटियर के तौर पर खुद को एनरोल करना होता है- और फिर कई तरह के टेस्ट से गुजरना होता है. वैक्सीन के पहले ही डॉक्टर ने बता दिया था कि आपको ट्रायल के पहले पूरी तरीके से स्वस्थ होना जरूरी है- यानी ब्लड प्रेशर, शुगर बिल्कुल नियंत्रण में होना चाहिए, जबकि हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसी बीमारियां नहीं होनी चाहिए.

हालांकि यह तमाम जरूरी टेस्ट मैंने पहले ही करवा रखे थे, लेकिन अस्पताल के अपने प्रोटोकॉल थे और खासकर टीके के पहले तो सभी तरह के टेस्ट जरूरी थे- जब मैं प्रखर अस्पताल के चौथे तल्ले पर पहुंचा तो यह पूरा फ्लोर वैक्सीन ट्रायल को समर्पित था, एक कमरा ट्रायल के पहले जरूरी जानकारी देने के लिए था, जहां खुद को कई सवालों के जवाब के साथ इनरोल करना होता था, जबकि दूसरे कमरे में जरूरी ब्लड टेस्ट लिए जा रहे थे, तीसरे कमरे में वह फ्रिज रखा था जिसमें ट्रायल के लिए कोवैक्सीन के कई डोज रखे गए थे.

इनरोल करने के बाद हमारे ब्लड टेस्ट शुरू हुए सबसे पहले जरूरी ब्लड टेस्ट लिए गए और फिर इसी अस्पताल के एक कमरे में कोरोना के आरटी पीसीआर टेस्ट के लिए ले जाया गया. इसके बाद कुछ घंटों का इंतजार था क्योंकि सभी ब्लड टेस्ट और कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट आनी थी. कुछ घंटों बाद जैसे ही सभी टेस्ट के रिपोर्ट आए उसके बाद मुझे वैक्सीन देने की तैयारी की गई.

वैक्सीन की बिल्कुल भी एक छोटी सी शीशी मुझे दिखाई दी जिसमें कोवैक्सीन का एक डोज़ था. डॉक्टर से सहमति के बाद मैंने वैक्सीन की वो शीशी देखी, और फिर रिसर्चर के एक पूरे समूह ने मुझे वैक्सिंग के ऐन पहले इसके जरूरी एहतियातों के बारे में बताया- इसमें बताया गया कि अगर आप को फीवर आता है या फिर मुंह के भीतर स्लाइवा कुछ कम लगता है तो बिल्कुल ना घबराए क्योंकि वैक्सीन के बाद यह हल्के-फुल्के लक्षण आप में आ सकते हैं.

साथ ही मुझे प्लेसिबो के बारे में भी बताया गया यानी वैक्सीन के साथ-साथ प्लेसिबो वह प्रक्रिया है जब वैक्सीन की जगह सिर्फ पानी आपकी शरीर में डाला जाता है ताकि उसके डाटा को भी देखा जा सके कि कहीं सिर्फ एहसास भर से एंटीबॉडी तो तैयार नहीं हो रही.

वैक्सीन के पहले और दूसरे फेस के ट्रायल में 0-14 तय किये गए थे यानि अगर पहले दिन वैक्सीन लगा तो 14वें दिन दूसरा डोज लगेगा, लेकिन तीसरे फेज में यह ट्रायल 0-28 का था यानी पहले दिन अगर अपने टीका लिया तो दूसरा डोज 28 में दिन लगेगा. मुझे वहां कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने पहले और दूसरे चरण में टीका लगवाया था और सब की कोरोनावायरस के खिलाफ अच्छी एंटीबॉडी बनी थी.

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मैंने जो खुद पर टीका लिया तो यह बेहद सामान्य एक टीके जैसा था यानी टीके का जो प्रोसेस था वह बिल्कुल सामान्य था. डॉक्टर कुशवाहा ने खुद मुझे यह टीका लगाया और कहां अब आप कोरोनावायरस से वैक्सीनेट हो गए. टीका लगने के बाद करीब 2 घंटे तक हम उनके अस्पताल में रहे, जहां कई बार ब्लड प्रेशर चेक किया गया, उसे नोट किया गया और यह बताया गया कि अगर फीवर आये तो आप एक पेरासिटामोल खाएंगे.

न तो मुझे कोई बुखार आया, ना ही किसी तरह का कोई लक्षण. यह मैंने कई और दूसरे ऐसे वालंटियर से भी पूछा तो पता चला है कि ज्यादातर लोगों में को वैक्सीन का कोई आफ्टर इफेक्ट नहीं दिखाई दिया और सब कुछ बिल्कुल सामान्य सा था. 8 जनवरी को मुझे दूसरा डोज़ लगाने की तारीख तय किया गया है और तब जाकर वैक्सीन किए पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.

डॉक्टर के मुताबिक, दूसरे डोज के 15 दिन यानी दो हफ्तों के बाद जो एंटीबॉडी तैयार होगी वह लंबे समय तक या फिर यूं कहें लंबे समय तक कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए आपकी शरीर को सुरक्षा प्रदान करेगी. अब मुझे दूसरे डोज़ का इंतजार है और उम्मीद करता हूं या वैक्सीन आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए सबसे कारगर सुरक्षा चक्र साबित होगा.
 

 

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