देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई हॉटस्पॉट भी चिन्हित किए गए हैं. वहीं बिहार के 4 जिले कोविड-19 के हॉटस्पॉट्स बन चुके हैं. अब यहां पर राज्य सरकार ने पल्स पोलियो ड्राइव की तर्ज पर 'डोर-टू-डोर कोविड-19 टेस्टिंग' की शुरुआत की है.
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बिहार के 4 जिले सिवान, बेगूसराय, नालंदा और नवादा हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए गए हैं. यहां पिछले कुछ दिनों में कोविड-19 के काफी मामले सामने आए हैं. जिसकी वजह से यह सभी जिले अब हॉटस्पॉट्स बन चुके हैं. विपक्ष ने भी आरोप लगाया है कि बिहार में टेस्टिंग की रफ्तार काफी धीमी है. जिसकी वजह से कोविड-19 के मामले ज्यादा सामने नहीं आ रहे हैं. जिसके बाद अब राज्य सरकार ने डोर-टू-डोर टेस्टिंग की शुरुआत की है.
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राज्य सरकार ने टेस्टिंग की जो प्रक्रिया अपनाई है, उसके तहत जिस किसी इलाके में कोविड-19 का पॉजिटिव मामला सामने आया है, उस इलाके को एपीसेंटर मानते हुए उसके 3 किलोमीटर इर्द-गिर्द क्षेत्र के सभी घरों की डोर-टू-डोर टेस्टिंग की जाएगी.
टेस्टिंग के दौरान अगर किसी भी व्यक्ति में कोविड-19 के लक्षण पाए जाते हैं तो उसकी तुरंत जांच होगी और क्वारनटीन किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य सरकार ने डोर-टू-डोर टेस्टिंग के लिए 10 हजार टीमें बनाई है. पहले चरण में 4 जिलों में इसकी शुरुआत की गई है, जिसके तहत प्रदेश की 16 फीसदी आबादी की जांच की जाएगी.
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डोर-टू-डोर टेस्टिंग के दौरान जांच टीमें वैसे लोगों की भी जांच करेगी, जो 18 मार्च से लेकर 23 मार्च के बीच में विदेश से वापस लौटे हैं. जिलाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा ने कहा, 'बेगूसराय जिले में पल्स पोलियो की 1295 टीमें है और कोविड-19 की डोर-टू-डोर टेस्टिंग करने के लिए इन लोगों को ट्रेनिंग दी गई है. इन लोगों ने जांच की शुरुआत भी कर दी है. बेगूसराय में कुल 6 लाख घर है और हमारा लक्ष्य है कि अगले 5 दिनों में इन सभी घरों में पहले चरण की जांच कर ली जाएगी.'