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कोरोना वैक्सीन पर लेटर वॉर, शॉर्टेज को लेकर आरोप के बाद केंद्र ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब को घेरा

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत अन्य कुछ राज्यों ने वैक्सीन की कमी की बात कही, तो अब केंद्र सरकार की ओर से कुछ राज्यों को वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार को लेकर चिट्ठी लिख दी गई है. केंद्र ने पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र को चिट्ठी लिख राष्ट्रीय औसत से भी पीछे चलने की बात कही है. 

दिल्ली में एक वैक्सीनेशन सेंटर पर लगी कतार (फोटो: PTI) दिल्ली में एक वैक्सीनेशन सेंटर पर लगी कतार (फोटो: PTI)
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • केंद्र और राज्यों में वैक्सीनेशन पर जंग
  • महाराष्ट्र, दिल्ली और पंजाब को केंद्र की चिट्ठी
  • वैक्सीन के इस्तेमाल ना होने पर सवाल उठाए

देश में एक तरफ कोरोना के मामलों का ग्राफ तेज़ी से बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकारों में वैक्सीनेशन को लेकर जंग तेज़ हो गई है. महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत अन्य कुछ राज्यों ने वैक्सीन की कमी की बात कही, तो अब केंद्र सरकार की ओर से कुछ राज्यों को वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार को लेकर चिट्ठी लिख दी गई है. केंद्र ने पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र को चिट्ठी लिख राष्ट्रीय औसत से भी पीछे चलने की बात कही है. 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मनोहर अगनानी ने पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखी है, जिसमें वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए हैं.

महाराष्ट्र को लिखी चिट्ठी में मनोहर अगनानी ने कहा है कि महाराष्ट्र को अबतक 1,06,19,190 वैक्सीन की डोज़ दी गई हैं, लेकिन अभी तक 90,53,523 का इस्तेमाल हुआ है जिसमें वेस्टेज़ भी शामिल है. महाराष्ट्र में पहली डोज़ 85.95 फीसदी हेल्थकेयर वर्कर्स को लगी है, जबकि दूसरी डोज़ सिर्फ 41 फीसदी को लगी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 51 फीसदी से अधिक है. 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे सुधारने को कहा है. फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी वैक्सीन की दूसरी डोज़ देने में महाराष्ट्र राष्ट्रीय औसत से पीछे है. 

दिल्ली और पंजाब भी राष्ट्रीय औसत से पीछे
महाराष्ट्र की तरह ही दिल्ली को लेकर कहा गया है कि अभी तक 23,70,710 डोज़ दी गई हैं, जिनमें से 18,70,662 का इस्तेमाल हुआ है और इनमें वेस्टेज़ भी शामिल है. दिल्ली हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली और दूसरी डोज़ देने के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है. अगर पंजाब की बात करें तो यहां अभी तक 22,36,770 भेजी गई हैं, जबकि सिर्फ 14,94,663 का इस्तेमाल हुआ है. 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि राज्यों को अपने यहां वैक्सीनेशन की रफ्तार को बढ़ाना होगा, हेल्थवर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर को वैक्सीन देने की सख्त जरूरत है क्योंकि कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ये लड़ाई में सबसे आगे हैं. 

आपको बता दें कि ये चिट्ठी तब लिखी गई है, जब महाराष्ट्र समेत अन्य कुछ राज्यों ने केंद्र पर वैक्सीन की सप्लाई धीमी करने का आरोप लगाया था. महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश का कहना है कि उनके पास वैक्सीन की कमी है और एक-दो दिन का ही स्टॉक बचा है. हालांकि, केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा था कि किसी भी राज्य के पास वैक्सीन की कमी नहीं है, ये अपनी कमियों को छुपाने के लिए ऐसी बात की जा रही है. 

अगर देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार की बात करें तो अभी तक कुल 9 करोड़ से अधिक डोज़ दी जा चुकी हैं. इनमें 7.87 करोड़ पहली डोज़, 1.14 करोड़ दूसरी डोज़ शामिल हैं. वैक्सीन लगाने के मामले में महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी, राजस्थान सबसे आगे हैं.

 

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