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जब तक 70-80% लोगों में एंटीबॉडी नहीं होगी, कोरोना वायरस फैलता रहेगा: डॉ. स्वामीनाथन

बिजनेस टुडे से एक खास बातचीत में सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, ''हालांकि यह एक मुश्किल काम नजर आता है लेकिन खसरा, जो एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, के मामले में इम्युनिटी की सीमा 95 प्रतिशत से अधिक है.''

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन डॉ. सौम्या स्वामीनाथन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिजनेस टुडे से डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने की खास बातचीत
  • कहा- देखना होगा लोगों को बूस्टर डोज की जरूरत है या नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए कम से कम 70 फीसदी आबादी में एंटी-बॉडी विकसित करनी होगी. बिजनेस टुडे से एक खास बातचीत में सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, ''हालांकि यह एक मुश्किल काम नजर आता है लेकिन खसरा, जो एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, के मामले में इम्युनिटी की सीमा 95 प्रतिशत से अधिक है.''

उन्होंने आगे कहा, ''कोविड-19 महामारी ने दुनिया को तबाह कर दिया है.  बड़ी उम्मीद यह थी कि अधिक लोग वायरस से संक्रमित हो जाएंगे, यह समूह हर्ड इम्युनिटी का निर्माण करेगा, जो आबादी में एक निश्चित स्तर के एंटीबॉडी को हासिल करेगा.''

उन्होंने कहा कि जब तक 70-80 प्रतिशत लोगों के शरीर में एंटीबॉडी नहीं होगी, तब तक वायरस एक से दूसरे शख्स में फैलता रहेगा. डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि मौजूदा मेडिकल स्टडीज में कहा गया कि इस वायरस के खिलाफ इम्युनिटी 8 महीने तक रहती है. कुछ वैक्सीन बनाने वालों का दावा है कि उनकी वैक्सीन से इम्युनिटी कई वर्षों तक रहती है. यह मुमकिन है लेकिन हमें यह देखना होगा कि लोगों को बूस्टर डोज की जरूरत है या नहीं. 

उन्होंने कहा कि दुनिया इम्युनिटी की ओर बढ़ रही है. कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का उभरना चिंताजनक है. यह पुराने से भी घातक वायरस है. डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, 'हमें इस बात को लेकर निगरानी रखनी होगी कि वायरस क्या कर रहा है. क्या वह इन एंटीबॉडीज से दूर भागना सीख रहा है? इसलिए वैक्सीन की दूसरी पीढ़ी में निवेश करना जरूरी है, जो विभिन्न प्रोटीन्स को टारगेट कर रही हैं. इसी पर हम काम कर रहे हैं.'

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बता दें भारत सहित पूरी दुनिया में टीकाकरण को लेकर तैयारियां चल रही हैं. भारत 16 जनवरी से नागरिकों को टीका लगाने का कार्यक्रम शुरू करेगा. करीब 41 देशों में 24 मिलियन से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की पहली डोज भी लग चुकी है. इनमें से अधिकतर लोग अमेरिका, चीन, यूरोप और मध्य पूर्व से हैं. 

डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, ''यकीनन ऐसे कुछ लोग होंगे, जो टीकाकरण का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के अधिकतर हिस्सों में लोगों का वैक्सीन को लेकर सकारात्मक रवैया है. ज्यादा आय वाले देशों में आपको विरोध देखने को मिलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि विकसित देशों ने कभी ऐसे संक्रामक बीमारियों का सामना नहीं किया, जिन्हें टीकाकरण से ठीक किया जा सके.'' 

(बिजनेस टुडे के लिए अनूप जयराम की रिपोर्ट)

 

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