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जिन देशों में ज्यादा वैक्सीन लगी है, क्या वहां कोरोना काबू में है?

वैक्सीनेशन को हेल्थ एक्सपर्ट कोरोना के खिलाफ बड़ा हथियार मान रहे हैं. ब्रिटेन जैसे कई देशों में फिर लहर तेज हो रही है. आइए जानते हैं जिन देशों में ज्यादा वैक्सीनेशन हुआ है वहां कोरोना की लहर थम रही है या बढ़ रही है.

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भारत में भी जारी है वैक्सीनेशन (फोटो: PTI) भारत में भी जारी है वैक्सीनेशन (फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कहीं थम रही कोरोना की लहर, कहीं तेज हो रही
  • ब्रिटेन में नई लहर के चलते अनलॉक का फैसला टला
  • वैक्सीनेशन में कई देश बाकी दुनिया से काफी आगे

कोरोना की एक लहर थम नहीं रही कि दुनिया को दहलाने के लिए दूसरी लहर शुरू हो जा रही है. इसके अलावा वायरस के रोज नए वैरिएंट्स, म्यूटेशन, स्ट्रेन से जूझ रही दुनिया को अब वैक्सीन से ही बड़ी उम्मीदें हैं. इसके लिए हर देश लाखों-करोड़ों खर्च कर रहे हैं ताकि अपनी अधिकांश आबादी को जल्द से जल्द वैक्सीनेट कर सकें.

ब्रिटेन में दिसंबर 2020 में 91 वर्षीय महिला के वैक्सीनेशन के साथ अभियान शुरू हुआ था. तब से अबतक 7 महीने का वक्त बीत चुका है. 100 से अधिक वैक्सीन दुनियाभर में कंपनियां बना रही हैं. मॉडर्ना, फाइजर, एस्ट्रेजेनका समेत कई वैक्सीन लोगों को लग रही है. दुनियाभर में इन 7 महीनों में 2 अरब 30 करोड़ के करीब वैक्सीन की डोज लोगों को लगाई जा चुकी है. भारत में भी अबतक 25 करोड़ से अधिक डोज लोगों को लगाई जा चुकी है. कई देश ऐसे हैं जिन्होंने अपनी अधिकांश आबादी को वैक्सीन लगा दी है. लेकिन फिर से कई देशों में कोरोना की लहर बढ़ने लगी है. ब्रिटेन समेत कई देशों में प्रतिबंधों का दौर फिर से शुरू होने लगा है. तीसरी लहर को लेकर एक्सपर्ट लगातार चेतावनी दे रहे हैं. आइए जानते हैं कि जिन देशों में वैक्सीनेशन ज्यादा हुआ है वहां कोरोना के क्या हालात हैं?

किन देशों में लगी है सबसे ज्यादा वैक्सीन?
डोज के हिसाब से देखा जाए तो कोरोना की जन्मभूमि चीन में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन अब तक हुआ है. वहां के लोगों को अबतक 90 करोड़ वैक्सीन डोज लग चुकी है. उसके बाद अमेरिका का स्थान है जहां 31 करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी है. देश की आबादी के 44 फीसदी हिस्से को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा चुकी है. इजरायल में 57 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. ब्रिटेन में 45 फीसदी आबादी यानी 3 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. जबकि देश में कुल वैक्सीन डोज 7.17 करोड़ लगाई जा चुकी है. पड़ोसी देश फ्रांस में वैक्सीन की कुल 4.43 करोड़ डोज लगाई जा चुकी है. 1.44 करोड़ लोगों को दोनों डोज लग चुकी है जो कि कुल आबादी का 21.4% है.

रूस जिसकी स्पुतनिक वैक्सीन को लेकर पूरी दुनिया में उत्साह है वहां अबतक 3.29 वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है. कुल आबादी के 9.9 फीसदी यानी 1.43 करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा चुकी है. सेशेल्स अपनी 68% आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लगा चुका है. अरब देश बहरीन में 53 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. कतर में 43 फीसदी. सिंगापुर में 33 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा चुकी है.

भारत में 25 करोड़ डोज लग चुकी है. लेकिन आबादी के लिहाज से ये काफी कम है. 4.72 करोड़ लोगों यानी कुल आबादी के 3.5% लोगों को ही दोनों डोज लगी है. वहीं ब्राजील में 7.17 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है. 2.37 करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है जो कि कुल आबादी का सिर्फ 11.2% है.

क्या है इन देशों में कोरोना का हाल?
दुनिया में कोरोना की ये लहर थमती हुई दिख तो रही है लेकिन हर जगह एक जैसा हाल नहीं है. अभी भी दुनिया में 3 लाख से ऊपर नए केस रोज आ रहे हैं. इसी तरह दुनिया में 6 हजार से अधिक मौतें भी रोज हो रही हैं. अमेरिका जहां वैक्सीनेशन का काम सबसे तेजी से चल रहा वहां रोज के औसत केस 7 हजार से ऊपर हैं. अमेरिका में 1 जून से 2 लाख के करीब नए केस आ चुके हैं और 5 हजार मौतें हो चुकी हैं. पोस्ट-कोविड कंप्लीकेशन और लॉन्ग कोविड के मामलों के बीच 52 लाख से अधिक एक्टिव केस अभी भी अमेरिका में हैं.

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सबसे ताजा खतरा ब्रिटेन में दिख रहा है  
ब्रिटेन में अभी भी 1 लाख 55 हजार एक्टिव मरीज हैं. 1 जून से वहां कोरोना की लहर तेज होती जा रही है. एक जून को जहां 3 हजार के करीब नए केस आए थे आज 7 हजार से ऊपर रोज नए केस आ रहे हैं. ब्रिटेन की कोरोना की इस नई लहर के पीछे डेल्टा वैरिएंट को कारण माना जा रहा है. हालात को देखते हुए ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने अनलॉक के फैसलों को फिलहाल 4 हफ्ते के लिए और टाल दिया है. सामान्य होती ब्रिटिशर्स की लाइफ अचानक से फिर पाबंदियों के साए में आ गई है.

ब्रिटेन के पड़ोसी देश फ्रांस की बात करें तो वहां भी पिछले 15 दिन में एक लाख से अधिक नए मरीज सामने आए हैं. एक लाख 30 हजार से अधिक एक्टिव केस हैं. औसतन 70 लोगों की रोजाना जान जा रही है.

दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन कर चुके इजरायल को अगर देखा जाए तो वहां भले ही मास्क पहनने से लोगों को छूट दे दी गई हो लेकिन कोरोना जीरो लेवल पर अभी भी नहीं पहुंचा है. रोजाना 200 से 300 मरीज अभी भी सामने आ रहे हैं. हालांकि, 1 जून से सिर्फ 17 लोगों की कोरोना से जान गई है जबकि एक्टिव केस भी 300 से नीचे हैं.

अपने करोड़ों लोगों को वैक्सीनेट करने वाले और स्पुतनिक वैक्सीन दुनियाभर में भेजने वाले रूस में हाल में कोरोना के केस तेजी से बढ़े हैं. पिछले एक हफ्ते में करीब 1 लाख नए मरीज सामने आए हैं. पिछले 4 दिन से औसतन 14 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं. एक्टिव केस 3 लाख के करीब पहुंच गए हैं. एक हफ्ते में ढाई हजार लोगों की जान गई है.

वहीं, हिंद महासागर का छोटा सा देश सेशेल्स अपनी 68% आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लगा चुका है. लेकिन वहां कोरोना की ताजा लहर मुसीबत बनकर आई है. 15 दिन में 2 हजार नए मरीज सामने आए हैं. 8 लोगों की जान गई है. अधिकांश आबादी को चीनी वैक्सीन लगवा चुके अरब देश बहरीन में भी पिछले 15 दिन में 20 हजार के करीब नए केस सामने आए हैं जबकि ढाई सौ लोगों की जान जा चुकी है. कतर में इन दौरान ढाई हजार नए मरीज सामने आए हैं. जबकि 19 लोगों की मौत हुई है. हाल में कोरोना की लहर से जूझ रहे सिंगापुर में नए केस 100 से नीचे बने हुए हैं जबकि एक्टिव केस भी तेजी से कंट्रोल हुए हैं.

इसी तरह चीन की बात करें तो वहां 90 करोड़ वैक्सीन डोज लोगों को लग चुकी है लेकिन पिछले कुछ दिनों में कई इलाकों में कोरोना के नए केस सामने आए हैं. 14 जून को शिनजियांग समेत कई प्रांतों में 20 से अधिक नए मरीज सामने आए. इसके अलावा Guangzhou शहर में लगातार आ रहे केस के पीछे डेल्टा वैरिएंट को जिम्मेदार मानते हुए प्रशासन कड़े प्रतिबंध लगा चुका है. विदेश से आने वाले लोगों पर रोक लगा दी गई है. प्रभावित इलाकों में 1 लाख 80 हजार लोगों की टेस्टिंग कराई गई है और यहां हजारों लोगों को क्वारनटीन कर दिया गया है.

वहीं पाकिस्तान में 1 हजार के करीब कोरोना केस रोज आ रहे हैं. अभी भी 40 हजार से अधिक एक्टिव केस पाकिस्तान में हैं. वहां सिंध के कई इलाकों में कोरोना की चौथी लहर का कहर है और मामले फिर से बढ़ते दिख रहे हैं. वैक्सीन के लिए चीन पर निर्भर पाकिस्तान की सिर्फ 1 फीसदी आबादी को दोनों डोज लगाई जा सकी है. कई शहरों में शॉर्टेज के कारण वैक्सीनेशन सेंटर बंद हो चुके हैं. 

 

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