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BJP सरकारों में फ्री है यात्रा तो गुजरात से UP आए मजदूरों से किसने लिया पैसा?

महाराष्ट्र और गुजरात से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला शुरू हो गई है, लेकिन बवाल रेल टिकट पर मचा है. मजदूरों से रेल टिकट के बदले पैसा लिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मजदूरों से पैसा किसने लिया?

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लखनऊ पहुंचे पवासी मजदूर (फाइल फोटो-PTI)
लखनऊ पहुंचे पवासी मजदूर (फाइल फोटो-PTI)

  • वडोदरा से लखनऊ आए प्रवासी मजदूर
  • बोले- हमसे लिया गया 500-500 रुपया

महाराष्ट्र और गुजरात से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला शुरू हो गई है, लेकिन बवाल रेल टिकट पर मचा है. केंद्र सरकार ने दावा किया है कि मजदूरों से पैसा नहीं लिया जा रहा है. 85 फीसदी खर्च केंद्र वहन कर रही है तो 15 फीसदी राज्यों के जिम्मे है. गुजरात और यूपी में बीजेपी सरकारें हैं, बावजूद इसके मजदूरों से पैसा लिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मजदूरों से पैसा किसने लिया?

दरअसल, गुजरात के नादियाड से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मजदूरों का एक जत्था आया. खेड़ा जिले के सात तहसीलों में फंसे 1134 मजदूरों को साबरमती गोरखपुर विशेष ट्रेन से रवाना किया गया. आरोप है कि मजदूरों से रेल टिकट के नाम पर 600-700 वसूले गए. किराया वसूली किए जाने से मजदूर नाराज हैं. इनका कहना है कि पिछले 40 दिनों से फैक्ट्री मालिकों की ओर से खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं किया गया था.

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गुजरात से लखनऊ पहुंचे प्रवासी ओम प्रकाश का कहना है कि मैं वडोदरा से आ रहा हूं. मैं दिसंबर में गया था, जब लॉक डाउन की घोषणा हुई तो उसके दो-तीन दिन बाद जब सब लोग आने लगे तो हम लोग भी चल दिए थे, क्योंकि वहां खाने-पीने की दिक्कत थी. पुलिस वालों ने पकड़ लिया और क्वारनटीन के लिए भेज दिया. वहां पर हम लोगों की जांच वगैरह भी हुई, हम लोगों को 35 दिन रखा गया था. अब हम लोगों से 555 रुपए का रेल टिकट लिया गया और लखनऊ पहुंचाया गया.

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ओम प्रकाश की ही तरह वडोदरा से आए तिलकधारी ने कहा कि मैं वडोदरा में फेब्रिकेशन का काम करता था. जब लॉक डाउन हुआ तो मैं वहां से निकल पड़ा, लेकिन पुलिस वालों ने पकड़ लिया और क्वारनटीन में रख दिया. ट्रेन में एक बार खाने-पीने को मिला था. मैंने 500 रुपये का टिकट लिया था. मैं जौनपुर जा रहा हूं. तिलकधारी की ही तरह अजय का भी कहना है कि मैंने 555 रुपये का टिकट लिया और कानपुर जा रहा हूं.

अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मजदूरों से पैसा किसने लिया? लखनऊ में प्रवासी मजदूर के नोडल अधिकारी सुशील प्रताप सिंह का कहना है कि गुजरात से आए मजदूरों को नगर निगम की तरफ से खाना दिया गया. सभी लोगों के लिए बस सेवा निशुल्क है. जितने भी यात्री हैं उन सभी को उनके गंतव्य तक निशुल्क पहुंचाया जाएगा. हालांकि, वह इस सवाल का जवाब नहीं दे पाएं कि टिकट का पैसा किसने लिया.

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क्या है सरकार का दावा

केंद्र सरकार ने कहा था कि मजदूरों के रेल किराए का 85 फीसदी भार खुद रेल मंत्रालय वहन कर रहा है, जबकि 15 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारों को देना है. रेल मंत्रालय की ओर से राज्य सरकारों को टिकट जारी किया जाता है और फिर उनसे पैसा लिया जाता है. वहीं, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि बीजेपी राज्य सरकारें (एमपी जैसे) मजदूरों का किराया वहन कर रही हैं. ऐसे में अगर सफर फ्री है तो मजदूरों से पैसा किसने लिया?

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