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कोरोना संकट के बीच बंगाल में खोला गया सरकारी स्कूल, शिक्षा विभाग को नहीं थी जानकारी

पश्चिम मिदनापुर जिले के दासपुर पुलिस स्टेशन के पास घाटल उप-मंडल में स्थित स्कूल में इस साल बोर्ड की परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए कक्षाएं आयोजित की गई थीं. हालांकि प्रधानाचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात कह कर अपने कदम को उचित ठहराने की कोशिश भी की.

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स्कूल खुला तो पढ़ाई करने पहुंचे थे करीब 100 बच्चे (फोटो: Aajtak)
स्कूल खुला तो पढ़ाई करने पहुंचे थे करीब 100 बच्चे (फोटो: Aajtak)

  • पश्चिम बंगाल में बोर्ड परीक्षा देने वाले बच्चों के लिए खोला गया था स्कूल
  • हेड मास्टर ने कहा- अभिभावकों की मिन्नतों की वजह से खोला था स्कूल

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं. अभी स्कूल कब खोले जाएं और कैसे खोले जाएं इस पर विचार चल रहा है. इसके लिए देश भर के सभी राज्यों में अभिभावकों के भी विचार लिए जा रहे हैं. लेकिन इस बीच पश्चिम बंगाल में एक सरकारी स्कूल के फिर से खोल दिए जाने पर हंगामा मच गया है.

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के घाटल इलाके में एक सरकारी स्कूल 12 अगस्त को छात्रों के लिए चार घंटे के लिए फिर से खोल दिया गया. यह साफ तौर पर कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने के सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था. बिधान चंद्र रे हाई स्कूल के हेडमास्टर ने बुधवार को स्कूल को फिर से खोलकर राज्य में हंगामा मचा दिया.

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पश्चिम मिदनापुर जिले के दासपुर पुलिस स्टेशन के पास घाटल उप-मंडल में स्थित स्कूल में इस साल बोर्ड की परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए कक्षाएं आयोजित की गई थीं. हालांकि प्रधानाचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात कह कर अपने कदम को उचित ठहराने की कोशिश भी की.

स्कूल के हेडमास्टर वृंदावन घाटक ने कहा, "पिछले कुछ समय से छात्रों और अभिभावकों का अनुरोध था कि क्या हम दसवीं कक्षा के छात्रों की कक्षाएं ले सकते हैं. इसलिए हमने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ इस बारे में प्रयोग किया, सभी प्रकार की सावधानियां बरतीं और लगभग चार घंटे के लिए कक्षाओं को आयोजित किया. हालांकि, जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, शिक्षा विभाग के निर्देश पर हमने इसे रोक दिया. मैंने अभिभावकों की सलाह पर शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना स्कूल शुरू किया इसलिए शिक्षा विभाग जो भी सजा देगा मैं उसे स्वीकार करूंगा."

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स्कूल की इस विशेष कक्षा में पढ़ाई के आए लिए ऐसे कई छात्र थे, जो इस बार शैक्षिक कैलेंडर में क्या होगा, इस बारे में कोई स्पष्टता न होने के बावजूद बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयारी करने आए थे. स्कूल में किसी भी सामान्य दिन में लगभग एक हजार छात्र होते हैं लेकिन जब कक्षाएं 4 घंटे के लिए खोली गई थीं तो लगभग 100 छात्र थे. इनके अलावा 6 अध्यापक भी परिसर में थे.

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सूत्रों का कहना है कि अभिभावकों ने उन छात्रों की मदद करने के लिए बार-बार गुहार लगाई थी, जो अंतिम रिपोर्ट कार्ड में औसत से कम हैं और संसाधनों की कमी के कारण ऑनलाइन स्टडी की सुविधा नहीं ले सकते हैं.

जानकारी के मुताबिक हेडमास्टर ने स्कूल समिति से तो कक्षाएं आयोजित करने के लिए अनुमति ली थी लेकिन सरकारी स्कूल होने के बावजूद शिक्षा विभाग से किसी तरह की कोई परमिशन नहीं ली गई थी.

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शिक्षा विभाग के अतिरिक्त स्कूल निरीक्षक तुहिनबरन अधीगिरी ने कहा, "हमें इसके बारे में पता नहीं था. वर्तमान में, हम उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच करने के लिए आए हैं. मैं अपने सीनियर को आवश्यक रिपोर्ट भेज दूंगा."

लॉकडाउन लागू होने के बाद से स्कूल खोले जाने की देश में यह पहली घटना है. पहले दिन बहुत कम छात्र उपस्थित थे और इसलिए बहुत कम विषयों पर चर्चा की गई थी. स्कूल का दावा है कि उसने सोशल डिस्टेंसिंग के आदेशों को बनाए रखा और छात्रों को एक निश्चित दूरी के भीतर ही बैठाया गया था.

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