उत्तर प्रदेश में आगरा जिले के शासन-प्रशासन का ध्यान अभी कोरोना से जंग जीतने पर लगा हुआ है. इस बीच आगरा में मरीजों की लगातार मौतों का आंकड़ा आसमान छूता दिखाई दे रहा है. चाहे वह मौत कोरोना से हो या फिर किसी अन्य बीमारी से.
ताजनगरी में एक जनवरी से लेकर 15 मार्च तक 27 मरीजों ने टीबी जैसी भयंकर बीमारी की चपेट में आकर दम तोड़ दिया था, जिसका मुख्य कारण उन मरीजों को समय से इलाज न मिलना है. वहीं, आगरा में लॉकडाउन होने के बाद ज्यादातर हॉस्पिटल्स और प्रशासन कोरोना जैसी भयंकर बीमारी को रोकने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी लगाम नहीं लग पाई है.
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आगरा में 20 मार्च से 12 मई तक इन 54 दिनों में टीबी जैसी भयंकर बीमारी से ग्रसित 145 लोग मौत के आगोश में समा गए. मरीजों के तीमारदारों के द्वारा बताया गया कि पहले तो अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया. भर्ती करने के बाद भी सही तरह से उपचार और समय से दवाइयां नहीं दी गईं.
लॉकडाउन होने से पहले ही 27 मरीजों की मौत
बता दें कि आगरा में लॉकडाउन से पहले 1 जनवरी से लेकर 19 मार्च तक सिर्फ 27 मरीजों की मौत हुई थी. पोर्टल पर मिले आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक जनवरी से 12 मई तक 5813 टीबी मरीजों के केस पंजीकृत किए गए. पांच माह के बाद भी 290 मरीजों का इलाज शुरू नहीं किया गया. वहीं, 12 मई तक 507 मरीजों के परिणाम सामने आए थे, जिसमें से केवल 7 मरीज ठीक होकर अपने घर वापस गए और 500 मरीजों का इलाज चल रहा है. इसमें से 172 मरीजों की मौत हो गई थी. वहीं इनमें 145 मरीज ऐसे हैं, जिनकी मौत लॉकडाउन के दौरान हुई. 27 मरीजों ने लॉकडाउन होने से पहले ही दम तोड़ दिया था.
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में आगरा में 21,577 टीबी के मरीजों के केस पंजीकृत हुए थे, जिनमें से 4,325 मरीजों का उपचार अभी भी चल रहा है. अभी तक 1,744 मरीजों के रिजल्ट सामने आए हैं और 841 मरीजों की मौत हुई है.
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी आगरा प्रभु एन सिंह ने बताया कि टीबी रोग से इतनी मौत होना गंभीर मामला है. टीबी के मरीजों को पूरी तरह से उपचार मिल सके इसके लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. वहीं, जिला अस्पताल के निदेशक डॉ सतीश कुमार वर्मा ने बताया कि टीबी के रोगियों की इम्युनिटी कम होती है. कोविड में और स्टाफ की ड्यूटी लगी है, लेकिन फिर भी टीबी के मरीजों का इलाज पूरी तरह से किया जा रहा है. जिस किसी भी स्टाफ ने लापरवाही दिखाई होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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टीबी विंग के एचओडी डॉ संतोष कुमार ने बताया कि टीबी के मरीजों को भर्ती किया गया है. उनका इलाज पूरी तरह से किया जा रहा है. एमडीआर श्रेणी के मरीजों की स्थिति चिंताजनक होती है, लेकिन फिर भी पूरी तरह से सभी का इलाज किया जा रहा है.
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