कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भारत वैश्विक स्तर पर हर मायने में सहयोग कर रहा है और हाल ही में कई देशों को कोरोना वैक्सीन की खेप भी भेजी गई है. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस अधनोम घ्रेबेसिस ने वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग की सराहना की और धन्यवाद भी किया.
WHO के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस अधनोम घ्रेबेसिस ने आज शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जानकारी साझा करने के साथ मिलकर काम करने से कोरोना वायरस के खिलाफ मुकाबला करने में मदद मिलेगी. इस महामारी ने 20 लाख से अधिक लोगों की जिंदगी छीन ली है दुनियाभर में करीब 9.6 करोड़ लोग इससे प्रभावित हुए हैं.
पड़ोसी देशों को पहुंचाई वैक्सीन
भारत ने इस हफ्ते ऐलान किया था कि वह श्रीलंका और 8 अन्य देशों - भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, सेशेल्स, अफगानिस्तान और मॉरीशस को अनुदान सहायता के तहत कोविड-19 वैक्सीन भेजेगा.
भारत की "नेबरहुड फर्स्ट" पॉलिसी के तहत अनुदान सहायता के रूप में भेजी गई कोविड-19 वैक्सीन को नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और मालदीव पहले ही हासिल कर चुके हैं.
WHO के प्रमुख डॉक्टर घ्रेबेसिस ने आज ट्वीट के जरिए कहा, 'वैश्विक कोविड-19 रिस्पॉन्स के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद. जानकारी साझा करने समेत मिलकर लड़ाई लड़ने से ही हम इस वायरस को रोक सकते हैं और लोगों की जिंदगियां तथा उनकी आजीविका बचा सकते हैं.'
Thank you and Prime Minister for your continued support to the global response. Only if we , including sharing of knowledge, can we stop this virus and save lives and livelihoods.
— Tedros Adhanom Ghebreyesus (@DrTedros)
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले कहा था कि भारत की वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग मानवता के कल्याण और कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए किया जाएगा. पिछले हफ्ते उन्होंने कहा कि भारत स्वस्थ ग्रह के लिए हर संभव कोशिश करने को तैयार है.
बांग्लादेश और नेपाल को भी मदद
19 जनवरी को भारत ने पड़ोसी देशों को वैक्सीन की अपनी मदद देने का ऐलान किया था. इसके एक दिन बाद 20 जनवरी (बुधवार) को वैक्सीन की डेढ़ लाख डोज भूटान पहुंची और दोपहर बाद 1 लाख डोज मालदीव पहुंच गई.
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इसके अगले दिन गुरुवार को बांग्लादेश (20 लाख) और नेपाल (10 लाख) को वैक्सीन की पहली भेजी गई. जबकि म्यांमार और सेशेल्स को उनकी पहली खेप शुक्रवार को मिली. भूटान पहला देश है जिसे भारत सरकार की तरफ से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) निर्मित कोविडशील्ड वैक्सीन बतौर गिफ्ट मिली है. हालांकि, इसी दिन मालदीव को भी वैक्सीन मिली.
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े दवा निर्माताओं में से एक है, पहले से ही दो वैक्सीन, कोविशिल्ड और कोवैक्सीन का उपयोग करके बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान चला चुका है. कोविशिल्ड को एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है और इसका निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है. जबकि कोवैक्सीन भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CSIR) के सहयोग से विकसित एक स्वदेशी टीका है.