दुनिया के अमीरों की दुनिया भी निराली होती है, जहां आम आदमी घर खरीदने से पहले होम लोन और EMI के बारे में सोचता है, वहीं अरबपति देश बदलने से पहले टैक्स का कैलकुलेशन करते हैं. एक समय था जब लंदन और पेरिस स्टेटस का प्रतीक थे, लेकिन फिर दुबई टैक्स-फ्री सपना बन गया. ये तस्वीर एक बार फिर बदल रही है और इस बार रईसों की नजर इटली पर टिक गई है , क्योंकि दुनियाभर के हाई नेटवर्थ लोग फ्रांस और ब्रिटेन छोड़कर इटली का रुख कर रहे हैं.
इसकी वजह विदेशी कमाई पर फ्लैट टैक्स है, जो अधिकतम करीब 3 लाख यूरो सालाना है. वहीं प्रॉपर्टी और इनहेरिटेंस टैक्स में इटली में बड़ी राहत मिल रही है. यानी कमाई चाहे जितनी हो टैक्स फिक्स रहेगा और नियम भी आसान हैं. ऐसे में इटली अमीरों के लिए नया हॉट डेस्टिनेशन बनता दिखाई दे रहा है.
यूरोप से कनेक्टिविटी ने बढ़ाया आकर्षण!
इस ट्रेंड के पीछे की वजह केवल टैक्स नहीं है. लोकेशन भी एक बड़ी वजह है, क्योंकि यूरोप के बीचों-बीच होने से यहां पर बिजनेस कनेक्टिविटी आसान हो जाती है. इससे पेरिस, लंदन, बर्लिन जैसे शहरों तक पहुंचना आसान रहता है. वहीं पहली प्रॉपर्टी पर भी इन अमीरों को कई तरह के टैक्स से राहत मिलती है.
10 लाख यूरो तक इनहेरिटेंस पर शून्य टैक्स लगता है और इसके बाद भी केवल 4 फीसदी टैक्स चुकाना होता है. इसके मुकाबले फ्रांस में तस्वीर बिल्कुल अलग है. वहां टैक्स का बोझ ज्यादा है और नियम सख्त होते जा रहे हैं. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर हफ्ते लोग फ्रांस छोड़ने की सलाह ले रहे हैं. भविष्य में ज्यादा सख्ती का डर भी बना हुआ है.
दुबई का विकल्प बनेगा इटली
कहानी का दूसरा हिस्सा मिडिल ईस्ट से जुड़ा है जहां हालात ने गेम बदल दिया है. दरअसल, मिडिल ईस्ट तनाव से दुबई जैसे टैक्स-फ्री हब पर अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक नए विकल्प तलाश रहे हैं. हालांकि बड़े स्तर पर तो माइग्रेशन नहीं हो रहा, लेकिन ट्रेंड साफतौर पर बदलता दिखाई दे रहा है.
दुबई जो कभी अमीरों की पहली पसंद था वहां भी हलचल नजर आने लगी है. युद्ध की वजह से दुबई में बसने वालों का इरादा बदलने लगा है और डिमांड घटने से महामारी के बाद पहली बार प्रॉपर्टी कीमतों में 5.9 फीसदी की गिरावट आई है और ट्रांजेक्शन वॉल्यूम करीब 30 परसेंट तक घट गए हैं.
दुबई में हेल्दी करेक्शन
हालांकि एक्सपर्ट्स इसे क्रैश नहीं, एक हेल्दी करेक्शन बता रहे हैं क्योंकि महामारी के बाद प्रॉपर्टी की कीमतें 70 फीसदी तक बढ़ चुकी थीं. ऐसे में थोड़ा ठहराव और कुछ गिरावट को जरूरी माना जा रहा है. कुल मिलाकर देखा जाए तो फिलहाल निवेशक वेट एंड वॉच मोड में हैं यानी जल्दबाजी की जगह सोच-समझकर फैसला कर रहे हैं.
इस पूरी तस्वीर से साफ समझ आता है कि जहां टैक्स में स्थिरता और सुरक्षा है निवेशक उसी दिशा में जा रहे हैं और इटली इसकी नई मिसाल बन रहा है और दुबई जैसे बाजार, जो कभी तेज रफ्तार पर थे वहां भी रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती दिख रही है. आम आदमी के लिए इसका मतलब सीधा है कि दुनिया का पैसा जहां जाएगा वहां के बाजार मजबूत होंगे और जहां अनिश्चितता बढ़ेगी वहां ठहराव दिखेगा.