शेयर बाजार (Stock Market) में भारी गिरावट के बीच गुरुवार को सोने-चांदी की कीमतें भी धाराशायी हो गई हैं. MCX पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है. सोना भी करीब 2.50 फीसदी तक फिसल गया है.
गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे अचानक चांदी की कीमतें टूटने लगीं, और देखते ही देखते 12000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. जबकि सोने के भाव में करीब 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है. फिलहाल चांदी की कीमत MCX पर 2.35 लाख प्रति किलो के आसपास बनी हुई है. जबकि सोना ट्रेड के दौरान 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से भी नीचे से फिसल गया है.
दरअसल, मिडिल ईस्ट का संकट गहराता जा रहा है, पहले ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेरिका ने हमला किया, अब बदले में ईरान ने भी कतर से बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर हमला कर दिया है. जिससे भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. इस बीच कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. ऑयल इंफ्रा पर हमले से युद्ध से भयावह रूप ले लिया है. क्योंकि जिस तरह से एक-दूसरे को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए तेल इंफ्रा पर हमले कर रहे हैं, इससे लगता है कि ये युद्ध आने वाले दिनों और खतरनाक हो सकता है.
चांदी में बड़ी गिरावट के पीछे ये कारण
सोने-चांदी में गिरावट के कई कारण हैं. लेकिन मुख्यतौर पर अमेरिका का एक फैसला है. बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल अब ब्याज दरों में कटौती की संभावना सीमित है. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ग्लोबल तनाव के चलते आर्थिक स्थिति काफी खराब है. इस फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की जमकर पिटाई हुई.
बता दें, पिछले करीब दो साल से सोने-चांदी की कीमतों में एकतरफा रैली देखी गई थी. 29 जनवरी 2026 को चांदी (Silver) की कीमत रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 2 फरवरी 2026 चांदी की कीमत गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके पीछे मुनाफावसूली कारण थे.
युद्ध के बीच सोने-चांदी में भी बिकवाली हावी
लेकिन अब एक बार फिर चांदी इसी कीमत के आसपास पहुंच गई है. चांदी अब 29 जनवरी की हाई से करीब 1.85 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. फिलहाल चांदी 2.35 लाख किलो से आसपास कारोबार कर रही है.
बता दें, अक्सर ये देखा गया है कि ग्लोबल टेंशन के दौरान खासकर जब युद्ध चल रहा हो तो निवशक ऐसे माहौल में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन इस बार थोड़ी उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है. सोने-चांदी पर दबाव गहराता जा रहा है.