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सोना मत खरीदें... पीएम मोदी ने क्यों कहा? एक तीर से कई निशाने, ट्रंप को भी तगड़ा मैसेज

Gold Economic Impact: सरकारी आंकड़ों के आधार पर देखें तो भारत रोजाना औसतन 1,676 करोड़ रुपये का सोना विदेशों से खरीदता है. यानी भारत हर घंटे करीब 80 किलो सोना आयात करता है. 

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एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील. (Photo: ITG)
एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील. (Photo: ITG)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक हालात को देखते हुए रविवार को सोना नहीं खरीदने की सलाह दी थी, उन्होंने देशवासियों से अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है. लेकिन आपको पता है, इससे भारत सरकार को क्या फायदा होने वाला है. आखिर पीएम मोदी ने लोगों से सोना नहीं खरीदने की भावुक अपील क्यों की है?

दरअसल, भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत हर साल करीब 750 टन सोना आयात करता है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 721 टन सोना आयात हुआ. 2024-25 में लगभग 757 टन और वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 744 टन सोना भारत ने आयात किए. 

भारत स्विट्जरलैंड से सबसे अधिक सोना आयात करता है. लगभग कुल आयात का 40 फीसदी हिस्सा स्विट्जरलैंड से लेता है. इसके बाद UAE और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है. 

भारत इतना ज्यादा सोना क्यों खरीदता है?
भारत में सोने का खनन बहुत कम होता है, इसलिए डिमांड पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. खासकर ज्वेलरी और निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं. 

पीएम मोदी ने क्यों सोना नहीं खरीदने की अपील की है?
सोने का आयात सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है. सोने का भारी आयात देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ाता है, क्योंकि इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) खर्च करनी पड़ती है. एक उदाहरण से समझते हैं, जब भारत 10 ग्राम सोना खरीदता है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है, भारत को यह भुगतान डॉलर में करना पड़ता है. जिससे आयात और निर्यात के बीच अंसतुलन बढ़ जाता है, और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ जाता है, यही कारण है कि पीएम मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील की है. 

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भारत ने वित्त-वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 721.03 टन सोना आयात किया था. साल भर का कुल आयात मूल्य लगभग 6,11,830 करोड़ रुपये रहा. इस हिसाब से एक दिन में भारत औसतन 1.97 टन (करीब 2,000 किलो) सोना आयात करता है. सरकारी आंकड़ों के आधार पर देखें तो भारत रोजाना औसतन 1,676 करोड़ रुपये का सोना विदेशों से खरीदता है. भारत हर घंटे करीब 80 किलो सोना आयात करता है. 

यही नहीं, हमारे देश में शादियों के सीजन और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान सोने का दैनिक औसत खरीदारी 4 से 5 टन तक पहुंच जाता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के रूप में सोने की खरीदारी करता है. दिसंबर 2024 तक RBI के पास लगभग 876 टन सोने का भंडार था. 

इकोनॉंमी से जुड़ा है मामला

दरअसल, पीएम मोदी की अपील के पीछे देश की आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) से जुड़ा मामला है. सोने के आयात की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता जा रहा है, भारत अपनी जरूरत का लगभग सारा सोना विदेशों से आयात करता है और इसके लिए भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है. 

फिलहाल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हॉर्मुज में तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भी आसमान छू रही हैं. क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है. इस तनाव की वजह से भारत को तेल खरीदने के लिए 30% अधिक डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं. अगर इसी समय लोग भारी मात्रा में सोना भी आयात करेंगे, तो देश के डॉलर भंडार पर 'दोहरी मार' पड़ेगी.

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जानकारों की मानें तो सोने के बहाने एक तरह से पीएम मोदी ने अमेरिका पर निशाना साधा है, जो कि डॉलर में ट्रेड को बढ़ावा दे रहा है. जबकि भारत-रूस समेत कई दूसरे बड़े देश वैकल्पिक करेंसी में ट्रेड पर विचार कर रहा है. डॉलर का कम इस्तेमाल यानी अमेरिकी मुहिम को झटका देना है. खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आर्थिक नीतियों से डॉलर को मजबूत करने के लिए भारत जैसे विकासशील देशों की करेंसी पर दबाव डाल रहे हैं.  

जब हम निर्यात कम और आयात ज्यादा करते हैं, तो अर्थव्यवस्था असंतुलित हो जाती है. कच्चा तेल खरीदना देश की मजबूरी है, तमाम आर्थिक गतिविधियां तेल पर निर्भर हैं. लेकिन सोना एक स्वैच्छिक निवेश है. सरकार चाहती है कि लोग सोने में पैसा लगाने के बजाय उसे देश के भीतर अन्य उत्पादक कार्यों या सरकारी योजनाओं में लगाएं. विदेशी यात्राओं से बचें, ताकि डॉलर बाहर न जाए. कम पेट्रोल डीजल का इस्तेमाल करें ताकि डॉलर का खर्च कम हो. 

रुपया पड़ता जा रहा है कमजोर
जब भारत को आयात के लिए बहुत ज्यादा डॉलर की जरूरत होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की कीमत गिर जाती है. हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है. वैसे भी सोना को एक 'गैर-जरूरी' आयात माना जाता है. पीएम की अपील का मकसद डॉलर की मांग को कम करना है, ताकि रुपये को और गिरने से बचाया जा सके. 

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आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकार चाहती है कि भारतीय परिवार (विशेषकर शादियों के सीजन में) भारी मात्रा में भौतिक सोना खरीदने से बचें. ताकि इकोनॉमी पर निगेटिव असर न पड़े. 

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