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Modi Govt Orders: सरकार ने लिए 'लॉकडाउन' जैसे ये 5 फैसले, बैंकों को आदेश... क्या नहीं करना है?

PM Modi’s Appeal: सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन लोगों संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. सरकार का मकसद सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना है.

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वैश्विक संकट की वजह से भारत ने डॉलर बचाने के लिए उठाए कई कदम. (Photo: AI Generated)
वैश्विक संकट की वजह से भारत ने डॉलर बचाने के लिए उठाए कई कदम. (Photo: AI Generated)

लॉकडाउन शब्द का जिक्र होते ही लोग अंदर से हिल जाते हैं, कोराना काल का डर जह्न में घूमने लगता है. फिलहाल सरकार के कुछ फैसलों को कोरोना काल से जोड़कर देखा जा रहा है. लेकिन उस संकट से मौजूदा संकट की तुलना नहीं की जा सकती है. कोविड महामारी के दौरान लोगों की जिंदगी दांव पर लगी थी, जिसे बचाने के लिए लॉकडाउन एक कारगर विकल्प था. लेकिन मौजूदा समय में हालात बिल्कुल अलग है.
  
दरअसल मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज रूट बाधित होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तगड़ी तेजी आई हैं. कच्चा तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं. हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन लोगों संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. सरकार का मकसद सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना है.

इस महीने 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की थी, इसके अलावा उन्होंने कई और बातें कही थीं. पीएम मोदी की अपील के बाद लोगों को कोरोना काल की घोषणाएं याद आने लगी हैं, खासकर लॉकडाउन को याद किया जा रहा है. लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा. ऐसी कोई स्थिति नहीं है. केवल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने और तेल की खपत को नियंत्रित करने के लिए देश में कोविड-19 के दौर जैसी पाबंदियां और एहतियात की बातें हो रही हैं.

हालांकि सरकार के हालिया अपील और निर्देशों के बाद देश में 5 ऐसे बड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जो लॉकडाउन की याद दिलाते हैं.

1. बैंकों और सरकारी विभागों में ऑनलाइन मीटिंग
वित्त मंत्रालय के 'वित्तीय सेवा विभाग' (DFS) ने सभी सरकारी बैंकों (PSBs), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सार्वजनिक बीमा कंपनियों को आदेश दिया है कि फिलहाल सभी बैठकें अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए करें. जब तक बहुत जरूरी न हो, फिजिकली रूप से बैठकें आयोजित करने पर रोक लगा दी गई है, ताकि अधिकारियों की यात्रा और उस पर होने वाले ईंधन खर्च को बचाया जा सके. 

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2. 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) पर सरकार का जोर
तेल संकट के इस दौर में सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए सरकार एक बार फिर लॉकडाउन के सबसे बड़े हथियार 'वर्क फ्रॉम होम' को बढ़ावा दे रही है. कई राज्यों ने इस पर काम करना शुरू भी कर दिया है. दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन का 'वर्क फ्रॉम होम' अनिवार्य कर दिया है. इसके साथ ही, निजी कंपनियों से भी स्वेच्छा से इसे लागू करने की अपील की गई है ताकि पेट्रोल और डीजल की दैनिक खपत को सीमित किया जा सके. 

3. अनावश्यक रूप से सोना खरीदने पर रोक 
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है, जिससे बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है. मौजूदा चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और गिरते रुपये को संभालने के लिए पीएम मोदी ने देश के लोगों से एक साल तक शादियों या विशेष अवसरों पर भी सोना न खरीदने की भावुक अपील की है. इसका मुख्य उद्देश्य सोने के आयात को घटाकर बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार को कच्चे तेल जैसे आवश्यक संकटकालीन आयात के लिए सुरक्षित रखना है. 

सोने की खरीद के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने के लिए विदेशी दौरों और पर्यटन पर भी इसी तरह की अपील की गई है. क्योंकि जब भी कोई भारतीय नागरिक विदेश घूमने जाता है, तो उसे वहां खर्च करने के लिए भारतीय रुपये को डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा में बदलना पड़ता है. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बाहर जाता है. मौजूदा तेल संकट के समय सरकार की प्राथमिकता यह है कि देश का एक-एक डॉलर सुरक्षित रहे, ताकि उसका उपयोग केवल कच्चे तेल और अनिवार्य चीजों के आयात के लिए किया जा सके. 

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4. काफिले में गाड़ियों की संख्या में कटौती 
अधिकारियों की देश-विदेश की यात्राओं पर कटौती करने की सलाह दी गई है, बैंक चेयरमैन, एमडी और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों की सीमा तय कर दी गई है. तमाम मंत्रियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम हो गई हैं, खासकर बीजेपी शासित राज्यों में इसका असर देखने को मिल रहा है. इसके अलावा दिल्ली जैसे राज्यों ने अगले 6 महीनों के लिए किसी भी नए पेट्रोल, डीजल या सीएनजी वाहनों की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी है और सरकारी विभागों को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ शिफ्ट होने को कहा गया है. 

5. पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
इसके अलावा लॉकडाउन की तरह ही सरकारी स्तर पर होने वाले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और उत्सवों को अगले तीन महीनों के लिए रद्द या स्थगित किया जा रहा है. आम जनता से निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और बसों जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने और हफ्ते में कम से कम एक दिन 'नो-व्हीकल डे' रखने का आग्रह किया जा रहा है. 

बता दें, सरकार ये कदम आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठा रही है. देश में ईंधन का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है, और लॉकडाउन जैसा देश में माहौल कतई नहीं है.
 

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