आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ है. कमेटी को 18 महीनों में 8वें वेतन आयोग पर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है, जिसके बाद इसे लागू किया जा सकता है. ऐसा माना जा रहा है कि इसे 2027 के मार्च से अप्रैल के दौरान लागू किया जा सकता है. हालांकि, ये साल 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. इस बीच, आयोग के सामने कुछ मांगे रखी गई हैं.
अगर आठवें वेतन आयोग के सामने रखे गए नए डिमांड को मान लिया गया, तो केंद्र सरकार के कम्रचारियों की सैलरी और अलाउंस में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद की मसौदा समिति ने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा है.
इन प्रस्तावों के तहत बढ़ती लीविंग कॉस्ट और फैमिली नीड पर फोकस रखते हुए हाई बेसिक सैलरी, बेहतर पेंशन और बेहतर अलाउंस पर जोर दिया गया है. आइए जानते हैं क्या-क्या प्रस्ताव रखा गया है...
69,000 रुपये मिनिमम बेसिक सैलरी
इन मांगों के केंद्र में मिनिमम बेसिक पे को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग है. समिति ने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर रखने का सुझाव दिया है, जिससे रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा वेतन और पेंशन में बड़ी उछाल आई है. समिति ने यह भी मांग की है कि सभी संशोधनों को बिना किसी देरी के 1 जनवरी, 2026 से लागू किया जाए.
इस बेसिक पे के साथ ही 6 फीसदी की सालाना सैलरी बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव रखा गया है, जो मौजूदा दर से ज्यादा है. इसका उद्देश्य यह तय करना है कि समय के साथ सैलरी महंगाई के अनुसार बना रहे.
वेतन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव
मसौदे में मौजूदा वेतनमान को सरल बनाने की भी सिफारिश की गई है. इसमें सातवें वेतन आयोग के तहत 18 स्तरों को मिलाकर केवल सात व्यापक वेतनमानों में बदलने का सुझाव दिया गया है. समिति के अनुसार, इससे करियर में तेजी आसान होगी और ठहराव कम होगा. इस प्रस्ताव के तहत सैलरी में किन-किन स्तरों पर बढ़ोतरी होगी.
उदाहरण के लिए, सबसे कम वेतन स्तर, जो वर्तमान में 18,000 रुपये से शुरू होता है, बढ़कर 69,000 रुपये हो सकता है. इसी तरह, अगले स्तरों पर न्यूनतम वेतन मौजूदा स्तरों को मिलाकर क्रमशः 83,200 रुपये और 1.12 लाख रुपये तक बढ़ सकता है. मध्य-स्तर के कर्मचारियों का बेसिक सैलरी उनकी स्थिति के आधार पर लगभग 1.35 लाख रुपये से लेकर 2.15 लाख रुपये से अधिक तक हो सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च स्तरों के लिए भी यही उपयुक्तता कारक लागू होगा, जिससे सभी स्तरों पर एक समान बढ़ोतरी होगी.
सरल शब्दों में कहें तो, पूरे सैलरी स्ट्रक्चर को इस तरह से फिर से तय किया जा रहा है कि स्तरों की संख्या कम हो, लेकिन हर स्तर पर शुरुआती सैलरी कम हो.
पेंशन और नौकरी के लाभ
सबसे खास डिमांड में से एक 1 जनवरी, 2004 के बाद सर्विस में शामिल हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली है. समिति ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि पेंशन को आखिरी मिले वेतन के 67% पर तय किया जाना चाहिए, जिसमें पारिवारिक पेंशन 50% हो.
करियर में तरक्की पर भी जोर दिया गया है. मसौदे में सुझाव दिया गया है कि हर कर्मचारी को 30 साल की सेवा अवधि में कम से कम से कम पांच प्रमोशन या वेतन बढ़ोतरी मिलनी चाहिए. इसमें हर पांच साल में पेंशन में संशोधन का भी प्रावधान है.
भत्ते और सामाजिक सुरक्षा
इस प्रस्ताव में बेहतर सामाजिक सुरक्षा और भत्तों की मांग की गई है. इसमें मकान किराया भत्ता (HRA) की संरचना को बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसमें न्यूनतम दर 30% तक और महानगरों के लिए इससे भी अधिक होगी. बेहतर बीमा कवरेज, ड्यूटी के दौरान मरने वाले कर्मचारियों के लिए अधिक मुआवज़ा और छुट्टी के कैश पर लगी सीमा को हटाने की भी मांगें हैं. मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 240 दिन करने का प्रस्ताव है, साथ ही माता-पिता की देखभाल के लिए अवकाश और पैटरनिटी लीव का समय बढ़ाने जैसे नए प्रावधानों का भी सुझाव दिया गया है.
ये प्रस्ताव सिर्फ एक संघ द्वारा दिया गया है, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ एक सिफारिशें हैं. असल फैसला आयोग की रिपोर्ट के बाद पेश किया जाएगा और फिर सरकार तय करेगी कि कितनी सैलरी बढ़ सकती है.