सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम योजना को और आगे बढ़ाने के निवेदन वाली एक याचिका पर सुनवाई 11 जून तक के लिए टाल दी है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान याचिका दायर करने वाले वकील की आवाज सुनाई न देने की वजह से सुप्रीम कोर्ट को यह सुनवाई टालनी पड़ी.
इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि कोविड की नई लहर को देखते हुए एक बार फिर लोन मोरेटोरियम स्कीम को लागू किया जाए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ इस याचिका को खारिज करने के मूड में दिख रही थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक नीतिगत मसला है और कोर्ट पहले ही इसमें दखल न देने की बात कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वालों से कहा कि वे इस मांग के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के पास जाएं.
तकनीकी गड़बड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तारीख तय की है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में तकनीकी गड़बड़ी की वजह से याचिका दायर करने वाले वकील विशाल तिवारी की आवाज साफ नहीं आ रही थी, जिसकी वजह से सुनवाई 11 जून तक टालनी पड़ी. खंडपीठ ने कहा कि अगली डेट में किसी फैसले से पहले उक्त वकील की बात पहले सुनी जाएगी.
क्यों उठी मांग
गौरतलब है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है. कई राज्यों ने लॉकडाउन लगा दिया है. इससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है और काम-धंधा ठप पड़ गया है. बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं और उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च हो रहा है. इसकी वजह से तमाम वर्ग यह मांग करने लगे हैं कि लोन मोरेटोरियम को फिर से लागू किया जाए.
एडवोकेट विशाल तिवारी ने यह याचिका दाखिल की थी. उनका कहना था कि कोरोना की दूसरी लहर से पूरा देश लॉकडाउन का सामना कर रहा है. यह इकोनॉमी के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है.
क्या है लोन मोरेटोरियम
पिछले साल मार्च के अंत में लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद काफी लोगों की नौकरियां चली गईं. उद्योग-धंधे ठप पड़ गए. ऐसे में लोगों के सामने समय पर ईएमआई भरने की दिक्कत खड़ी हो गई थी. इस चिंता को दूर करने के लिए आरबीआई ने लोगों को लोन मोरेटोरियम का विकल्प दिया था. इसके तहत कर्जधारक लोन EMI तीन महीने के लिए टाल सकते थे, बाद में इसे बढ़ाकर छह महीने के लिए कर दिया गया. हालांकि दौरान ब्याज से छूट नहीं दी गई थी.