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Gold Bond खरीदें या ज्वेलरी? जवाब से बदल जाएगा निवेश का नजरिया

Gold Bond vs Physical Gold: भारत में सोने (Gold) के बिना कोई भी पर्व या त्योहार या फिर शादी-विवाह पूरा नहीं होता. लोग Gold Assets को शुभ मानते हैं. दूसरी ओर, इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में Gold Assests को शामिल करने से एक तरह का Diversification होता है.

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सरकार की ओर से आरबीआई SGB जारी करता है सरकार की ओर से आरबीआई SGB जारी करता है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • Sovereign Gold Bond सरकारी सिक्योरिटी है
  • SGB पर 2.5% का मिलता है ब्याज

भारत में सोने (Gold) के बिना कोई भी पर्व या त्योहार या फिर शादी-विवाह पूरा नहीं होता. लोग Gold Assets को शुभ मानते हैं. दूसरी ओर, इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में Gold Assets को शामिल करने से एक तरह का Diversification होता है.

फाइनेंशियल प्लानर कुल इंवेस्टमेंट का 10%-20% हिस्सा Gold में इंवेस्ट करने के लिए कहते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि Gold ना सिर्फ हमें महंगाई को मात देने में मदद करता है बल्कि निवेश के जोखिम को भी कम करता है.

आप Sovereign Gold Bond, Gold ETF, सोने की ज्वेलरी या सिक्के या बिस्किट के रूप में इंवेस्ट कर सकते हैं. इंवेस्टमेंट के इन अलग-अलग इंस्ट्रुमेंट के अलग-अलग फायदे-नुकसान हैं. आइए जानते हैं कि इंवेस्टमेंट के लिए आपको Sovereign Gold Bond खरीदना चाहिए या फिर गहने खरीदने चाहिए?

क्या होता है Sovereign Gold Bond?

Sovereign Gold Bond सरकारी सिक्योरिटी है. सरकार की ओर से आरबीआई इसे जारी करता है. इसके हर यूनिट को एक ग्राम गोल्ड से डिनॉमिनेट करते हैं. इसमें महज 1 ग्राम सोने की खरीद के साथ निवेश की शुरुआत की जा सकती है. वहीं, एक व्यक्ति और HUF एक वित्त वर्ष में अधिकतम 4 किलोग्राम सोना खरीद सकते हैं. हालांकि, ट्रस्ट और इस तरह के अन्य संगठन अधिकतम 20 किलोग्राम सोना खरीद सकते हैं. किसी भी पब्लिक सेक्टर बैंक, शिड्युल्ड प्राइवेट और विदेशी बैंक, अथॉराइज्ड स्टॉक एक्सचेंज, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और कुछ चुनिंदा पोस्ट ऑफिस से Sovereign Gold Bond (SGB) के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके अलावा आप ऑनलाइन भी SGB के लिए अप्लाई कर सकते हैं. 

Sovereign Gold Bond में इंवेस्ट करने के फायदे (SGB Benefits)

1. सेफ्टीः मार्केट से जुड़े रिस्क के अलावा SGB रखने वालों को ऐसा रिस्क नहीं उठाना पड़ता है जो फिजिकल गोल्ड रखने वालों को उठाना पड़ता है. इस पर आपको भारी-भरकम मेकिंग या डिजाइनिंग चार्ज नहीं देना होता है और ना ही बॉन्ड्स पर टीडीएस देना होता है. इसके अलावा ना इसे कोई चुरा सकते है और ना ही इसके मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद हो सकता है. 
2. इनकम का एडिशनल सोर्सः SGB पर आपको 2.5 प्रतिशत के सालाना रेट से इंटरेस्ट मिलता है. इंवेस्टर के लिए यह इनकम का एक एडिशनल सोर्स हो सकता है. 
3. कैपिटल गेन पर नहीं लगता है कोई टैक्सः इसकी मेच्योरिटी की अवधि 8 साल होती है. इसके बाद यह ऑटोमैटिक तरीके से मेच्योर हो जाता है और रिडेम्शन से मिलने वाली राशि आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो जाती है. मेच्योरिटी पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. 
4. क्वालिटी की चिंता नहींः इसकी कीमत इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी 999 क्वालिटी के सोने के पिछले तीन दिन के दाम के औसत से निकाली जाती है. इसे आरबीआई जारी करता है. ऐसे में इसकी सिक्योरिटी और फिजिकल गोल्ड की तरह इसकी क्वालिटी की चिंता करने की जरूरत हमें नहीं होती है. 
5. महंगाई दर से निपटने में मिलती है मददः अगर अतीत के डेटा पर गौर किया जाए तो सोने का भाव आम तौर पर काफी अधिक बढ़ जाता है. परिणामस्वरूप, इंवेस्टर्स को अपने इंवेस्टमेंट के वास्तविक वैल्यू से ज्यादा वैल्यू और एक समय के बाद ज्यादा फायदा मिलता है. 

ज्वेलरी या फिजिकल गोल्ड

भारत में अब तक इंवेस्टमेंट के लिए गोल्ड ज्वेलरी या गोल्ड क्वाइन वगैरह खरीदना ज्यादा पंसद करते थे. डिजिटल गोल्ड के विपरीत Physical Gold की खरीददारी को काफी गुप्त रखा जाता है. इसे आप सीधे किसी ज्वेलर से खरीदते हैं. इस तरह इसमें कोई तीसरी पार्टी शामिल नहीं होती है. 

फिजिकल गोल्ड के फायदे (Benefits of Physical Gold)

1. इसमें ज्वेलरी, क्वाइन या बार के रूप में सोना फिजिकल तौर पर आपके पास रहता है.
2. अगर कोई इकोनॉमी गिरती है तो सभी तरह के और एसेट्स लुढ़क जाते हैं जबकि सोना आपके साथ सुरक्षित रहता है. परिणामस्वरूप यह निवेशकों को किसी भी संकट के समय में प्रोटेक्ट करता है. 
3. Physical Gold भी महंगाई दर को मात देने और करेंसी के गिरने के समय आपके लिए हेल्पफुल साबित होता है.

 

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