रेलवे ने राजस्थान में अत्याधुनिक ‘मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट’ (एमईएमयू) कोच कारखाना लगाने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की भेल के साथ गठजोड़ किया है.
स्थानीय तथा उपनगरीय ट्रेनों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये यह कारखाना लगाया जा रहा है. एमईएमयू ट्रेन बिजली वाले ट्रैक पर तीव्र गति से चलती है और इससे दैनिक यात्रियों को फायदा होगा.
सहमति पत्र पर दस्तखत के बाद रेल मंत्री पवन कुमार बसंल ने कहा कि एमईएमयू कोच फैक्टरी लगाने के लिये राजस्थान सरकार हमें भीलवाड़ा में 200 एकड़ जमीन देगी. यह कारखाना भेल लगाएगी और इसमें सालाना 400 डिब्बे तैयार होंगे.
संयुक्त उद्यम परियोजना के लिये राजस्थान के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जायेंगे. इस अत्याधुनिक कारखाने की स्थापना पर 1,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. नये एमईएमयू डिब्बों में शौचालय तथा बैठने की आरामदायक व्यवस्था होगी.
बंसल ने कहा कि फिलहाल रेलवे के पास 160 एमईएमयू ट्रेन हैं जबकि छोटी दूरी के लिये मांग काफी बढ़ी है. अगले 10 साल में 9000 एमईएमयू डिब्बों की जरूरत होगी. इसीलिए एमईएमयू डिब्बों का विनिर्माण बढ़ाने की जरूरत है.
इस मौके पर मौजूद भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि जिस गति से शहरीकरण हो रहा है, एमईएमयू ट्रेन वास्तव में बेहद महत्वपूर्ण हैं. रेलवे को भी विश्वसनीय और बेहतर सेवा देने के लिये और ट्रेन चाहिए और यह समय की जरूरत है. पटेल ने कहा कि प्रस्तावित कारखाने से सालाना 400 डिब्बों के विनिर्माण का लक्ष्य है, जरूरत पड़ने पर उत्पादन क्षमता बढ़ायी जा सकती है.