रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर पद से रघुराम राजन के जाने के बाद भारत में बैड बैंक लाने के आइडिया पर फिर से विचार किया जा सकता है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है.
रघुराम राजन के जाने के बाद 6 सितंबर को ऊर्जित पटेल आईबीआई के नए गवर्नर बन गए थे. राजन 'बैड बैंक' के आइडिया के खिलाफ थे. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक नए गवर्नर के आने के बाद बैड बैंक को लाने पर विचार किया जा सकता है, जिसके जरिए कर्ज में फंसे बैंक अपनी देयताओं को बैड बैंक को स्थानांतरित कर पाएंगे.
जल्द उठाए जा सकते हैं कदम
अधिकारी ने बताया, 'अगले दो से तीन महीने में इस दिशा में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं. अब क्योंकि आरबीआई के नए गवर्नर आ गए हैं तो इसकी संभावना बढ़ गई है. आरबीआई के पिछले गवर्नर बैड बैंक और ऐसेट रीस्ट्रक्चरिंग कंपनी के जरिए पैसा वसूलने के आइडिया में दिलचस्पी नहीं रखते थे.'
कई देशों ने अपनाया है ये आइडिया
सरकार की पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारी ने कहा, 'इस आइडिया पर वित्त मंत्रालय का साथ भी जरूरी है.' अधिकारी ने आगे कहा कि इससे पहले भी कई देशों ने बैड बैंक का आइडिया अपनाया है और कोई भी इसमें विफल नहीं रहा है.
क्या होता है बैड बैंक?
'बैड बैंक' एक आर्थिक अवधारणा है जिसके अंतर्गत आर्थिक संकट के समय घाटे में चल रहे बैंकों द्वारा अपनी देयताओं को एक नए बैंक को स्थानांतरित कर दिया जाता है. ये बैड बैंक कर्ज में फंसी उनकी राशि को खरीद लेगा और उससे निपटने का काम भी इसी बैंक का होगा. जब किसी बैंक की गैर निष्पादित संपत्ति सीमा से अधिक हो जाती है तब राज्य के आश्वासन पर एक ऐसे बैंक का निर्माण किया जाता है जो मुख्य बैंक की देयताओं को एक निश्चित समय के लिए धारण कर लेता है.
राजन ने किया था विरोध
राजन ने ये कहते हुए इसका विरोध किया था कि ऐसा करने से बैंक लापरवाह हो जाएंगे जबकि अपना पैसा वसूलने की जिम्मेदारी खुद बैंकों की होनी चाहिए. बैड बैंक आने की स्थिति में वो यही समझेंगे कि उन्हें देयताओं से छुटकारा मिल जाएगा. उनका मानना था कि लोन सही तरह से न चुकाए जाने की स्थिति में अगर इसे बैड बैंक को स्थानांतरित कर दिए जाएगा तो इससे दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं. उनका ये भी मानना था कि भारत के लिए बैड बैंक और गुड बैंक का कॉन्सेप्ट सही नहीं है.