अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ओईसीडी ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.8 फीसदी रहेगी. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने कहा कि वृद्धि में कमी 2018 के मध्य से होनी शुरू हुई है, जो निजी खपत में तेजी से कमी को दर्शाता है.
हाल ही में दूसरी तिमाही के लिए आधिकारिक जीडीपी 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था और उसके बाद से यह पहला अंतरराष्ट्रीय वृद्धि दर अनुमान है.
रिजर्व बैंक ने भी घटाया था अनुमान
गौरतलब है कि गुरुवार को ही भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने अनुमान में कहा है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय अर्थवव्यवस्था की ग्रोथ रेट महज 5 फीसदी रह सकती है.
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) एक अंतर सरकारी आर्थिक संगठन है, जिसमें 36 देश शामिल हैं. इसकी स्थापना 1961 में आर्थिक प्रगति और विश्व व्यापार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हुई थी. सर्वेक्षण में बताया गया है कि कई वर्षो के बेहतरीन वृद्धि के बाद 2019 में जीडीपी दर 5.8 फीसदी तक गिरने के बाद यह 2020 में 6.2 फीसदी और 2021 में 6.4 फीसदी तक की रफ्तार पकड़ लेगा.
ऊंचा ग्रोथ क्यों है जरूरी
ओईसीडी ने अपने सर्वेक्षण में कहा, 'उच्च स्तर पर वृद्धि को बहाल करना नौकरियों के सृजन के लिए जरूरी है और निवेश और निर्यात में तेजी लाने के लिए ढांचागत सुधारों की गति तेज करने की आवश्यकता है. '
रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य आधारभूत संबंधी बाधाओं को बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करके और सड़कों का निर्माण करके दूर करना भारत की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा.
ओईसीडी ने कहा, 'सेवा व्यापार प्रतिबंधों में बहुपक्षीय कटौती का भारत सबसे बड़ा लाभार्थी होगा. यहां तक कि बिना बहुपक्षीय समझौते के, नियमों के निरीक्षण को लेकर आगे बढ़ने का सकारात्मक प्रभाव होगा.'
क्या है गिरावट का मतलब
ओईसीडी आर्थिक सर्वेक्षण: इंडिया रिपोर्ट 2019 अंक में अुनमान लगाया गया है कि भारत का जीडीपी वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करेगा. वृद्धि में कमी 2018 के मध्य से होनी शुरू हुई है, जो निजी खपत में तेजी से कमी को दर्शाता है.