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इस कचरे की वजह से 2025 तक देश में 5 लाख रोजगार पैदा होगा

ऐसे समय में जब देश में रोजगार सृजन की धीमी रफ्तार को लेकर तमाम चिंताजनक खबरें सामने आई हैं, एक अनुमान सामने आया है कि अगले सात साल में देश में सिर्फ ई-वेस्ट के क्षेत्र में करीब 5 लाख नई नौकरियों का सृजन हो सकता है.

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ई-वेस्ट का बढ़ रहा है कारोबार (फोटो: शेखर घोष)
ई-वेस्ट का बढ़ रहा है कारोबार (फोटो: शेखर घोष)

साल 2025 तक ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरा के क्षेत्र में भारत में करीब 5 लाख नौकरियों का सृजन हो सकता है. उभरते बाजारों में निजी क्षेत्र पर केंद्रित विकास वित्त संस्थान अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) ने यह अनुमान जाहिर किया है.

आईएफसी के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक कचरा क्षेत्र में संपूर्ण श्रृंखला-संग्रह, एकत्रीकरण, निराकरण और रीसाइक्लिंग में 2025 तक 450,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इसके अलावा हजारों की संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होगा. साथ ही, परिवहन और विनिर्माण जैसे संबद्ध क्षेत्र में भी 180,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है.

आईएफसी 2012 से ई-कचरा क्षेत्र में कार्य कर रहा है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सरकार के ई-वेस्ट (मैनेजमेंट और हैंडलिंग) नियम 2016 के तहत आईएफसी और 'करो संभव' नाम के एक उत्पादक जिम्मेदारी संगठन (पीआरओ) ने यह दिखाने के लिए कि क्षेत्र की चुनौतियों के लिए पूरे भारत में जमीनी स्तर पर समाधान संभव हैं, 2017 में इंडिया ई-वेस्ट प्रोग्राम की शुरुआत की थी.

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यह प्रोग्राम पीआरओ मॉडल को समर्थन देने और जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है. प्रोग्राम के तहत नागरिकों और निगमों से 4,000 मीट्रिक टन से अधिक ई-कचरा एकत्रित किया गया है और जिम्मेदारी से उसे रिसाइकल किया गया है.

स्कूली बच्चों सहित 2,260,000 नागरिकों को बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के सुरक्षित निपटान के प्रति जागरूक किया गया है. आईएफसी सीनियर कंट्री हेड विक्रमजीत सिंह ने बताया, 'आईएफसी दुनिया के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए निजी क्षेत्र के समाधान विकसित करता है. इंडिया ई-वेस्ट प्रोग्राम के जरिये, हमने एक बड़ा और समावेशी निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाला समाधान तैयार किया है, जो भारत में तेजी से बढ़ते क्षेत्र में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देगा और निवेश अवसरों को पैदा करेगा.'  

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है और यहां मांग 2020 तक बढ़कर 400 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. भारत में प्रतिवर्ष 20 लाख टन ई-कचरा पैदा होता है. इसके 2020 तक 50 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है.  

भारत के ई-वेस्ट (मैनेजमेंट ऐंड हैंडलिंग) नियम, 2011 के मुताबिक ई-वेस्ट के रीसाइक्लिंग और रीड्यूसिंग की जिम्मेदारी मैन्युफैक्चरर की होगी. मैन्युफैक्चरर इसके लिए जगह-जगह कलेक्शन सेंटर खोलेगा या टेक बैक सिस्टम की शुरुआत करेगा.

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गौरतलब है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक सामान का उपभोग और इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में बड़े पैमाने पर ई-कचरा भी पैदा हो रहा है, जिनके निस्तारण के लिए ई-वेस्ट प्रबंधन का काम काफी बढ़ रहा है. इस क्षेत्र में कई कंपनियां संगठित तरीके से काम कर रही हैं.

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