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टिकटॉक पर बैन के मामले में कमजोर हैं कानून! जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

आईटी एक्ट की धारा 69A में सरकार के पास इस बात के पर्याप्त अधिकार हैं कि वह इंटरनेट आधारित किसी भी अप्लीकेशन को बैन कर दे. लेकिन सरकार को अपने इस निर्णय को कानूनी आधार पर न्यायोचित ठहराना होगा.

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टिकटॉक सहित 59 चीनी ऐप पर लगा है बैन
टिकटॉक सहित 59 चीनी ऐप पर लगा है बैन

  • सरकार ने 59 चीनी ऐप पर लगा दिया बैन
  • अब ये ऐप ले सकते हैं कानून का सहारा
  • ऐसे मामलों के लिए नहीं हैं पुख्ता कानून

सरकार ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देकर टिकटॉक, यूसी ब्राउजर सहित चीन के 59 ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इस मामले में भारत में स्पष्ट कानून नहीं है और सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों को साबित करना आसान नहीं होगा.

असल में आईटी एक्ट की धारा 69A में सरकार के पास इस बात के पर्याप्त अधिकार हैं कि वह इंटरनेट आधारित किसी भी अप्लीकेशन को बैन कर दे. लेकिन सरकार को अपने इस निर्णय को कानूनी आधार पर न्यायोचित ठहराना होगा.

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फंसा हुआ मामला

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साइबर मामलों के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, 'इस बात की बहुत संभावना है कि चीनी ऐप सरकार के इस प्रतिबंध का विरोध करें.' क्या सरकार के पास इस बात के लिए पुख्ता आधार है कि इन ऐप पर बैन लगाने का उसका निर्णय सही है? एक्सपर्ट का कहना है कि इस मामले में सरकार की कानूनी, संवैधानिक और डिजिटल क्षमता पर गौर करें तो मामला थोड़ा फंसा हुआ दिखता है.

सरकार को देना होगा साक्ष्य

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने जो आदेश दिया है उसमें इन ऐप के बारे में किसी साक्ष्य की जानकारी नहीं दी गई है. इसमें कहा गया है, 'एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ मोबाइल ऐप अनाधिकृत तरीके से यूजर्स के डेटा चुराकर उसे चुपके से देश के बाहर मौजूद सर्वर को भेज रहे हैं.' इसमें दिक्कत यह है कि भारत ने अभी तक ऐसा कोई डेटा प्रोटेक्शन एक्ट नहीं बनाया है जो ऐसे मामले देख सके.

साबित करना कठिन

एक साइबर लॉ फर्म के संस्थापक कहते हैं, 'सरकार के लिए यह साबित करना कठिन होगा कि यूजर्स का डेटा चीन सरकार के साथ साझा किया जा रहा है और यह किस कानून के तहत गैरकानूनी है.' सरकार द्वारा उठाए गए निजता के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके बारे में भी अभी कोई कानून नहीं है. सरकार बस सुप्रीम कोर्ट के 2007 के आदेश का हवाला दे सकती है जिसमें निजता के अधिकार की बात कही गई है.

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विराग गुप्ता कहते हैं, 'डेटा प्रोटेक्शन और निजता के बारे में समुचित कानून नहीं हैं. इसी तरह साइबर लॉ को लागू करने के लिए भी कोई तय नियामक नहीं है. अभी यह हर किसी के अधिकार में आ जाता है पुलिस, नीति आयोग, ट्राई, गृह मंत्रालय आदि.'

पोर्न साइट का उदाहरण

देश में पोर्न साइट पर बैन का ही उदाहरण लें. साल 2018 में इन पर बैन होने के बाद अभी भी बहुत से लोग इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ISP ब्लॉकिंग सिस्टम को धोखा देकर इन तक पहुंच जाते हैं. इसी तरह संचार मंत्रालय ने पिछले महीने WeTransfer पर बैन लगाया था. लेकिन फाइल शेयरिंग करने वाली इस कंपनी ने सरकार के साथ सहयोग करने से इंकार किया है और कई आईएसपी ने अभी तक WeTransfer को ब्लॉक नहीं किया है.

कैसे लागू होगा बैन?

चीनी ऐप पर बैन लागू करने के लिए सरकार को ऐपल, गूगल और देश के सैकड़ों इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के साथ तालमेल बनाना होगा. आईटी एक्ट राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इसलिए लोकल आईएसपी पर किसी राज्य में दबाव बनाना भी बहुत मुश्किल होगा.

(www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)

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