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'करोड़ों के फ्लैट में जिंदगी नर्क', नोएडा के शख्स ने बयां किया मेट्रो सिटीज का दर्द

कहते हैं न हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती, कुछ ऐसा ही हाल है देश के मेट्रो सिटीज की चमचमाती हुई हाईराइज इमारतों में रहने वाले लोगों का, बाहर से खूबसूरत दिखने वाली इन सोसायटीज में रहने वाले लोगों की अपनी ही परेशानी है.

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महानगरों में क्यों परेशान हैं लोग (Photo-ITG)
महानगरों में क्यों परेशान हैं लोग (Photo-ITG)

नोएडा में हाईराइज इमारतों में करोड़ों का घर लेने के बाद भी लोगों को चैन नहीं मिल रहा है. अक्सर सोशल मीडिया पर लोग अपना दर्द बयां करते हैं कि कैसे इतनी लग्जरी के बाद भी लोग अपनी जिंदगी से परेशान हैं. 

नोएडा में रहने वाले एक शख्स ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जिसको लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. उनका मानना है कि तमाम लग्जरी सुख-सुविधाओं के बावजूद, हाई-राइज सोसायटियों की जिंदगी तनावपूर्ण और दम घोंटने वाली ही है. 

इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया है, इस वीडियो में वो पहले तो अपनी सोसायटी के अंदर की बेहतरीन सुविधाएं दिखाते हैं जैसे स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, स्पोर्ट्स एरिया, स्टीम बाथ, सौना और योग स्पेस, लेकिन, इसके तुरंत बाद उन्होंने बताया कि क्यों ये तमाम सुख-सुविधाएं भी शहरी जिंदगी की रोजमर्रा की दिक्कतों और मानसिक तनाव को कम नहीं कर पा रही है.

वीडियो में अपनी बात रखते हुए उस शख्स ने कहा- "मैं अपना निजी अनुभव शेयर कर रहा हूं. करोड़ों की कीमत वाले इस फ्लैट की वैल्यू मेरी नजर में जीरो है, बिल्कुल जीरो. मुझे नहीं पता कि इस बारे में आपका नज़रिया क्या है."

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युवक ने फ्लैट के अंदर आने वाली दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा, “अब यह जगह नरक जैसी महसूस होती है. पूरी बिल्डिंग में एयर कंडीशनर से पैदा होने वाली भीषण गर्मी से जिंदगी मुश्किल कर दी है. यहां हर किसी का AC चल रहा है. यह पूरी जगह एक भट्टी बन जाती है, यहां ताजी हवा नाम की कोई चीज नहीं है.'

उन्होंने आगे तर्क दिया कि बड़े शहरों में कई लोग अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ होम लोन चुकाने में ही बिता देते हैं. 20 साल का लोन चुकाने के लिए सुबह से शाम तक आपको 8, 10 घंटे की नौकरी करनी पड़ती है. आपकी सैलरी का 50, 60, 70% हिस्सा लोन की किस्त में चला जाता है. आप हमेशा एक रिस्क में जीते हैं. आप एक गुलाम बन चुके हैं.

शहरी जिंदगी की तुलना गांव के जीवन से करते हुए उन्होंने आगे कहा कि साफ हवा, कम किराया और सुकूनभरी लाइफस्टाइल ग्रामीण इलाकों को कहीं अधिक शांतिपूर्ण बनाती है. उन्होंने कहा, “अगर आप गांव में 25,000 रुपये कमा रहे हैं और शहर में 1 लाख रुपये कमा रहे हैं, तो ध्यान रखिए, दोनों बराबर ही हैं. मेरे मुताबिक, शहर में रहना नरक जैसी जिंदगी जीने के बराबर है.
 

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