इंडिया टुडे 'इंडो-जापान कॉन्क्लेव' में भारत और जापान के बीच के ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों के नए आयामों पर गहन चर्चा हुई. दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली और देश के शहरी कायाकल्प में जापान की भूमिका को रेखांकित करते हुए दोनों देशों की भविष्य की साझेदारी का पूरा रोडमैप सामने रखा.
उन्होंने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, गहरे सम्मान और दीर्घकालिक सोच पर टिकी एक 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' है, उपराज्यपाल ने कहा कि भारत-जापान सहयोग का सबसे प्रत्यक्ष और परिवर्तनकारी रूप आम भारतीयों के रोजमर्रा के शहरी अनुभव में दिखाई देता है. पिछले दो दशकों में दिल्ली के विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे को आकार देने में जापान का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जिसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण दिल्ली मेट्रो है.
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तरनजीत सिंह संधू ने आगे कहा कि दिल्ली मेट्रो केवल एक परिवहन प्रणाली नहीं है, बल्कि यह कार्यकुशलता, समयबद्धता, सुरक्षा और स्थिरता का एक वैश्विक मॉडल है. जापानी वित्तीय सहायता और तकनीकी विशेषज्ञता ने इसे दुनिया के सबसे बड़े और भरोसेमंद मेट्रो नेटवर्कों में से एक बनाया है. इसने न केवल सड़कों पर भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम किया, बल्कि दिल्लीवासियों के जीवन जीने के तरीके को बदल दिया है.
एलजी ने कॉन्क्लेव में एक मुख्य सवाल उठाया "हम एक साधारण मेट्रो सिटी से ऊपर उठकर एक वैश्विक महानगर कैसे बनें. उन्होंने स्पष्ट किया कि एक महानगर सिर्फ बड़ी इमारतों से नहीं, बल्कि अपनी कार्यकुशलता, नवाचार और जीवन की गुणवत्ता से जाना जाता है. टोक्यो जैसे जापानी शहरों से सीखकर दिल्ली जापानी विशेषज्ञता का लाभ उठा सकती है. मेट्रो, बसों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को डेटा-संचालित और एआई (AI) आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट से जोड़कर यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है.
उपराज्यपाल ने दिल्ली के भविष्य के विकास के संदर्भ में 'द्वारका' का एक विशेष विजन साझा किया. उन्होंने कहा कि द्वारका को केवल एक रिहायशी इलाके के रूप में नहीं, बल्कि नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्री, इनोवेशन सेंटर्स और वैश्विक साझेदारियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.
यह क्षेत्र जापानी कंपनियों के लिए अपने क्षेत्रीय मुख्यालय, अनुसंधान केंद्र और तकनीकी हब स्थापित करने का एक आदर्श स्थान बन सकता है.