दुबई की चमकती गगनचुंबी इमारतों और आलीशान विलाओं की शान बढ़ाने में अब भारतीयों का बड़ा हाथ है. एनारॉक (Anarock) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भारतीयों ने दुबई के रिहायशी बाजार में 85,000 करोड़ से 95,000 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम निवेश किया है.
इस जबरदस्त निवेश के साथ ही भारतीय अब दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े विदेशी खरीदार बनकर उभरे हैं. भारतीय निवेशकों के बीच विदेशी प्रॉपर्टी अब महज रहने का ठिकाना नहीं, बल्कि अपनी संपत्ति बढ़ाने और वेल्थ मैनेजमेंट के एक बड़े हथियार के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
पिछले साल दुबई में रिहायशी संपत्तियां खरीदने वाले विदेशी नागरिकों में भारतीय सबसे आगे रहे. यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि भारत के रईसों और प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच विदेशी धरती पर घर खरीदने का क्रेज कितनी तेजी से बढ़ा है.
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साल 2025 दुबई के प्रॉपर्टी बाजार के लिए हर मायने में ऐतिहासिक रहा, जहां सभी श्रेणियों में संपत्तियों की जमकर खरीद-फरोख्त हुई. पूरे साल के दौरान वहां के रियल एस्टेट मार्केट में करीब 250 अरब डॉलर (यानी लगभग ₹23 लाख करोड़) का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया गया. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई इस जबरदस्त तेजी के पीछे भारतीय खरीदारों का बहुत बड़ा हाथ रहा है.
आखिर दुबई की ओर क्यों भाग रहे हैं भारतीय रईस?
भारतीय निवेशकों के लिए दुबई अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि पैसा बनाने वाली मशीन बन गया है. इसके पीछे के मुख्य कारण ये हैं जबरदस्त रेंटल इनकम, जहां भारत में घर किराए पर देने पर बमुश्किल 3% का रिटर्न मिलता है, वहीं दुबई में यह आंकड़ा 9% तक जा रहा है. दुबई में व्यक्तिगत आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता, जो रईसों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है.
वहीं लंबे समय तक रहने की सुविधा और सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों ने भारतीयों का काम आसान कर दिया है. 2021 के बाद से दुबई में घरों की कीमतें 60-75% तक बढ़ चुकी हैं, जिससे निवेशकों को मोटा मुनाफा हुआ है.
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सिर्फ निवेश, रहने का इरादा नहीं!
एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुबई में घर खरीदने वाले ज्यादातर भारतीय वहां शिफ्ट होने के लिए नहीं, बल्कि किराये (Rent) के जरिए कमाई करने और अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने के लिए निवेश कर रहे हैं. साल 2025 में दुबई में कुल 2.7 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन हुए, जिनमें भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही.
युद्ध का तनाव और भविष्य की चिंता
हालांकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट ने कुछ निवेशकों को 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में डाल दिया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि दुबई का बाजार इतना मजबूत है कि भारतीयों की दिलचस्पी यहां आसानी से कम नहीं होगी.